काठमांडू, 8 अगस्त। Ganja Cultivation : बिहार की सीमा से सटे नेपाल के गंडकी प्रांत में गांजा की खेती को लेकर एक बड़ा कानूनी बदलाव हुआ है। प्रांत ने दवाई और औद्योगिक उपयोग के लिए गांजा की नियंत्रित खेती को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गंडकी नेपाल का पहला ऐसा प्रांत बन गया है, जिसने इस फसल की खेती को नियमन के दायरे में लाने के लिए बाकायदा कानूनी व्यवस्था तैयार की है।
हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि नेपाल में गांजा का आम इस्तेमाल या खुले तौर पर इसकी बिक्री वैध हो गई है। नई व्यवस्था के तहत खेती और उत्पादन को कड़े सरकारी नियंत्रण, लाइसेंस और नियामकीय शर्तों के अधीन रखा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य गांजा से जुड़े औषधीय और औद्योगिक उत्पादों को बढ़ावा देना बताया गया है।
कानून पर लगी मुहर, अब नियमों का इंतजार
नेपाली मीडिया द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, गंडकी प्रांत के प्रमुख दिलीराज भट्ट ने दवा और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए गांजा की खेती, नियमन और इस्तेमाल से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है।
यह कानून एक संवैधानिक विवाद के बाद सामने आया है। दरअसल, इस बात पर सवाल उठे थे कि क्या प्रांतीय सरकार के पास इस तरह का कानून बनाने का अधिकार है। इस विवाद के समाधान के बाद कानून को मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हुआ।
अब कानून के प्रभावी होने के लिए इसे राज्य के आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाना बाकी है। इसके बाद भी तत्काल खेती के लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। लाइसेंस व्यवस्था शुरू करने से पहले विस्तृत नियम, नियमन और उन्हें लागू करने से जुड़ी गाइडलाइंस तैयार करनी होंगी।
यानी कानून बनने के बाद भी जमीन पर इसकी पूरी व्यवस्था लागू होने में कुछ समय लग सकता है।
रोजगार से कमाई तक, खेती को आर्थिक अवसर के रूप में देख रहा गंडकी
गंडकी सरकार की इस पहल के पीछे सिर्फ कृषि विस्तार नहीं, बल्कि आर्थिक संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। कानून का उद्देश्य उपयुक्त जमीन पर व्यावसायिक स्तर पर नियंत्रित गांजा की खेती की अनुमति देकर रोजगार के अवसर पैदा करना और आय के नए स्रोत विकसित करना है।
नेपाल के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में कृषि आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में सरकार औद्योगिक और औषधीय उपयोग वाली फसलों के जरिए किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नए बाजार से जोड़ना चाहती है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में सरकार का नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण होगा। उत्पादन, खेती, इस्तेमाल और उससे जुड़े उत्पादों पर निगरानी रखने के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। बिना अनुमति खेती या कानून का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।
नशे के लिए नहीं, दवा और उद्योग के लिए इस्तेमाल पर जोर
गंडकी का नया कानून सामान्य तौर पर गांजा को वैध बनाने के बजाय उसके सीमित और नियंत्रित उपयोग पर जोर देता है। कानून के तहत खेती का उद्देश्य मुख्य रूप से दो क्षेत्रों तक सीमित रखा गया है—औषधीय उपयोग और औद्योगिक इस्तेमाल।
इसका अर्थ है कि आम उपभोग या नशीले पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल के लिए गांजा की खेती को इस कानून के तहत खुली छूट नहीं दी गई है।
बल्कि सरकार एक ऐसा लाइसेंसिंग सिस्टम तैयार कर रही है, जिसमें यह तय होगा कि कौन खेती कर सकता है, किस उद्देश्य से उत्पादन किया जा सकता है और तैयार सामग्री का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जाएगा।
कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक सजा का प्रावधान भी रखा गया है। इससे साफ है कि सरकार इसे पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था के रूप में लागू करना चाहती है।
गांजा क्या है और कौन-से हिस्से किस काम आएंगे?
कानून में गांजा और उससे तैयार औद्योगिक या औषधीय उत्पादों के बीच भी स्पष्ट अंतर करने की कोशिश की गई है।
कानून के अनुसार, गांजा की परिभाषा में पौधे की पत्तियां, फूल, बीज और फल तथा प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला रेजिन और अर्क शामिल हैं। ये वे हिस्से हैं जिनका संबंध सामान्य तौर पर गांजा आधारित उत्पादों से जोड़ा जाता है।
दूसरी ओर, पौधे के अलग-अलग हिस्सों से तैयार या प्राप्त होने वाली सामग्री को उसके उपयोग के आधार पर अलग श्रेणी में रखा गया है। इनमें डंठल, फाइबर, छाल, जड़ें, बीज, पत्तियां और फूल जैसी सामग्री शामिल हो सकती है, यदि उनका इस्तेमाल औद्योगिक कच्चे माल या फार्मास्युटिकल सामग्री के तौर पर किया जाना हो।
यह वर्गीकरण कानून का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि इसके जरिए उन उत्पादों को अलग पहचान देने की कोशिश की गई है जिनका इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में किया जा सकता है और उन सामग्रियों को भी अलग रखा गया है जिनका उपयोग उद्योग या दवा निर्माण में किया जा सकता है।
फाइबर से तेल और कपड़े तक, उद्योग में कई संभावनाएं
औद्योगिक इस्तेमाल के तहत गांजा से प्राप्त सामग्री का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। कानून में फाइबर, बीज से जुड़े उत्पाद, तेल, वस्त्र और अन्य औद्योगिक कच्चे माल के निर्माण को औद्योगिक उपयोग की श्रेणी में रखा गया है।
इसका मतलब है कि प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। खेती से प्राप्त कच्चे माल को आगे प्रसंस्करण और विनिर्माण से जोड़कर औद्योगिक उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं भी इसमें शामिल हैं।
इससे स्थानीय स्तर पर खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण, उत्पादन और अन्य संबंधित गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद की जा रही है।
दवा के क्षेत्र में भी इस्तेमाल को मिली जगह
कानून में औषधीय इस्तेमाल की भी स्पष्ट परिभाषा दी गई है। इसके तहत ऐसी गांजा सामग्री को औषधीय उपयोग माना जाएगा, जिसे नेपाल के औषधि प्रशासन विभाग में पंजीकृत फार्मास्युटिकल निर्माताओं को उपलब्ध कराया जाए या लाइसेंस प्राप्त चिकित्सा पेशेवरों की सिफारिश पर तैयार किया जाए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य औषधीय इस्तेमाल को सामान्य बाजार से अलग रखना है, ताकि दवा के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री नियंत्रित चैनल के जरिए ही आगे बढ़े।
इस तरह खेती से लेकर दवा निर्माण तक पूरी प्रक्रिया को नियामकीय निगरानी में रखने की कोशिश की गई है।
गंडकी के फैसले से खुल सकता है नया औद्योगिक रास्ता
गंडकी प्रांत का यह कदम नेपाल में गांजा नीति को लेकर एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का पता तभी चलेगा जब कानून के तहत विस्तृत नियम तैयार होंगे, लाइसेंस जारी होंगे और खेती व उत्पादन की प्रक्रिया जमीन पर शुरू होगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गंडकी ने गांजा की खेती को बिना शर्त वैध नहीं किया है, बल्कि दवा और औद्योगिक उपयोग के लिए एक नियंत्रित कानूनी ढांचा तैयार किया है।
सरकार के सामने अब अगली चुनौती इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी। खेती के लिए लाइसेंस, उत्पादन की निगरानी, उत्पादों का वर्गीकरण, औद्योगिक इकाइयों तक आपूर्ति और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई—इन सभी पहलुओं को विस्तृत दिशा-निर्देशों के जरिए स्पष्ट करना होगा।
बिहार सीमा से लगे नेपाल के इस प्रांत का फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह कृषि, औषधि और उद्योग के बीच एक नए संभावित बाजार का रास्ता खोलता है। लेकिन इसके साथ ही सख्त नियमन की जरूरत भी बनी रहेगी, ताकि औद्योगिक और औषधीय उपयोग के नाम पर नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को बढ़ावा न मिले।







