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Saptadhara Roadmap : ‘सप्तधारा’ से विकसित भारत का रोडमैप, पीएम मोदी ने बताए सात क्षेत्र, रोजगार और विकास की नई संभावनाओं पर जोर

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Saptadhara Roadmap

नई दिल्ली, 15 अगस्त। Saptadhara Roadmap : 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य के विकास का व्यापक खाका सामने रखा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का उल्लेख करते हुए सात ऐसे प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिन्हें आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और रोजगार सृजन का आधार बताया गया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इन सात क्षेत्रों में तेजी से काम करने से भारत न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने वाला बाजार नहीं बनना है, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन करने वाला, नवाचार करने वाला और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला देश बनना है।

पीएम मोदी ने देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई से भी इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योगों में दुनिया के बाजारों तक पहुंच बनाने की क्षमता है। भारतीय वस्त्र, मशीनरी, दवाइयां और दूसरे उत्पाद वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए गुणवत्ता, लागत, डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विशेष ध्यान देना होगा।

शक्ति की सप्तधारा’ में छिपा विकास और रोजगार का मंत्र

Saptadhara Roadmap :  प्रधानमंत्री ने जिन सात क्षेत्रों को भारत के विकास की नई धारा के रूप में सामने रखा, उनमें विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, तकनीक एवं नवाचार, गति शक्ति और बुनियादी ढांचा, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं।

इन सातों क्षेत्रों को अलग-अलग देखने के बजाय प्रधानमंत्री ने इन्हें एक-दूसरे से जुड़ी हुई विकास श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया। उनका मानना है कि अगर भारत इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करता है तो इससे उद्योग, खेती, तकनीक, परिवहन, रक्षा, ऊर्जा, समुद्री अर्थव्यवस्था और रचनात्मक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

1 विनिर्माण : भारत को दुनिया की फैक्ट्री बनाने की दिशा

Saptadhara Roadmap :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग को ‘सप्तधारा’ की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल छोटे-छोटे पुर्जों के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे संपूर्ण उत्पादों के निर्माण में भी वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, भारतीय उद्योगों को लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर विशेष ध्यान देना होगा। अगर भारतीय कंपनियां इन तीनों क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी बनती हैं तो दुनिया के बड़े बाजारों में भारत की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।

मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार का असर केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कच्चे माल की आपूर्ति, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग, मशीनरी, डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, परिवहन और कुशल श्रम की मांग बढ़ेगी।

इससे युवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों तरह के रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इसी व्यापक रोजगार प्रभाव को देखते हुए विनिर्माण क्षेत्र को भारत की आर्थिक प्रगति की प्रमुख धारा के रूप में रेखांकित किया।

एमएसएमई को वैश्विक बाजार में उतरने का आह्वान

Saptadhara Roadmap : प्रधानमंत्री ने छोटे और मध्यम कारोबारों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण ताकत हैं और इन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।

भारतीय कपड़ा उद्योग, मशीनरी, दवा निर्माण और अनेक पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने की क्षमता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना जरूरी होगा।

प्रधानमंत्री ने इस दिशा में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आगे बढ़ाने की बात कही। उनका संदेश था कि स्थानीय उत्पादन को मजबूत करते हुए भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना होगा।

2. कृषि और खाद्य उत्पादन : खेत से वैश्विक बाजार तक

Saptadhara Roadmap :  ‘सप्तधारा’ की दूसरी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने कृषि और खाद्य उत्पादन को रखा। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि क्षमता को केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय उसे वैश्विक खाद्य बाजार से जोड़ने की आवश्यकता है।

भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पाद, मोटे अनाज यानी मिलेट्स, मसाले, फल और सब्जियां दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना सकते हैं। इसके लिए उत्पादन की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और निर्यात व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने से किसानों के साथ-साथ कई दूसरे क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है। फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, निर्यात और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इससे गांवों और छोटे शहरों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी। कृषि को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने से किसानों की आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

मिलेट्स और भारतीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक पहचान

Saptadhara Roadmap :  प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से भारत के पारंपरिक खाद्य उत्पादों और मोटे अनाजों की वैश्विक संभावनाओं की ओर ध्यान दिलाया। मिलेट्स को स्वास्थ्य और पोषण के लिहाज से दुनिया भर में बढ़ती मांग वाले खाद्य उत्पादों में गिना जा रहा है।

भारत के मसाले, फल, सब्जियां और पारंपरिक खाद्य उत्पाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी पहचान बना सकते हैं। इसके लिए आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन आवश्यक होगा।

इस पूरी प्रक्रिया से किसानों से लेकर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार तक रोजगार की एक बड़ी श्रृंखला तैयार हो सकती है।

3. तकनीक और नवाचार : भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार

Saptadhara Roadmap :  प्रधानमंत्री ने तकनीक और नवाचार को ‘सप्तधारा’ की तीसरी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत को नई और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका लक्ष्य है कि भारत इन क्षेत्रों में केवल तकनीक का उपभोक्ता न रहे, बल्कि नई तकनीक विकसित करने और दुनिया को उपलब्ध कराने वाला देश बने।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘मेड इन इंडिया 6जी’ तकनीक को दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य सामने रखा।

तकनीकी क्षेत्र के विस्तार से सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों के साथ-साथ हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर, रोबोटिक्स और एआई जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

एआई और रोबोटिक्स में भारत के लिए बड़े अवसर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स आने वाले वर्षों में दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली प्रमुख तकनीकों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री के रोडमैप में इन क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया।

भारत के पास बड़ी संख्या में तकनीकी विशेषज्ञ और युवा प्रतिभाएं हैं। यदि इस मानव संसाधन को अत्याधुनिक प्रशिक्षण, अनुसंधान और उद्यमिता के अवसर मिलते हैं तो भारत इन क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डेटा सेंटर के विस्तार से डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जबकि रोबोटिक्स और एआई का उपयोग उद्योग, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में किया जा सकता है।

4. गति शक्ति: मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से तेज होगी अर्थव्यवस्था

Saptadhara Roadmap :  प्रधानमंत्री ने ‘गति शक्ति’ को ‘सप्तधारा’ की चौथी शक्ति बताया। इसका संबंध देश के बुनियादी ढांचे, परिवहन और कनेक्टिविटी के विस्तार से है।

उन्होंने एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, आधुनिक बंदरगाहों और मल्टीमॉडल परिवहन व्यवस्था के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया।

बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर व्यापार और उद्योग पर पड़ता है। जब माल एक स्थान से दूसरे स्थान तक कम समय और कम लागत में पहुंचता है तो कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।

इसी कारण प्रधानमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर को रोजगार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। सड़क, रेल, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और इंजीनियरिंग परियोजनाओं के विस्तार से निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ तकनीकी और सेवा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकते हैं।

एक्सप्रेसवे से हाई-स्पीड रेल तक विकास की रफ्तार

Saptadhara Roadmap :  देश में आधुनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है। इसका संबंध आर्थिक गतिविधियों की गति से भी है।

एक्सप्रेसवे बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराते हैं, जबकि आधुनिक रेल नेटवर्क लंबी दूरी के परिवहन को अधिक तेज और प्रभावी बना सकते हैं। इसी तरह आधुनिक बंदरगाहों के विस्तार से भारत के निर्यात और आयात कारोबार को मजबूती मिल सकती है।

मल्टीमॉडल परिवहन व्यवस्था के माध्यम से सड़क, रेल, बंदरगाह और अन्य परिवहन माध्यमों को आपस में जोड़कर लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने का लक्ष्य है।

5. रक्षा शक्ति: आयातक से वैश्विक सप्लायर बनने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रक्षा शक्ति’ को पांचवीं धारा बताया। उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक बने रहने के बजाय वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का विशेष रूप से उल्लेख किया। आधुनिक युद्ध और सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र में अनुसंधान, निर्माण और निर्यात के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

रक्षा उत्पादन बढ़ने से केवल हथियार निर्माण उद्योग को फायदा नहीं होगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रोबोटिक्स, सेंसर, संचार तकनीक, अनुसंधान और उच्च तकनीक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भी गति मिल सकती है।

इससे देश में उच्च कौशल वाले रोजगार के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़ी बड़ी सप्लाई चेन में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर

ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल आज कृषि, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, लॉजिस्टिक्स और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में हो रहा है। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित किया।

भारत में इस क्षेत्र में स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं। डिजाइन, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर और एयरोस्पेस तकनीक में विशेषज्ञता विकसित करके देश वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकता है।

6. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी: पर्यावरण के साथ विकास

‘सप्तधारा’ की छठी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी का उल्लेख किया।

ग्रीन इकोनॉमी के तहत उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ईंधन जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया। दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ रही है और भारत इस बदलाव का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ईंधन से जुड़े उद्योगों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

वहीं ब्लू इकोनॉमी के अंतर्गत मत्स्य पालन, समुद्री प्रौद्योगिकी, तटीय पर्यटन और समुद्र से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को शामिल किया गया।

इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में हुई वृद्धि का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि 2009-10 में लगभग 1.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 25 लाख हो गई।

इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती मांग को उन्होंने भारत में हो रहे बदलाव का उदाहरण बताया। ईवी के बढ़ते बाजार से वाहन निर्माण के साथ-साथ बैटरी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर और सर्विस सेक्टर में भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

इस क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन इकोनॉमी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

7. सॉफ्ट पावर: संस्कृति से वैश्विक अर्थव्यवस्था तक

‘सप्तधारा’ की सातवीं और अंतिम शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने भारत की सॉफ्ट पावर को सामने रखा। इसमें योग, हस्तशिल्प, भारतीय सिनेमा, एनीमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

प्रधानमंत्री का कहना है कि दुनिया में रचनात्मक और डिजिटल उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत अपनी विशाल युवा आबादी और रचनात्मक प्रतिभा के बल पर इस बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक अवसर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा योग, भारतीय कला, हस्तशिल्प, संगीत, सिनेमा और सांस्कृतिक पर्यटन भी भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत कर सकते हैं।

इससे कंटेंट क्रिएटर्स, डिजाइनरों, डेवलपर्स, कलाकारों, फिल्म और गेमिंग उद्योग से जुड़े पेशेवरों तथा पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा हो सकते हैं।

Saptadhara Roadmap: PM Modi Unveils 7 Growth Sectors for Viksit Bharat
New Delhi: Prime Minister Narendra Modi during the 80th Independence Day celebrations at the Red Fort in New Delhi on Saturday, August 15, 2026. (Photo: Prem Nath Pandey)
एविएशन सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे अवसर

प्रधानमंत्री ने एविएशन सेक्टर में बढ़ती गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए तेजी से नए अवसर पैदा कर रहा है।

नए एयरपोर्ट, नए हवाई मार्ग और विमानन क्षेत्र का विस्तार केवल हवाई यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। इससे पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, ग्राउंड स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा, आतिथ्य और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बनते हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने ‘मेड इन इंडिया’ विमान बनाने के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। विमान निर्माण की क्षमता विकसित होने से देश के एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग उद्योग को नई दिशा मिल सकती है।

ड्रोन से गांवों तक पहुंच रही आधुनिक तकनीक

प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांवों में ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि करीब सवा तीन करोड़ परिवारों को स्वामित्व योजना का लाभ मिला है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस योजना के माध्यम से लगभग 140 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति अनलॉक हुई है।

संपत्ति के दस्तावेज और स्वामित्व की स्पष्टता होने से लोगों के लिए बैंकिंग और ऋण व्यवस्था तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे लोग अपनी संपत्ति को आर्थिक गतिविधियों और कारोबार के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने और लोगों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पांच से सात वर्षों में बड़े बदलाव का दावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में आज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना मजबूत हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले पांच से सात वर्षों में भारत ऐसी कई उपलब्धियां हासिल कर सकता है, जिन्हें हासिल करने में पहले कई दशक लग जाते थे।

उनका कहना था कि तकनीक, विनिर्माण, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों में एक साथ प्रगति होने से देश की आर्थिक क्षमता तेजी से बढ़ सकती है।

उन्होंने इन सात शक्तियों को भारत के विकास के सात मजबूत स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि इनके सहारे देश विकास, रोजगार, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए मानक स्थापित कर सकता है।

Saptadhara Roadmap: PM Modi Unveils 7 Growth Sectors for Viksit Bharat

रोजगार के नए केंद्र बन सकते हैं ये सात क्षेत्र

प्रधानमंत्री के ‘सप्तधारा’ रोडमैप की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका रोजगार से जुड़ा पहलू है। विनिर्माण क्षेत्र में फैक्ट्रियों और सप्लाई चेन से रोजगार बढ़ सकता है। कृषि और खाद्य उत्पादन से फूड प्रोसेसिंग तथा निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।

तकनीक और नवाचार से एआई, रोबोटिक्स, डेटा सेंटर और 6जी जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले अवसर पैदा हो सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से निर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां बन सकती हैं।

रक्षा क्षेत्र में उच्च तकनीक और एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी से स्वच्छ ऊर्जा, ईवी, समुद्री अर्थव्यवस्था और पर्यटन में अवसर पैदा हो सकते हैं। वहीं सॉफ्ट पावर से डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, एनीमेशन, पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों में युवाओं के लिए वैश्विक बाजार खुल सकते हैं।

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विकसित भारत के लक्ष्य की ओर सात धाराओं का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विचार भारत के विकास को कई अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ गति देने की रणनीति के रूप में सामने आया।

विनिर्माण से लेकर कृषि, तकनीक से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और सॉफ्ट पावर तक—इन सभी क्षेत्रों को भारत की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के साथ रोजगार और निवेश से जोड़ा गया।

प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि भारत को केवल उत्पादन करने वाला देश नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और तकनीक विकसित कर दुनिया को उपलब्ध कराने वाला देश बनना होगा।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को वैश्विक बाजार से जोड़ते हुए उन्होंने एमएसएमई, स्टार्टअप, किसानों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत को इस विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।

अगर इन सात क्षेत्रों में नीतिगत समर्थन, निवेश, कौशल विकास और तकनीकी क्षमता का विस्तार साथ-साथ होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं।

Saptadhara Roadmap: PM Modi Unveils 7 Growth Sectors for Viksit Bharat

इस प्रकार, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के जरिए विकसित भारत का एक ऐसा रोडमैप सामने रखा, जिसमें आर्थिक विकास के साथ रोजगार, तकनीकी आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रक्षा क्षमता, स्वच्छ ऊर्जा और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहुंच को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन सात क्षेत्रों की सामूहिक शक्ति भारत को आने वाले वर्षों में नई आर्थिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक मंच पर एक मजबूत, आत्मनिर्भर तथा विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Nivedita Jha
Author: Nivedita Jha

Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.

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