निवेदिता झा, नई दिल्ली। 12 October Panchang
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। भारतीय सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने, पूजा-पाठ करने, धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने, यात्रा पर निकलने, नए व्यवसाय का शुभारंभ करने, निवेश करने या विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की योजना बनाने से पहले पंचांग देखने की परंपरा रही है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ समय में कार्य आरंभ करने से सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। इस दिन शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है और मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से साधक को तप, त्याग, संयम, धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है। मां अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन विधि-विधान से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, 12 अक्टूबर को द्वितीया तिथि रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। सोमवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 26 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजे निर्धारित है। चंद्रमा का उदय सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर होगा और चंद्रास्त शाम 6 बजकर 56 मिनट पर होगा। सोमवार होने के कारण इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना भी शुभ माना जाता है।
दिनभर में कई ऐसे मुहूर्त और काल रहेंगे, जिनका धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व है। अभिजीत मुहूर्त, अमृतकाल, राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल की जानकारी लेकर श्रद्धालु अपने धार्मिक कार्यों और दैनिक गतिविधियों की योजना बना सकते हैं। आइए जानते हैं 12 अक्टूबर 2026 का विस्तृत पंचांग, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और अशुभ समय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां।
12 अक्टूबर 2026 का पंचांग : तिथि, वार और सूर्योदय-सूर्यास्त
- दिन: सोमवार
- तिथि: आश्विन शुक्ल द्वितीया, रात 10:13 बजे तक; इसके बाद तृतीया तिथि
- पर्व: शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन
- पूजनीय देवी: मां ब्रह्मचारिणी
- सूर्योदय: सुबह 6:26 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:00 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 7:43 बजे
- चंद्रास्त: शाम 6:56 बजे
- सूर्य की राशि: कन्या
- चंद्रमा की राशि: तुला
- सूर्य का नक्षत्र: चित्रा
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
- अमृतकाल: दोपहर 2:33 बजे से शाम 4:14 बजे तक
- राहुकाल: सुबह 7:53 बजे से 9:19 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 1:40 बजे से 3:06 बजे तक
- यमगंड काल: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
नोट: पंचांग में दिए गए समय स्थान, सूर्योदय और स्थानीय गणना के अनुसार बदल सकते हैं।

नवरात्रि का दूसरा दिन : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व
12 October Panchang : शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, साधना, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की देवी माना जाता है। उनके स्वरूप से साधक को धैर्य और आत्मविश्वास के साथ जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या और साधना के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है। उनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका स्वरूप सादगी, शांति और साधना का प्रतीक है।
नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उनकी पूजा करते हैं। इसके बाद पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर मां से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा मंत्रों का जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं।
मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मसंयम और कठिन परिश्रम करने की क्षमता विकसित होती है। विद्यार्थियों, साधकों और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए मां का स्वरूप विशेष प्रेरणादायक माना जाता है। मां की आराधना से मन को स्थिर रखने और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का संदेश मिलता है।
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होने के कारण इस दिन शिव पूजन का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु भगवान शिव का स्मरण करके परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की कामना कर सकते हैं।
चित्रा नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव, आत्मविश्वास और पराक्रम से जुड़ी हैं मान्यताएं
12 October Panchang : 12 अक्टूबर को सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में चित्रा नक्षत्र को रचनात्मकता, आकर्षण, निर्माण क्षमता, कौशल और व्यक्तित्व से जोड़कर देखा जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह माने जाते हैं। मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, उत्साह और कार्यक्षमता का कारक माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य और मंगल के बीच मित्रता का संबंध है। ऐसे में सूर्य के चित्रा नक्षत्र में रहने की स्थिति को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सक्रियता से जोड़कर देखा जाता है। इस अवधि में व्यक्ति अपने लक्ष्यों को लेकर अधिक गंभीर हो सकता है और योजनाओं को पूरा करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा प्राप्त कर सकता है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय अपने कार्यों की गुणवत्ता सुधारने, जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने और अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। जो कर्मचारी लंबे समय से किसी विशेष परियोजना पर काम कर रहे हैं, वे अपने प्रयासों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं।
प्रशासन, प्रबंधन, नेतृत्व और निर्णय लेने से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए भी सूर्य और मंगल के इस ज्योतिषीय संयोग को उत्साह एवं सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यक्ति को नई जिम्मेदारियां संभालने और अपने काम में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिल सकती है।
हालांकि, ज्योतिषीय प्रभावों को धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए। नौकरी में पदोन्नति, आर्थिक लाभ या किसी विशेष उपलब्धि की गारंटी केवल ग्रहों की स्थिति के आधार पर नहीं दी जा सकती। वास्तविक परिणाम व्यक्ति के प्रयास, योग्यता, परिस्थितियों और निर्णयों पर भी निर्भर करते हैं।

विष्कुम्भ योग रात 8:31 बजे तक, शुभ कार्यों में सावधानी बरतने की मान्यता
12 October Panchang : पंचांग के अनुसार, सोमवार को रात 8 बजकर 31 मिनट तक विष्कुम्भ योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में विष्कुम्भ योग को 27 नित्य योगों में पहला योग माना जाता है। नित्य योगों की गणना सूर्य और चंद्रमा की निरयन दीर्घांश स्थितियों के योग के आधार पर की जाती है। इस गणना में प्रत्येक योग का विस्तार 13 डिग्री 20 मिनट का होता है।
पारंपरिक ज्योतिष में विष्कुम्भ योग को सामान्यतः बाधाओं और सावधानी से जोड़कर देखा जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग के आरंभिक हिस्से में नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा और किसी नए कार्य के शुभारंभ से पहले मुहूर्त का विचार करने की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है।
विष्कुम्भ योग के संबंध में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इसकी शुरुआती पांच घटियों को विशेष सावधानी का समय माना जाता है। इस दौरान कोई नया महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से पहले पंचांग और स्थानीय मुहूर्त की गणना देखना उचित माना जाता है।
हालांकि, किसी योग को केवल अशुभ मानकर सभी गतिविधियां रोक देना आवश्यक नहीं है। शुभ-अशुभ समय का निर्धारण विभिन्न पंचांग परंपराओं और स्थानीय गणनाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी बड़े धार्मिक आयोजन या मांगलिक कार्य के लिए संपूर्ण पंचांग और संबंधित मुहूर्त का विचार किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा शुभ समय
12 October Panchang : 12 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार इसकी अवधि लगभग 46 मिनट होगी। हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों के लिए सकारात्मक परिणामों की कामना की जाती है।
अभिजीत मुहूर्त का निर्धारण दिन और रात्रि की अवधि के आधार पर किया जाता है। सामान्यतः दिनमान को आठ बराबर भागों में विभाजित करके मध्याह्न के आसपास का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। इसकी सटीक अवधि स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार बदल सकती है।
परंपरागत मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, धार्मिक संकल्प, महत्वपूर्ण बैठकों और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी हो सकता है। जो लोग किसी विशेष कार्य को शुभ समय में आरंभ करना चाहते हैं, वे इस मुहूर्त को ध्यान में रख सकते हैं।
हालांकि, विवाह, गृह प्रवेश या अन्य बड़े मांगलिक संस्कारों के लिए केवल अभिजीत मुहूर्त ही पर्याप्त नहीं माना जाता। ऐसे अवसरों पर तिथि, नक्षत्र, योग, करण और अन्य संबंधित ज्योतिषीय परिस्थितियों का भी विचार किया जाता है।
अमृतकाल दोपहर 2:33 से शाम 4:14 बजे तक
12 October Panchang : पंचांग के अनुसार, सोमवार को अमृतकाल दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से शाम 4 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपराओं में अमृतकाल को शुभ और अनुकूल समयावधि के रूप में देखा जाता है। इसे ऐसे समय के रूप में वर्णित किया जाता है, जिसमें किए गए कार्यों के लिए अच्छे परिणामों की कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमृतकाल के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ गतिविधियां करना अच्छा माना जाता है। कुछ लोग इस अवधि को नए काम की योजना बनाने, महत्वपूर्ण निर्णयों पर विचार करने और अपने कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए भी अनुकूल मानते हैं।
व्यापार से जुड़े लोग इस समय का उपयोग अपनी योजनाओं की समीक्षा करने, आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित करने और भविष्य की रणनीति तैयार करने में कर सकते हैं। इसी तरह, किसी महत्वपूर्ण यात्रा या कार्य की तैयारी करते समय भी शुभ मुहूर्त का ध्यान रखने की परंपरा है।
हालांकि, किसी निवेश या कारोबारी निर्णय को केवल शुभ मुहूर्त के आधार पर नहीं लेना चाहिए। वित्तीय जोखिम, उपलब्ध संसाधन, बाजार की स्थिति और आवश्यक जानकारी का मूल्यांकन करना भी जरूरी है।

राहुकाल सुबह 7:53 से 9:19 बजे तक, नए शुभ कार्यों से बचने की मान्यता
12 October Panchang : 12 अक्टूबर, सोमवार को राहुकाल सुबह 7 बजकर 53 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को ऐसा समय माना जाता है, जिसमें नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से परहेज करने की परंपरा है।
राहुकाल की गणना सामान्यतः स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच की अवधि को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है। सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राहुकाल का क्रम बदलता है। इस कारण सोमवार, मंगलवार, बुधवार और अन्य दिनों में राहुकाल की अवधि अलग-अलग समय पर पड़ती है। स्थान और दिन की लंबाई के अनुसार इसके सटीक समय में भी बदलाव हो सकता है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में विवाह संबंधी शुभ कार्यों, नए व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश और किसी महत्वपूर्ण मांगलिक आयोजन का शुभारंभ टालने की सलाह दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति नया कार्य शुरू करने के लिए विशेष मुहूर्त देख रहा है, तो वह राहुकाल के समय को ध्यान में रख सकता है।
हालांकि, राहुकाल के दौरान पहले से चल रहे कार्यों को रोकने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। दैनिक नौकरी, नियमित पूजा, अध्ययन, घर के सामान्य काम और पहले से शुरू की गई गतिविधियां जारी रखी जा सकती हैं। राहुकाल से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए।
गुलिक काल दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक
12 October Panchang : सोमवार को गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 40 मिनट से 3 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष की कुछ परंपराओं में गुलिक काल को विशेष महत्व दिया जाता है। गुलिक को शनि से संबंधित उपग्रह या उपग्रह-सदृश ज्योतिषीय बिंदु के रूप में वर्णित किया जाता है। इसके प्रभावों के संबंध में अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं।
कुछ परंपराओं में गुलिक काल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसी वजह से इस अवधि में कोई नया मांगलिक आयोजन आरंभ करने से पहले पंचांग देखने की सलाह दी जाती है।
दूसरी ओर, कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल के दौरान शुरू किए गए कुछ कार्यों को दोहराव, निरंतरता या दीर्घकालिक प्रभाव से भी जोड़ा जाता है। इसलिए इस समय को लेकर सभी परंपराओं में एक जैसी व्याख्या नहीं मिलती।
यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने कार्यों का समय निर्धारित करता है, तो वह गुलिक काल को ध्यान में रख सकता है। हालांकि, बैंक में धन जमा करने, दान देने या निवेश करने को हर परिस्थिति में शुभ या लाभकारी मान लेना उचित नहीं है। आर्थिक लेनदेन और निवेश से जुड़े निर्णय वास्तविक जरूरतों, जोखिम और वित्तीय जानकारी के आधार पर लेने चाहिए।
यमगंड काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:13 बजे तक
12 October Panchang : पंचांग के अनुसार, 12 अक्टूबर को यमगंड काल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में यमगंड काल को अशुभ समयावधियों में गिना जाता है। इसका संबंध मृत्यु के देवता यमराज से जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय में किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। विशेष रूप से नया कारोबार शुरू करने, मांगलिक कार्यक्रम आरंभ करने या महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत करने से पहले यमगंड काल का विचार किया जाता है।
कुछ परंपराओं में इस अवधि को स्वास्थ्य, दीर्घायु और सामान्य बाधाओं से संबंधित चिंताओं के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि, यमगंड काल में किसी व्यक्ति के साथ अनिवार्य रूप से कोई अनिष्ट होगा, ऐसा निष्कर्ष निकालने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
यमगंड काल के दौरान पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। किसी जरूरी काम, चिकित्सा संबंधी आवश्यकता या अपरिहार्य यात्रा को केवल इस समय के कारण टालना उचित नहीं है। आवश्यक परिस्थितियों में व्यावहारिक जरूरतों और सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहिए।
कन्या राशि में रहेंगे सूर्य देव, व्यावहारिक सोच पर जोर
12 October Panchang : 12 अक्टूबर 2026 को सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में कन्या राशि का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। इस राशि को विश्लेषण, बुद्धिमत्ता, व्यवस्था, अनुशासन, गणना और व्यावहारिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में रहने की अवधि में व्यवस्थित ढंग से काम करना, योजनाओं की समीक्षा करना और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना उपयोगी माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर व्यवस्था बनाने और लंबित कामों को पूरा करने की दिशा में प्रयास कर सकता है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए अपने काम की गुणवत्ता, समय प्रबंधन और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यापारियों के लिए हिसाब-किताब व्यवस्थित करना, जरूरी दस्तावेजों की समीक्षा करना और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना उपयोगी कदम हो सकते हैं।
विद्यार्थियों के लिए भी नियमित अध्ययन, विषयों को व्यवस्थित ढंग से समझना और समय का सही उपयोग करना लाभकारी आदतें हैं। हालांकि, इन सभी बातों को ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में समझना चाहिए। किसी व्यक्ति के करियर, शिक्षा या आर्थिक स्थिति का परिणाम केवल सूर्य की राशि से निर्धारित नहीं होता।
तुला राशि में रहेंगे चंद्रमा, संतुलन और संबंधों से जुड़ी हैं मान्यताएं
12 October Panchang : इस दिन चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। वैदिक ज्योतिष में तुला राशि का स्वामी शुक्र माना जाता है। तुला राशि को संतुलन, सौहार्द, सुंदरता, संबंधों, सहयोग और न्यायप्रियता से जोड़ा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का तुला राशि में होना व्यक्ति की भावनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार में संतुलन की प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। इस स्थिति को ऐसे स्वभाव से जोड़ा जाता है, जिसमें व्यक्ति आपसी संबंधों को महत्व देता है और विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश करता है।
तुला राशि से संबंधित पारंपरिक व्याख्याओं में मिलनसारिता, विनम्रता, कूटनीतिक व्यवहार और मधुर वाणी को प्रमुख गुणों के रूप में बताया जाता है। ऐसे लोग सामान्यतः अपने आसपास के वातावरण में सामंजस्य बनाए रखने और दूसरों की बात समझने को महत्व देने वाले माने जाते हैं।
चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का प्रतीक माना जाता है। इसी आधार पर चंद्रमा की तुला राशि में स्थिति को भावनात्मक संतुलन, सामाजिक मेलजोल और रिश्तों में सामंजस्य से जोड़ा जाता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव और व्यवहार का निर्धारण केवल उसकी राशि या ग्रहों की स्थिति से नहीं किया जा सकता। व्यक्ति के अनुभव, परिवेश, शिक्षा और व्यक्तिगत परिस्थितियां भी उसके व्यक्तित्व को प्रभावित करती हैं।
सोमवार को पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा से पहले रखें ध्यान
12 October Panchang : 12 अक्टूबर 2026, सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक पंचांग में दिशाशूल का अर्थ उस दिशा से है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा शुरू करने से बचने की मान्यता प्रचलित है।
सप्ताह के प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग दिशाशूल बताया जाता है। सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इस मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सोमवार को पूर्व दिशा की ओर यात्रा शुरू करने की योजना बना रहा है, तो वह यात्रा से पहले पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त का विचार कर सकता है।
दिशाशूल का संबंध मुख्य रूप से यात्रा के आरंभ से जोड़ा जाता है। कुछ परंपराओं में यात्रा से पहले विशेष धार्मिक उपाय करने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि, इन उपायों और दिशाशूल से संबंधित मान्यताओं में क्षेत्रीय तथा परंपरागत अंतर हो सकता है।
आज के समय में यात्रा की योजना बनाते हुए दूरी, मौसम, यातायात, वाहन की स्थिति और सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यदि किसी जरूरी काम के लिए यात्रा करना जरूरी है, तो केवल दिशाशूल के कारण उसे टालना व्यावहारिक नहीं हो सकता।
12 अक्टूबर को शुभ कार्यों की योजना कैसे बनाएं?
12 October Panchang : सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन होने के कारण धार्मिक दृष्टि से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार सुबह स्नान के बाद पूजा कर सकते हैं तथा दिनभर मां दुर्गा का स्मरण कर सकते हैं।
यदि आप इस दिन किसी शुभ कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं, तो पंचांग में बताए गए अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल पर ध्यान दे सकते हैं। वहीं, राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल को लेकर प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपनी योजना बना सकते हैं।
दिन के प्रमुख समय एक नजर में:
- सुबह 7:53 से 9:19 बजे तक: राहुकाल।
- सुबह 10:46 से दोपहर 12:13 बजे तक: यमगंड काल।
- सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक: अभिजीत मुहूर्त।
- दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक: गुलिक काल।
- दोपहर 2:33 से शाम 4:14 बजे तक: अमृतकाल।
- रात 8:31 बजे तक: विष्कुम्भ योग।
- रात 10:13 बजे तक: आश्विन शुक्ल द्वितीया तिथि।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ शुभ और अशुभ समय एक-दूसरे के साथ आंशिक रूप से मेल खाते हैं। उदाहरण के लिए, अभिजीत मुहूर्त का कुछ हिस्सा यमगंड काल के भीतर पड़ रहा है। इसलिए किसी महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार या मांगलिक कार्य के लिए केवल एक समय देखकर निर्णय लेने के बजाय संपूर्ण पंचांग, स्थानीय सूर्योदय और संबंधित परंपरा के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित होगा।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष संदेश
12 October Panchang : नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की साधना, संयम और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। मां की आराधना के माध्यम से भक्त अपने जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा ले सकते हैं। सोमवार को भगवान शिव की पूजा और मां दुर्गा की उपासना के साथ धार्मिक वातावरण में दिन बिताया जा सकता है।
पंचांग का उद्देश्य लोगों को तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त की जानकारी देना है, ताकि वे अपनी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार कार्यों की योजना बना सकें। शुभ-अशुभ समय से जुड़ी मान्यताओं का सम्मान करते हुए भी जरूरी कामों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, 12 अक्टूबर 2026 का दिन नवरात्रि की साधना, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, भगवान शिव के स्मरण और धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु अपनी आस्था, सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं तथा दिन के प्रमुख मुहूर्तों की जानकारी लेकर अपने कार्यक्रमों की योजना बना सकते हैं।
Author: Nivedita Jha
Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.







