नई दिल्ली, 18 फरवरी। Phulera Dooj Festival : भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम को समर्पित फुलेरा दूज का पावन पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ने वाला यह उत्सव ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा और वृंदावन में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस दिन से ब्रज में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
Phulera Dooj Festival : फूलों की होली: प्रेम और भक्ति का रंग
मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों संग फूलों की होली खेली थी। ब्रज के मंदिरों में राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं और फूलों की वर्षा के बीच भक्त दिव्य होली लीला का आनंद लेते हैं।
फुलेरा दूज, जिसे फुलैरा दूज भी कहा जाता है, बसंत पंचमी और होली के बीच आने वाला महत्वपूर्ण पर्व है।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
Phulera Dooj Festival : ज्योतिष शास्त्र में फुलेरा दूज को दोषों से मुक्ति का दिन माना गया है। कई मान्यताओं के अनुसार यह “अबूझ मुहूर्त” है, यानी विवाह, सगाई जैसे मांगलिक कार्य बिना विशेष मुहूर्त के भी किए जा सकते हैं। हालांकि, कुछ ज्योतिषी इसे विवाह के लिए अलग से सूचीबद्ध नहीं करते।
19 फरवरी का पंचांग
इस वर्ष फुलेरा दूज गुरुवार को है।
- नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद, रात्रि 8:52 बजे तक
- चंद्रमा: कुंभ राशि में
- सूर्योदय: सुबह 6:56 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:14 बजे
अशुभ काल
- राहुकाल: दोपहर 2:00 से 3:25 बजे
- यमगंड: सुबह 6:56 से 8:21 बजे
- गुलिक काल: सुबह 9:46 से 11:10 बजे
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:58 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:28 से 3:13 बजे
- अमृत काल: दोपहर 1:00 से 2:34 बजे
रंग, भक्ति और आनंद का संगम
Phulera Dooj Festival : फुलेरा दूज रंगों, प्रेम और श्रद्धा से भरा उत्सव है। इस दिन भक्त राधा-कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरित करते हैं और होली के आगमन की खुशियां मनाते हैं।
ब्रज की गलियों में इस दिन से रंगोत्सव की रौनक और भक्ति का रंग एक साथ दिखाई देने लगता है।







