मोतिहारी। Poems: राष्ट्रीय समाचार पोर्टल— नेशनल प्राइम न्यूज हिंदी और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्प है। इसी कड़ी में लेखकों की रचनाएं आमंत्रित की गई हैंं। इसी कड़ी में आज प्रस्तुत है— वरिष्ठ रंगकर्मी प्रसाद रत्नेश्वर की कविताएं—
प्रसाद रत्नेश्वर की दो कविताएँ
बैलून और विद्रोह
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हवा भरने से
फूल जाते बैलून
फूल कर हो जाते
कुप्पा
फटते हैं
एक-एक कर
वे फटें एक साथ तो
भ्रम हो सकता है
उनके विद्रोह का
लेकिन
लिखी नहीं जा सकती
क्रांति-गाथा
बैलून की.
लक्ष्मण रेखा
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ऊँची कुर्सी पर
बिठाया गया
आदमी भी
होता है
असुरक्षित
लाँघना
लक्ष्मण – रेखा को
होता है
उसके लिए भी
वर्जित।







