मुंबई, 22 अप्रैल। APK Scam Arrest : साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच मुंबई पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ऑनलाइन ठगी और मोबाइल हैकिंग के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बिहार से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपित एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल फोन को हैक कर उनके बैंक खातों से पैसे उड़ाने का काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और बड़े स्तर पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।
लोगों की घबराहट का उठाया फायदा
APK Scam Arrest : पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले महीने गैस की कमी के दौरान इन आरोपितों ने लोगों की जरूरत और घबराहट का फायदा उठाया। उन्होंने गैस बुकिंग या संबंधित सेवाओं के नाम पर लोगों को एपीके फाइल भेजी, जिसे डाउनलोड करते ही मोबाइल फोन का पूरा नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता था। इसके अलावा, अलग-अलग बैंकों और कस्टमर केयर सेवाओं के नाम पर भी फर्जी एपीके फाइल तैयार कर लोगों को निशाना बनाया गया।
जांच में यह हुआ खुलासा
APK Scam Arrest : जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपित खुद एपीके फाइल बनाकर उसे विभिन्न कॉल सेंटरों को बेचते थे। इन कॉल सेंटरों के जरिए देशभर में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। यानी यह केवल एक छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा था, जो तकनीक का दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बना रहा था।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपितों से गहन पूछताछ जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस पूछताछ से कई अन्य साइबर अपराधों का भी खुलासा हो सकता है। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।
साइबर ठगी का यह तरीका बेहद खतरनाक
APK Scam Arrest : साइबर ठगी का यह तरीका बेहद खतरनाक और तेजी से फैल रहा है। एपीके फाइल के जरिए ठग मोबाइल में घुसपैठ कर लेते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को खोलता है, उसके फोन का एक्सेस सीधे ठगों के पास पहुंच जाता है। इसके बाद वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, ओटीपी, मैसेज और अन्य संवेदनशील जानकारियों का इस्तेमाल कर खाते से पैसे निकाल लेते हैं। कई बार पीड़ित को तब तक भनक भी नहीं लगती, जब तक उसके खाते से रकम गायब नहीं हो जाती।
ठगों ने जज को बनाया निशाना
इसी तरह का एक मामला हाल ही में सामने आया था, जिसमें साइबर अपराधियों ने एक जज को निशाना बनाते हुए 93,000 रुपये की ठगी कर ली थी। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च को जज के मोबाइल फोन में तकनीकी समस्या आई थी। समाधान के लिए उन्होंने इंटरनेट पर एक कस्टमर केयर नंबर खोजा, जो खुद को एक बड़ी मोबाइल कंपनी का आधिकारिक नंबर बता रहा था।
93000 रुपये का लगाया चूना
APK Scam Arrest : जब उन्होंने उस नंबर पर संपर्क किया, तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताया और भरोसा जीत लिया। समस्या के समाधान के नाम पर उसने व्हाट्सऐप के जरिए एक एपीके फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने को कहा। जैसे ही जज ने वह फाइल डाउनलोड की, ठगों को उनके मोबाइल और बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच मिल गई। इसके बाद उनके खाते से 93,000 रुपये ट्रांसफर कर लिए गए।
पुलिस को दर्ज कराई शिकायत
APK Scam Arrest : ठगी का एहसास होने पर जज ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद इस पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई। इसी कड़ी में मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिहार से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने दी यह सलाह
पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी बैंक या कंपनी का कस्टमर केयर नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही प्राप्त करें। साथ ही, मोबाइल में किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।
सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
APK Scam Arrest : कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है, यदि उसका गलत हाथों में इस्तेमाल हो। मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई से जहां एक बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है, वहीं आम जनता के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण सबक है कि वे ऑनलाइन दुनिया में हर कदम सोच-समझकर उठाएं।






