नई दिल्ली, 2 जनवरी। Politics 2026 : नए साल की शुरुआत के साथ ही देश की राजनीति में हलचल तेज होती दिख रही है। साल 2026 को लेकर यह आकलन मजबूत हो रहा है कि यह वर्ष राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन संकट और वैश्विक तनावों के बीच कई बड़े बदलावों का गवाह बन सकता है। क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और “एकला चलो रे” की राजनीति के चलते राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों में दरार गहराने की आशंका जताई जा रही है।
Politics 2026 : विपक्षी गठबंधन में बढ़ी असहजता
विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर खींचतान और वैचारिक मतभेद पुराने साथियों को अलग राह चुनने के लिए मजबूर कर सकते हैं। हाल ही में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के बयान के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। उनके इस बयान कि विपक्षी दलों को जमीनी स्तर पर चुनाव लड़ना चाहिए, ने गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है।
भाजपा प्रवक्ता ने कसा तंज
Politics 2026 : इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि साल बदल गया है, लेकिन ‘इंडी गठबंधन’ की हालत जस की तस है। उनके अनुसार, इस गठबंधन के पास न कोई स्पष्ट मिशन है और न ही ठोस विजन, बल्कि भ्रम और आपसी टकराव ही इसकी पहचान बन चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले सभी दल एकजुट दिखते हैं, लेकिन नतीजे आते ही भीतरू संघर्ष खुलकर सामने आ जाता है, जैसा दिल्ली और बिहार चुनावों के बाद देखा गया।
इस साल कई स्थानीय चुनाव
Politics 2026 : राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2026 में कई राज्यों में होने वाले स्थानीय और क्षेत्रीय चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इन चुनावों के नतीजे यह भी बताएंगे कि केंद्र की सत्ता पर पकड़ कितनी मजबूत बनी रहती है।
भारी पड़ सकती है सड़क की राजनीति
Politics 2026 : साथ ही, यह वर्ष ऐसा हो सकता है जब सड़क की राजनीति संसद पर भारी पड़े। सरकार की कुछ नीतियों के विरोध में विपक्ष जन आंदोलनों को धार दे सकता है। इसका संकेत नए साल की शुरुआत में ही देखने को मिला, जब महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र भर्ती विज्ञापन में देरी के विरोध में सड़कों पर उतर आए। पुणे में बड़ी संख्या में छात्रों ने एक साल की आयु-सीमा में छूट की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से राहत की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आंदोलनों को विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए भुना सकता है।
रणनीतिक पुनर्गठन का साल
Politics 2026 : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 2026 को रणनीतिक पुनर्गठन का साल माना जा रहा है। दुनिया एक बार फिर दो बड़े ध्रुवों के बीच झूलती नजर आ सकती है, जिसमें भारत संतुलन की भूमिका निभा सकता है। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चिंताओं को लेकर तनाव और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। ऐसे में भारत के सामने अपनी विनिर्माण क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत
Politics 2026 : 2026 में भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी न केवल रणनीतिक दृष्टि से अहम होगी, बल्कि भारत की तटस्थता और ‘विश्व गुरु’ की छवि की भी परीक्षा लेगी। इसके अलावा, क्वाड शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी को लेकर भी वैश्विक निगाहें टिकी रहेंगी।
व्यापार समझौते निर्णायक मोड़ पर
Politics 2026 : भारतीय विदेश नीति के लिहाज से भी यह साल उपलब्धियों भरा हो सकता है। वर्षों से लंबित व्यापार समझौते निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकते हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की संभावित यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकती है, जो भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
फरवरी 2026 में भारत वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिससे तकनीकी दुनिया में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। वहीं, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनाव भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, जिन पर नई दिल्ली की पैनी नजर रहेगी।
साल के अंत में, दिसंबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के मियामी में डोनाल्ड ट्रंप के गोल्फ क्लब में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।







