Somnath Swabhiman : “तलवार नहीं, नए हथकंडे”: पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा प्रहार
सोमनाथ, 11 जनवरी । Somnath Swabhiman : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर राष्ट्र को चेताते हुए कहा कि आज भारत के खिलाफ षड्यंत्र तलवारों से नहीं, बल्कि नए-नए तरीकों से रचे जा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वही शक्तियां आज भी सक्रिय हैं, जिन्होंने कभी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।
सोमनाथ: आस्था, संघर्ष और आत्मसम्मान का प्रतीक
Somnath Swabhiman : सोमनाथ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास हजारों वर्षों पुराने ऐसे पुण्य स्थल हैं, जो देश की सामर्थ्य, प्रतिरोध और सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक रहे हैं। लेकिन आज़ादी के बाद गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त लोगों ने इन स्थलों से दूरी बनाने की कोशिश की और इतिहास को भुलाने के प्रयास किए।
इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप
Somnath Swabhiman : पीएम मोदी ने कहा— “सोमनाथ की रक्षा के लिए असंख्य वीरों ने बलिदान दिए। कई नायकों का इतिहास इस मंदिर से जुड़ा है, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं ने आक्रमणों के वास्तविक स्वरूप को ‘व्हाइट वॉश’ करने की कोशिश की। मजहबी उन्माद को केवल लूट बताकर असली सच्चाई को छिपाया गया।
अगर लूट होती तो पहली बार में रुक जाते
Somnath Swabhiman : प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि यदि सोमनाथ पर हमले केवल धन लूटने के लिए होते, तो पहली बड़ी लूट के बाद ही यह सिलसिला रुक जाता। “लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोमनाथ के पवित्र विग्रह को तोड़ा गया, मंदिर को बार-बार ध्वस्त किया गया। फिर भी हमें यही पढ़ाया गया कि यह सब केवल आर्थिक लूट थी,” उन्होंने कहा।

तुष्टिकरण और कट्टर सोच पर हमला
Somnath Swabhiman : पीएम मोदी ने कहा कि धर्म के प्रति ईमानदार कोई भी व्यक्ति ऐसी मानसिकता का समर्थन नहीं कर सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने कट्टरपंथी सोच के सामने घुटने टेक दिए। आज़ादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिशें हुईं। 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां उठाई गईं।

देश को एकजुट रहने का संदेश
Somnath Swabhiman : अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया कि ऐसे षड्यंत्रकारी तत्वों से सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने कहा— “हमें खुद को मजबूत बनाना है, हमें एकजुट रहना है। भारत की आस्था, इतिहास और स्वाभिमान की रक्षा तभी संभव है जब राष्ट्र एक स्वर में खड़ा हो।”







