इस्लामाबाद, 29 नवंबर। Pakistan Imran Crisis : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की अदियाला जेल में कथित हत्या की अफवाह फैलने के बाद देशभर में तनाव की स्थिति बन गई है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) और उनकी बहन अलीमा खान लगातार शहबाज शरीफ सरकार से मांग कर रही हैं कि उन्हें जेल में बंद इमरान से मुलाकात की अनुमति दी जाए। इसी बीच विपक्षी गठबंधन ने भी पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दे दी है।
विपक्ष की चेतावनी—“हालात और बिगड़े तो जनता सड़कों पर होगी”
Pakistan Imran Crisis : पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ के अनुसार, पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के प्रमुख महमूद अचकजई ने शुक्रवार को संसद भवन के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को कड़ी चेतावनी दी।
अचकजई ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा— “हमने सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के लोगों को अभी तक सड़कों पर उतरने से रोके रखा है। अगर वे बाहर आ गए तो सरकार की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी।”
संसद को ‘रबर स्टांप’ बनाने का आरोप
Pakistan Imran Crisis : अचकजई ने शहबाज सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संसद अब पूरी तरह सरकार की मुहर (रबर स्टांप) बन चुकी है। नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक कहीं और से आदेश ले रहे हैं।
जनजातीय इलाकों में हिंसा और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रहीं, लेकिन विपक्ष को इन मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा है।
इमरान को बहन और नेताओं से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा?
Pakistan Imran Crisis : अचकजई ने सवाल उठाया कि सरकार, इमरान खान को किस आधार पर जेल में रखे हुए है। “खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अदियाला जेल के बाहर बैठे हैं, लेकिन पीटीआइ के संस्थापक से मिलने की उनकी अपील पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
इलेक्शन में धांधली का आरोप
Pakistan Imran Crisis : पीटीआइ के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने हाल ही में हुए उपचुनावों को “लोकतंत्र की हत्या” बताया।
उन्होंने दावा किया कि हरिपुर उपचुनाव में नतीजे बदले गए— “फॉर्म-47 पर जो रिजल्ट दर्ज था, कंप्यूटर पर जारी किया गया नतीजा उससे अलग था।”
इमरान के बेटे ने मांगा ‘जिंदा होने’ का सबूत
Pakistan Imran Crisis : एक दिन पहले इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने पिता के जिंदा होने का सबूत मांगा था।
साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और इंटरनेशनल कोर्ट से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।







