कोलकाता, 22 अप्रैल। Bengal Election Phase1 : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और राज्य में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। गुरुवार को होने वाले इस अहम चरण में लगभग 3.6 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह मतदान राज्य के 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर स्थापित करीब 44,000 मतदान केंद्रों पर संपन्न होगा। चुनाव को लेकर जहां एक ओर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और चुनाव आयोग ने सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
दो चरणों में होंगे चुनाव
Bengal Election Phase1 : इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव केवल दो चरणों में कराए जा रहे हैं, जो कि पिछले चुनावों की तुलना में काफी कम हैं। वर्ष 2021 में यह चुनाव आठ चरणों में और 2016 में छह चरणों में आयोजित किए गए थे। हालांकि, चरणों की संख्या घटाई गई है, लेकिन सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उनके पालन को लेकर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प
Bengal Election Phase1 : पहले चरण के चुनाव में राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प और हाई-स्टेक माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, कम से कम 80 सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। इसके अलावा कई सीटों पर बहुकोणीय संघर्ष की स्थिति भी बन रही है, क्योंकि वामपंथी दलों का गठबंधन और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में हैं। कुछ क्षेत्रों में धार्मिक संगठनों की भागीदारी ने भी चुनावी समीकरणों को और जटिल बना दिया है।

इन जिलों में पहले चरण में मतदान
Bengal Election Phase1 : गुरुवार को जिन जिलों में मतदान होना है, उनमें दार्जिलिंग, कालीम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, पश्चिम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे कई सीटों पर मुकाबला कड़ा और रोमांचक होने की संभावना है।
सुरक्षा के अभूतपूर्व कदम
Bengal Election Phase1 : सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। राज्यभर में करीब 2,407 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें 2.4 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा 7,384 मतदान केंद्रों को ‘अति संवेदनशील’ या ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है, जहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) भी सक्रिय की गई हैं, जो तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगी।
वोटरों के लिए पर्याप्त सुविधा
मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए ब्रेल-सक्षम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), रैंप की व्यवस्था और प्राथमिकता कतार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आइडी भी जारी की गई हैं, ताकि मतदाता अपनी शिकायत सीधे चुनाव आयोग तक पहुंचा सकें।

एसआइआर से भी राजनीतिक माहौल गरमाया
Bengal Election Phase1 : इस चुनाव के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर भी राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के जरिए एक विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह कदम फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने के लिए उठाया गया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।

91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए
आंकड़ों के अनुसार, लगभग 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित मतदाताओं और डुप्लीकेट प्रविष्टियों के नाम शामिल हैं। हालांकि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसे नए मानदंड को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें नाम की स्पेलिंग, उम्र या अन्य विवरणों में अंतर के आधार पर नाम हटाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
सभी की नजरें पहले चरण में
कुल मिलाकर, कड़े सुरक्षा इंतजाम, राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा और मतदाता सूची को लेकर उठे विवादों के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जा रहा है। अब सभी की नजरें गुरुवार को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।








