मोतिहारी, 10 मई। Motihari Children Case : पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित बापूधाम रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए 21 नाबालिग बच्चों के मामले ने अब गंभीर सामाजिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने जिला प्रशासन से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि शिक्षा के नाम पर गरीब और आदिवासी समुदाय के बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका धर्मांतरण कराने की साजिश रची जा रही थी। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, मोतिहारी बापूधाम रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड हेल्प लाइन और रेलवे पुलिस बल (GRP) की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 21 नाबालिग बच्चों को पकड़ा गया। इन बच्चों में चार से पांच नाबालिग लड़कियां भी शामिल बताई जा रही हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि ये सभी बच्चे भागलपुर जिले के रहने वाले हैं और आर्थिक रूप से कमजोर तथा आदिवासी परिवारों से संबंध रखते हैं। बच्चों को एक व्यक्ति द्वारा ट्रेन के माध्यम से ले जाया जा रहा था, जिसके बाद संदेह होने पर रेलवे पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की।
अशोक श्रीवास्तव पहुंचे रेलवे स्टेशन
घटना की सूचना मिलते ही विश्व हिन्दू परिषद के बिहार-झारखंड विधि प्रकोष्ठ प्रमुख अधिवक्ता अशोक श्रीवास्तव, विहिप जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह तथा बजरंग दल के नगर संयोजक राहुल सिंह रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां उन्होंने स्टेशन थाना अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की तथा पूरे मामले की जानकारी ली। हालांकि, बातचीत के बाद संगठन के नेता प्रशासनिक जवाबों से संतुष्ट नजर नहीं आए।
धर्मान्तरण की आशंका से इन्कार नहीं
Motihari Children Case : प्रेस से बातचीत करते हुए अधिवक्ता अशोक श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि इन बच्चों को मोतिहारी शहर के चांदमारी इलाके में स्थित एमपीएस स्कूल के पास एक छात्रावास में रखा गया था। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा देने और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर वहां ठहराया गया था, लेकिन वास्तविक उद्देश्य कुछ और था। उनके अनुसार बच्चों को दोबारा भागलपुर ले जाया जा रहा था और इस पूरे मामले में धर्मांतरण की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
शामिल हो सकता है बड़ा नेटवर्क
Motihari Children Case : अशोक श्रीवास्तव ने दावा किया कि बच्चों को ले जाने वाला व्यक्ति ईसाई समुदाय से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि जब यह मामला सामने आया और बच्चों को पकड़ा गया तो शहर के कई बड़े मिशनरी स्कूलों के निदेशकों और प्राचार्यों के फोन आने लगे। उनके अनुसार इससे यह संदेह और मजबूत हो गया कि मामला केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
गहराई से जांच आवश्यक
Motihari Children Case : विहिप नेताओं ने आरोप लगाया कि गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों को निशाना बनाकर उन्हें शिक्षा, भोजन और बेहतर जीवन का लालच दिया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे उन पर धार्मिक प्रभाव डाला जाता है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र हो सकता है, जिसकी गहराई से जांच आवश्यक है।
निष्पक्ष जांच जरूरी
विश्व हिन्दू परिषद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। संगठन का कहना है कि सामान्य जांच से सच्चाई सामने नहीं आएगी, इसलिए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच जरूरी है। विहिप नेताओं ने यह भी कहा कि जिले में संचालित सभी ईसाई मिशनरी स्कूलों और छात्रावासों की जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां रहने वाले बच्चों की स्थिति क्या है और उन्हें किस उद्देश्य से रखा गया है।
समाज पर पड़ सकता है गंभीर प्रभाव
Motihari Children Case : विहिप जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर किसी भी प्रकार की गतिविधि स्वीकार नहीं की जा सकती।
तो आंदोलन करेगा संगठन
बजरंग दल के नगर संयोजक राहुल सिंह ने भी प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि बजरंग दल जिले के उन सभी संस्थानों के खिलाफ प्रदर्शन करेगा, जहां इस प्रकार की गतिविधियों की आशंका होगी। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट रूप से यह बताने की मांग की कि बच्चों को कहां से लाया गया, कहां रखा गया और उन्हें किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
स्थानीय लोगों में चर्चा तेज
Motihari Children Case : इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। स्टेशन पर मौजूद लोगों का कहना था कि इतने बड़े संख्या में नाबालिग बच्चों का एक साथ यात्रा करना और उनके साथ कोई स्पष्ट अभिभावक नहीं होना अपने आप में संदेह पैदा करता है। कई सामाजिक संगठनों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा
Motihari Children Case : दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच जारी है। रेलवे पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम बच्चों से पूछताछ कर रही है तथा उनके परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
बच्चों के दस्तावेजों की जांच
Motihari Children Case : सूत्रों के अनुसार, बच्चों के दस्तावेजों और यात्रा से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि बच्चों को किस संस्था के माध्यम से लाया गया था और उनके रहने-खाने की व्यवस्था किसके द्वारा की जा रही थी। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं बच्चों को अवैध तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तो नहीं ले जाया जा रहा था।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों में अत्यंत सावधानी की आवश्यकता होती है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को बिना उचित अनुमति और दस्तावेजों के ले जाया जा रहा था तो यह गंभीर मामला है और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
संगठनों के लिए बड़ी चुनौती
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में बच्चों की तस्करी, अवैध छात्रावासों और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को लेकर लगातार बहस हो रही है। कई राज्यों में इस प्रकार के मामलों को लेकर जांच एजेंसियां पहले भी कार्रवाई कर चुकी हैं। ऐसे में मोतिहारी का यह मामला भी प्रशासन और सामाजिक संगठनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सख्त कार्रवाई हो
Motihari Children Case : स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर यदि किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि हो रही है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी होने से पहले किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाना उचित नहीं होगा। समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करनी चाहिए।
प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल, पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। दूसरी ओर प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि मामले की जांच कानून के दायरे में रहकर की जाए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान न किया जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन SIT गठन की मांग पर क्या फैसला लेता है और जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। यह मामला केवल 21 बच्चों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक, धार्मिक और कानूनी पहलुओं ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। पूरे घटनाक्रम पर जिले के लोगों की नजर बनी हुई है।







