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Brain Office : भारत अब दुनिया का ‘बैक ऑफिस’ ही नहीं, ‘ब्रेन ऑफिस’ भी है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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PM Modi Says India Is Now a Global Brain Office

Brain Office : एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में पीएम मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार, भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर; कहा- भारत अपनी क्षमता बढ़ा रहा है ताकि दुनिया की क्षमता भी बढ़ सके

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। Brain Office


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अब दुनिया के लिए केवल ‘बैक ऑफिस’ यानी सेवाएं उपलब्ध कराने वाला केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से ‘ब्रेन ऑफिस’ के रूप में भी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के इंजीनियर, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और युवा प्रतिभाएं अब अत्याधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और उत्पाद विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। गुरुवार को वह नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी क्षमता केवल देश के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरी दुनिया की क्षमताओं और समृद्धि को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत और वैश्विक सहयोग की अवधारणा को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि भारत अपनी ताकत इसलिए बढ़ा रहा है, ताकि वह दुनिया की प्रगति में भी अधिक प्रभावी योगदान दे सके।

देश में उत्सवों के माहौल के बीच आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने विदेशी प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका, आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, खेल उपलब्धियों, निर्यात और औद्योगिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे।

वैश्विक व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत

Brain Office : एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में हो रही चर्चाओं की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया के लगभग हर हिस्से में नई विश्व व्यवस्था को लेकर चर्चा हो रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलाव अब केवल सरकारों, राजनयिकों या बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में होने वाले आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक बदलावों का असर रोजगार, व्यापार, तकनीक, आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों की जीवनशैली तक पहुंचता है। ऐसे में वैश्विक परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा करने वाले अंतरराष्ट्रीय मंचों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया तेजी से बदल रही हो और इन बदलावों के परिणाम आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हों, तब यह समझना आवश्यक हो जाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका स्वरूप कैसा होगा।

उन्होंने सम्मेलन की विषयवस्तु ‘द वर्ल्ड बिटवीन ऑर्डर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वैश्विक समुदाय के सामने यह समझने की चुनौती है कि मौजूदा विश्व व्यवस्था में बदलाव क्यों आ रहा है। इसके साथ ही यह भी विचार करना होगा कि पुरानी व्यवस्थाएं वर्तमान समय की चुनौतियों और संकटों का समाधान करने में क्यों अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पा रही हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इन प्रश्नों के उत्तर तलाशते समय भारत की भूमिका पर विचार करना भी आवश्यक है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत किस प्रकार योगदान दे सकता है और उसकी बढ़ती आर्थिक, तकनीकी तथा कूटनीतिक क्षमता दुनिया के लिए किस तरह उपयोगी हो सकती है, यह भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था में सुधार आवश्यक

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित हुई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना इस विचार के साथ की गई थी कि दुनिया में विवादों का समाधान शक्ति प्रदर्शन के बजाय संवाद, सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ऐसी व्यवस्था स्थापित करने की चुनौती थी, जो देशों के बीच सहयोग बढ़ाए, संघर्षों को रोके और वैश्विक शांति को मजबूत करे। हालांकि, समय के साथ दुनिया की आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियों में व्यापक बदलाव आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में नई अर्थव्यवस्थाएं उभरी हैं, तकनीक का तेजी से विकास हुआ है और अनेक देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संरचना और उनके कामकाज में उन बदलावों के अनुरूप आवश्यक सुधार नहीं हो सके हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं के निर्णय लेने के तरीकों और वर्तमान विश्व की वास्तविकताओं के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। इसलिए अब ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें बदलती परिस्थितियों और विभिन्न देशों की बढ़ती भूमिका को उचित स्थान मिल सके।

प्रधानमंत्री ने व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्गों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये माध्यम पहले देशों को एक-दूसरे के करीब लाने, व्यापार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे। लेकिन वर्तमान समय में कई स्थानों पर यही माध्यम संघर्ष, हथियारकरण और भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार मार्गों, तकनीकी क्षमताओं और आर्थिक संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच दुनिया को ऐसी समावेशी व्यवस्था की जरूरत है, जो सहयोग को प्रोत्साहित करे और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाए।

मानवता केंद्रित विश्व व्यवस्था बनाने पर भारत का जोर

Brain Office : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया में दिखाई दी विभाजनकारी प्रवृत्तियों और देशों के बीच विश्वास की कमी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वैश्विक संकटों का समाधान केवल अलग-अलग देशों के प्रयासों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, साझा जिम्मेदारी और मानवता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण जरूरी है।

उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2020 में जी-20 मंच से उन्होंने मानवता केंद्रित नई विश्व व्यवस्था बनाने का आह्वान किया था। इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं। यदि समय और चुनौतियां बदल जाएं, लेकिन संस्थाएं और उनकी कार्यप्रणाली पुराने ढर्रे पर ही बनी रहें, तो वे नई समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में कमजोर पड़ सकती हैं।

उन्होंने कहा, “यदि सदी बदल जाए और हम न बदलें, तो परिवर्तन लाने की हमारी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।”

इस संदर्भ में उन्होंने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को उचित महत्व देने पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक सहयोग केवल तब तक प्रभावी नहीं रहना चाहिए, जब तक परिस्थितियां अनुकूल हों। असली परीक्षा संकट के समय होती है, जब देशों को एक-दूसरे की मदद करने और साझा समस्याओं का समाधान निकालने की आवश्यकता पड़ती है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के बीच प्रभावी सहमति जरूरी है। दुनिया के अलग-अलग देशों के हितों, जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो अधिक न्यायसंगत और व्यावहारिक हो।

‘मत्स्य न्याय’ का उदाहरण देकर समझाई मजबूत व्यवस्था की जरूरत

Brain Office : प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन और चाणक्य के अर्थशास्त्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘मत्स्य न्याय’ की अवधारणा के माध्यम से कमजोर व्यवस्था के परिणामों को समझाया।

उन्होंने कहा कि जब किसी व्यवस्था में नियमों का प्रभावी पालन नहीं होता और कमजोर पक्षों की रक्षा करने वाली संस्थाएं पर्याप्त रूप से काम नहीं करतीं, तब शक्तिशाली पक्ष कमजोर को दबाने लगता है। इसे ‘मत्स्य न्याय’ कहा गया है, जिसमें बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की मूल सोच ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें इस तरह की स्थिति पैदा ही न हो। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जहां केवल शक्ति के आधार पर फैसले न हों, बल्कि नियमों, सहयोग और सभी देशों के हितों का सम्मान किया जाए।

उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की ओर से 100 से अधिक देशों को वैक्सीन और दवाइयां उपलब्ध कराने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह भारत की उस सोच का उदाहरण है, जिसमें अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल व्यापक मानव कल्याण के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत ने संकट के समय दूसरे देशों की जरूरतों को समझते हुए सहयोग की भावना को प्राथमिकता दी। यह दृष्टिकोण भारत की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाता है।

‘विश्वबंधु’ के रूप में भारत ने बनाई अलग पहचान

Brain Office : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वयं को ‘विश्वबंधु’ के रूप में स्थापित किया है। इसका अर्थ ऐसी भूमिका से है, जिसमें भारत विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने, संवाद को प्रोत्साहित करने और मतभेदों के बीच सहमति बनाने का प्रयास करता है।

उन्होंने जी-20 और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई अवसरों पर विभिन्न देशों के बीच मतभेदों के कारण सर्वसम्मति बनना कठिन दिखाई दे रहा था। ऐसी परिस्थितियों में भारत ने अलग-अलग पक्षों के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने विभिन्न हितों और विचारों के बीच पुल का काम करते हुए सर्वसम्मति से दिल्ली घोषणापत्र तैयार कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक समुदाय के विश्वास का संकेत बताया।

उन्होंने कहा, “यह भारत की विश्वबंधु की भूमिका पर दुनिया के विश्वास को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का उद्देश्य केवल अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि वैश्विक सहयोग और साझा विकास के लिए भी योगदान देना है।

‘पावर टू एम्पावर’ के जरिए दुनिया की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

Brain Office : प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती शक्ति और वैश्विक कल्याण के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए अपने ‘पावर टू एम्पावर’ विजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य अपनी आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि देश के साथ-साथ दुनिया को भी इसका लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि जब भारत आत्मनिर्भर बनेगा, उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और देश में कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे, तब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को भी मजबूती मिलेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने तथा वैश्विक आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत अपनी क्षमता इसलिए बढ़ा रहा है ताकि दुनिया की क्षमता भी बढ़ सके।”

उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे देश की तकनीकी दक्षता, रोजगार, उत्पादन क्षमता, अनुसंधान और वैश्विक योगदान से भी जोड़ा।

उनके अनुसार, भारत जितना अधिक आत्मनिर्भर और सक्षम बनेगा, उतनी ही अधिक मजबूती के साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान दे सकेगा।

आगे बढ़ रहा भारत

Brain Office : देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास गति का उल्लेख किया और कहा कि देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति के पीछे विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलाव, बुनियादी ढांचे का विकास, डिजिटल तकनीक का विस्तार, औद्योगिक क्षमता में वृद्धि और नवाचार को बढ़ावा देने जैसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने तकनीकी विकास और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत दुनिया में नंबर एक है।”

भारत में डिजिटल भुगतान प्रणालियों के व्यापक इस्तेमाल से लोगों, छोटे कारोबारियों और कंपनियों को लेनदेन में सुविधा मिली है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों को तकनीक से जोड़ने में भी भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग अब केवल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, सार्वजनिक सेवाओं, आर्थिक गतिविधियों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बढ़ रहा है।

हाइड्रोजन ट्रेन को बताया तकनीकी प्रगति का प्रतीक

Brain Office : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में तकनीकी बदलावों का उल्लेख करते हुए बताया कि जनगणना में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग से जोड़ते हुए कहा कि देश विभिन्न क्षेत्रों में नई प्रणालियों को अपना रहा है।

उन्होंने पहली बार भारत में हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन का भी उल्लेख किया। हाइड्रोजन आधारित परिवहन तकनीक को स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य के परिवहन विकल्पों से जोड़कर देखा जाता है। इस दिशा में प्रगति ऊर्जा के नए विकल्पों को विकसित करने और परिवहन क्षेत्र में तकनीकी क्षमताओं का विस्तार करने के प्रयासों को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र में हासिल उपलब्धि को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “पहली बार भारत ने गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के क्षेत्र में 300 गीगावाट का आंकड़ा पार किया है।”

गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा सहित ऐसे स्रोत शामिल होते हैं, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं होते। इस क्षेत्र में क्षमता का विस्तार भारत के ऊर्जा ढांचे में हो रहे बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा और तकनीकी नवाचार में प्रगति भारत के विकास की व्यापक तस्वीर को सामने लाती है। इससे देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध विकल्प विकसित करने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना

Brain Office : प्रधानमंत्री ने हाल ही में एशियाई खेलों में 85 पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों के दल से हुई अपनी मुलाकात का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और कई स्पर्धाओं में पहली बार ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं।

उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि खेलों में मिली सफलताएं देश में हो रहे व्यापक बदलावों का भी हिस्सा हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि लगातार अभ्यास, बेहतर तैयारी और दृढ़ संकल्प से नए लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम और मुक्केबाजों के प्रदर्शन की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश का गौरव बढ़ाया।

उन्होंने सेपक टकरॉ खेल का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत ने हालिया एशियाई खेलों में पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में पहली बार पदक जीता।

प्रधानमंत्री के अनुसार, खेलों में हासिल की जा रही उपलब्धियां देश के युवाओं के आत्मविश्वास और बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक हैं। खेलों के क्षेत्र में सफलता के लिए प्रतिभा के साथ-साथ प्रशिक्षण, अनुशासन, सुविधाओं और निरंतर प्रयासों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ से बदल रहा देश

Brain Office : प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, खेल और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में सामने आ रही उपलब्धियां देश में हो रहे व्यापक परिवर्तन को दर्शाती हैं। उन्होंने इस बदलाव को सरकार की ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ नीति से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि सुधारों का उद्देश्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना, प्रदर्शन में सुधार करना और उनके माध्यम से स्थायी परिवर्तन लाना है। जब कोई राष्ट्र स्पष्ट लक्ष्य और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तो उसकी आधारभूत संरचना और विकास से जुड़ी व्यवस्थाएं उसकी कमजोरी के बजाय शक्ति का आधार बन जाती हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार, देश की प्रगति में सड़क, परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल संपर्क, उत्पादन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन क्षेत्रों में क्षमता बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है और नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में सरकार के प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी भी जरूरी है। युवाओं, महिलाओं, किसानों, मछुआरों, गरीबों और मध्यम वर्ग की भूमिका देश के विकास को व्यापक आधार प्रदान करती है।

निर्यात में वृद्धि और समुद्री उत्पादों के कारोबार का विस्तार

Brain Office : प्रधानमंत्री ने देश के निर्यात क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि सितंबर में वस्तुओं के निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने पिछले 12 वर्षों के दौरान समुद्री उत्पादों के निर्यात में दोगुने से अधिक वृद्धि का भी उल्लेख किया।

निर्यात में वृद्धि को उन्होंने देश की उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने के संदर्भ में रखा। समुद्री उत्पादों का निर्यात मछुआरों, प्रसंस्करण उद्योग, परिवहन और संबंधित कारोबारी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक गतिविधियों का विस्तार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है।

उन्होंने किसानों और मछुआरों सहित उन सभी वर्गों के योगदान का उल्लेख किया, जो देश की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके अनुसार, जब इन क्षेत्रों की क्षमता बढ़ती है, तो उसका लाभ व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

गांवों में 3.5 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां बनने का उल्लेख

Brain Office : महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गांवों में 3.5 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर छह करोड़ तक पहुंचाना है।

लखपति दीदी पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने इस पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवारों और ग्रामीण समुदायों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाओं को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना, उनकी आय बढ़ाने में सहायता करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से विकास का लाभ समाज के अधिक व्यापक हिस्से तक पहुंच सकता है।

योजना के तहत 70 लाख नए रोजगार

Brain Office : प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 70 लाख नए रोजगार सृजित किए गए हैं। उन्होंने रोजगार के अवसरों को देश की आर्थिक प्रगति और नागरिकों की आकांक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि विकास का वास्तविक महत्व तब बढ़ता है, जब उसके माध्यम से लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और उन्हें कौशल के अनुरूप अवसर देना देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोजगार के अवसर बढ़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और अर्थव्यवस्था में मांग तथा गतिविधियों को भी समर्थन मिल सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास विकास के लाभों को विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है। इसमें युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आर्थिक अवसर, किसानों और मछुआरों को बाजार तक बेहतर पहुंच तथा मध्यम वर्ग को राहत देने जैसे विषय शामिल हैं।

मध्यम वर्ग के लिए कर राहत का जिक्र

Brain Office : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त किया गया है। उन्होंने इसे नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और उनकी आर्थिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के संदर्भ में प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जीवन की सुगमता बढ़ रही है और रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। उनके अनुसार, आर्थिक विकास का उद्देश्य केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों में सुधार करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

उन्होंने कहा कि रोजगार, आय, आर्थिक अवसर और नागरिक सुविधाओं में सुधार से विकास की प्रक्रिया अधिक व्यापक बनती है। देश के विभिन्न वर्गों को आगे बढ़ने के अवसर मिलना विकसित भारत की परिकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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अनुसंधान और नवाचार में भारत की बढ़ती भूमिका

Brain Office : प्रधानमंत्री ने अनुसंधान, वैज्ञानिक गतिविधियों और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि शोध प्रकाशनों के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में भारत में लगभग 1.5 लाख पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह आंकड़ा देश में नए विचारों, तकनीकी प्रयोगों और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की दीर्घकालिक प्रगति के लिए केवल वर्तमान तकनीक का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। नई तकनीक विकसित करना, शोध को बढ़ावा देना और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना भी आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं और छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत में प्रतिभा और तकनीकी दक्षता के विस्तार से देश को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

अनुसंधान और पेटेंट गतिविधियां उद्योग, शिक्षा संस्थानों और वैज्ञानिक समुदाय के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में भी सहायक हो सकती हैं। इस दिशा में प्रगति भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों से जुड़ी है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारतीय इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

Brain Office : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकंडक्टर उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के 20 प्रतिशत चिप डिजाइन विशेषज्ञ भारत में हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर अत्याधुनिक दो से तीन नैनोमीटर चिप डिजाइन करने में भी काम कर रहे हैं।

सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, संचार प्रणालियों, वाहनों और अनेक औद्योगिक तकनीकों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस क्षेत्र में डिजाइन क्षमता बढ़ने से भारत की तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक उद्योग में उसकी भूमिका का विस्तार हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा, “हमारे छात्रों ने अब तक 325 से अधिक चिप डिजाइन तैयार किए हैं।”

उन्होंने कहा कि चिप डिजाइन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में भारतीय छात्रों और इंजीनियरों की भागीदारी देश में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास की संभावनाओं को सामने लाती है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर रणनीतिक महत्व प्राप्त है, क्योंकि आधुनिक अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण उद्योग चिप की उपलब्धता और डिजाइन क्षमताओं पर निर्भर करते हैं। ऐसे में भारत की डिजाइन विशेषज्ञता देश को उच्च तकनीकी मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर देती है।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब केवल बैक ऑफिस तक सीमित नहीं

Brain Office : प्रधानमंत्री ने भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत में हैं।

उन्होंने कहा कि पहले इन केंद्रों को मुख्य रूप से बैक-ऑफिस सेवाओं और सहायक कारोबारी गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन अब इनकी भूमिका तेजी से बदल रही है और ये उच्च तकनीकी तथा ज्ञान आधारित कार्यों में योगदान दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत में स्थित जीसीसी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। इससे भारत की पहचान केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नए विचारों और तकनीकी समाधानों के विकास में भागीदारी करने वाले देश के रूप में भी मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभाएं अब वैश्विक कंपनियों के लिए केवल नियमित काम नहीं कर रही हैं, बल्कि जटिल तकनीकी समस्याओं के समाधान, नए उत्पादों के विकास और भविष्य की तकनीकों को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत अब दुनिया के लिए केवल बैक ऑफिस नहीं, बल्कि ब्रेन ऑफिस के रूप में भी काम कर रहा है।”

यह टिप्पणी भारत के सेवा क्षेत्र और तकनीकी मानव संसाधन में हो रहे बदलाव को रेखांकित करती है। भारत में उपलब्ध कुशल इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की क्षमता वैश्विक कंपनियों को अनुसंधान, नवाचार और उत्पाद विकास से जुड़ी गतिविधियां यहां संचालित करने का अवसर देती है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

Brain Office : प्रधानमंत्री ने दवा उद्योग में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई के तहत पेनिसिलिन-जी का घरेलू उत्पादन फिर शुरू हुआ है।

उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में कई वर्षों के बाद पेनिसिलिन-जी का निर्माण शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री ने इसे दवा उद्योग में घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करने और महत्वपूर्ण औषधीय सामग्रियों की आपूर्ति को मजबूत बनाने के प्रयासों से जोड़ा।

पेनिसिलिन-जी दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण सक्रिय औषधीय घटक है। इस तरह के घटकों के घरेलू उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सक्रिय औषधीय घटकों की संपूर्ण घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इस क्षेत्र में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है।

उन्होंने कहा कि दवा उद्योग में उत्पादन क्षमता बढ़ाना स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने से औद्योगिक गतिविधियों, तकनीकी विशेषज्ञता और रोजगार के अवसरों को भी समर्थन मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भारत की व्यापक आत्मनिर्भरता की रणनीति का हिस्सा बताया।

PM Modi Says India Is Now a Global Brain Office

विकसित भारत के संकल्प से नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का भरोसा

Brain Office : अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं, उनकी मेहनत और देश की क्षमताओं पर विश्वास भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प भी देश के पास है। प्रधानमंत्री ने बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, लगातार प्रयास करने और अपने संकल्पों को पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी क्षमता, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, अनुसंधान, औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा, खेल और वैश्विक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि देश के नागरिकों की भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत विकास के नए अवसर तैयार कर सकेगा। उन्होंने कहा, “हम बड़े सपने देखेंगे, हर चुनौती को अवसर में बदलेंगे और हर संकल्प को पूरा करेंगे।”

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में प्रधानमंत्री का संबोधन भारत की बदलती वैश्विक भूमिका, आर्थिक प्रगति, तकनीकी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती क्षमता का उद्देश्य न केवल देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है, बल्कि वैश्विक विकास, समृद्धि और मानव कल्याण में भी योगदान देना है।

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