हैदराबाद, 17 अप्रैल। Revanth Reddy Statement : तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को हुए घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन बताया। Women Reservation Bill लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के गिरने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन भविष्य में एक निर्णायक राजनीतिक मोड़ के रूप में याद किया जाएगा।
राहुल गांधी की सराहना
Revanth Reddy Statement : मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि आज का दिन इसलिए खास है क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों और लोकतांत्रिक ताकतों ने एकजुट होकर उस स्थिति को टाल दिया, जिसे उन्होंने “राष्ट्रीय आपदा” की संज्ञा दी। उन्होंने विशेष रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में विपक्ष ने एक मजबूत और संगठित रुख अपनाया, जिससे इस विधेयक को पारित होने से रोका जा सका।
इन नेताओं की चर्चा
Revanth Reddy Statement : रेवंत रेड्डी ने आगे कहा कि यह केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संतुलन की रक्षा का उदाहरण है। उन्होंने उन सभी सहयोगी दलों और नेताओं का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद एकजुटता दिखाते हुए इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता उद्धव ठाकरे, राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा वामपंथी दलों के नेताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इन सभी नेताओं ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा उद्देश्य के लिए कार्य किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, यह एक ऐसा क्षण है जब विपक्ष ने अपनी सामूहिक शक्ति और एकजुटता का प्रभावी प्रदर्शन किया।
पारित नहीं हो सका विधेयक
Revanth Reddy Statement : उल्लेखनीय है कि संविधान संशोधन से जुड़े इस विधेयक को पारित होने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। हालांकि, मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका और सदन में ही गिर गया।
इस विधेयक के गिरने के बाद सरकार द्वारा प्रस्तावित दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों—जो परिसीमन (delimitation) और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित थे—पर भी मतदान नहीं हो सका। केंद्र सरकार का तर्क था कि ये दोनों विधेयक महिला आरक्षण कानून से गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें एक साथ देखा जाना चाहिए।
तीनों को बताया अलग अलग विषय
Revanth Reddy Statement : हालांकि, रेवंत रेड्डी ने इस दृष्टिकोण का स्पष्ट रूप से विरोध किया था। उनका मानना है कि महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि—ये तीनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें आपस में जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कड़ी बनाकर आम जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है, जिससे नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
पहले ही जताई थी चिंता
Revanth Reddy Statement : मुख्यमंत्री ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने सुझाव दिया था कि लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए एक मिश्रित (हाइब्रिड) मॉडल अपनाया जाए और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि महिला आरक्षण को बिना किसी अन्य शर्त के तत्काल लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को शीघ्र ही राजनीतिक प्रतिनिधित्व का लाभ मिल सके।
रेवंत रेड्डी ने अपने बयान के अंत में दोहराया कि लोकतंत्र में नीतिगत स्पष्टता और पारदर्शिता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को अन्य जटिल विषयों के साथ जोड़ने के बजाय स्वतंत्र रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि देश की महिलाओं को उनका उचित अधिकार मिल सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सके।







