नई दिल्ली, 14 नवंबर। NDA women lead : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंतिम नतीजों से पहले ही रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि एनडीए बड़ी बढ़त की ओर बढ़ रहा है। इस बार जनता ने महागठबंधन की जगह फिर एक बार एनडीए पर भरोसा जताया है।
63 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा
इस चुनाव में बिहार ने ऐतिहासिक मतदान किया—कुल 67% वोटिंग, जो स्वतंत्र भारत के चुनाव इतिहास में एक अभूतपूर्व जनभागीदारी है।
सबसे चौंकाने वाली बात रही महिलाओं का 71% मतदान, जो पुरुषों से लगभग 10% अधिक रहा और नया रिकॉर्ड भी बना।
महिलाओं का झुकाव नीतीश की तरफ
NDA women lead : ‘बढ़ियां तो हैं नीतीशे कुमार’ वाला नारा इस चुनाव में हकीकत के रूप में दिखा। बीते दो दशकों में नीतीश कुमार ने महिला सशक्तीकरण पर जो निरंतर काम किया, उसका सीधा असर महिला वोट बैंक पर दिखाई दिया।
हाल ही में लॉन्च की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये का सीधा हस्तांतरण भी महिलाओं में सरकार के प्रति भरोसे को मजबूत करता दिखा।
बिहार—महिला भागीदारी का अग्रणी राज्य
- पंचायत व्यवस्था में देश में पहली बार महिलाओं को आरक्षण
- 2016 से शराबबंदी, महिलाओं के बीच सबसे मजबूत मुद्दा
- साइकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति योजनाएं
- स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार
- सरकारी नौकरियों में 33% और पंचायती राज में 50% आरक्षण
इन कदमों ने महिलाओं को पहले से कहीं अधिक आत्मनिर्भर और जागरूक बनाया है। यही वजह है कि इस बार महिलाओं ने दूसरे के कहने पर नहीं, बल्कि अपने फैसले के आधार पर मतदान किया।
31 लाख ‘लखपति दीदियां’: नीतीश मॉडल का बड़ा आधार
NDA women lead : बिहार वह पहला राज्य है जहां 31 लाख से अधिक जीविका दीदियां अब ‘लखपति’ बनी हैं। यह योजना 2023 में शुरू हुई, लेकिन इससे पहले भी यह समूह नीतीश सरकार के समर्थन में रहा है। इस चुनाव में उनका समर्थन और अधिक मजबूत माना जा रहा है।
महिला वोटिंग ने बदल दिया चुनाव का समीकरण
NDA women lead : रुझानों से साफ है कि इस बार महिला मतदाताओं के उत्साह ने किसी भी संभावित सत्ता-विरोधी लहर को पीछे धकेल दिया और नतीजों की दिशा एनडीए की ओर मोड़ दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी मतदान वृद्धि आमतौर पर बदलाव का संकेत देती है, लेकिन बिहार में यह रुझान व्यवस्था के खिलाफ नहीं बल्कि महिलाओं के कल्याण के लिए किए गए कामों के पक्ष में गया।
महिला सहभागिता—बिहार की नई राजनीतिक ताकत
NDA women lead : 2010 से लगातार चार चुनावों में महिलाएं पुरुषों से अधिक मतदान कर रही हैं, लेकिन इस बार 70% से अधिक महिला मतदान ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ संख्या नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि चुनावी नतीजों की दिशा तय भी कर रही हैं।
बिहार की महिलाएं अब मतदान प्रक्रिया की निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं—और यही शक्ति इस बार नीतीश कुमार और एनडीए के लिए ‘किक-स्टार्ट’ साबित होती दिख रही है।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.







