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Hormuz Attacks : होर्मुज संकट: भारत ने दिखाई संयम और कूटनीति की ताकत

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Hormuz Attacks: India Raises Concern, Maintains Neutral Stand

Hormuz Attacks : रूस-चीन वीटो विवाद

वाशिंगटन, 17 अप्रैल। Hormuz Attacks : होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते हमलों को लेकर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है और साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा लगाए गए वीटो के मुद्दे पर संतुलित और तटस्थ रुख बनाए रखा है। भारत ने किसी भी गुट का खुलकर समर्थन नहीं किया, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया है।

सभी देशों को संयम बरतने की आवश्यकता

Hormuz Attacks : वॉशिंगटन में 17 अप्रैल को आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस विषय पर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी देशों को संयम बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने अपील की कि तनाव को बढ़ाने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान खोजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के सिद्धांत को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा की उस प्रक्रिया के तहत बुलाई गई थी, जिसके अनुसार सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य यदि किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, तो उन्हें दस दिनों के भीतर महासभा के समक्ष अपने निर्णय का स्पष्टीकरण देना होता है। इसी क्रम में 7 अप्रैल को रूस और चीन द्वारा बहरीन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर लगाए गए वीटो पर चर्चा की गई।

महासभा ने किया बचाव

Hormuz Attacks : बहरीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में ईरान से यह मांग की गई थी कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद करे और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता में किसी प्रकार की बाधा न डाले। हालांकि, रूस और चीन ने इस प्रस्ताव को एकतरफा बताते हुए वीटो कर दिया। बाद में दोनों देशों ने महासभा में अपने इस कदम का बचाव भी किया।

रूस और चीन के फैसले की आलोचना

Hormuz Attacks : दूसरी ओर, अमेरिका, इजरायल और कई खाड़ी देशों ने रूस और चीन के इस फैसले की आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बाधक बताया। भारत ने इस पूरे विवाद में संतुलित रुख अपनाते हुए किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया, लेकिन अपने बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

पी. हरीश ने अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली वक्तव्य में कहा कि भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, क्योंकि देश की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक सुरक्षा काफी हद तक इस मार्ग पर निर्भर करती है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों पर पड़ता है।

वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना गलत

Hormuz Attacks : उन्होंने इस बात पर भी गहरा दुख व्यक्त किया कि मौजूदा संघर्ष के दौरान वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया। इन हमलों में जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की जानें भी गईं, जो बेहद दुखद और चिंताजनक है।

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक क्रू सदस्यों की जान को खतरे में डालना या होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। भारत ने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पूर्ण सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

तब बढ़ गया था ज्यादा तनाव

Hormuz Attacks : घटनाक्रम के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान ने प्रतिक्रिया स्वरूप जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले शुरू किए। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

हालांकि, भारत ने वीटो के मुद्दे पर तटस्थता बनाए रखी, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा प्रस्तुत एक अन्य प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का निर्णय लिया था। इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा अपने मध्य-पूर्वी पड़ोसी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई थी।

यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 13-0 मतों से पारित हो गया था, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और इसे बिना वीटो के पारित होने दिया।

वीटो का किया बचाव

Hormuz Attacks : रूस की उप-स्थायी प्रतिनिधि एना एम. इवेस्टिग्नीवा ने वीटो का बचाव करते हुए कहा कि प्रस्तुत प्रस्ताव एकतरफा था और इसमें इजरायल तथा अमेरिका की उन कार्रवाइयों की अनदेखी की गई, जिनसे यह संघर्ष शुरू हुआ। उनके अनुसार, ऐसा प्रस्ताव संघर्ष को समाप्त करने के बजाय उसे और बढ़ावा दे सकता था।

चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने भी कहा कि उनका देश खाड़ी देशों की चिंताओं को समझता है, लेकिन प्रस्ताव में ऐसे तत्व थे जो बिना अनुमति के सैन्य अभियानों को वैध ठहराने का आभास देते थे, इसलिए चीन ने वीटो का समर्थन किया।

कुवैत के प्रतिनिधि ने वीटो की आलोचना की

Hormuz Attacks : वहीं खाड़ी देशों और जॉर्डन की ओर से बोलते हुए कुवैत के प्रतिनिधि तारिक एम. ए. एम. अल्बनई ने इस वीटो की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए स्पष्ट खतरे से जुड़ा था और इसे रोकना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खाड़ी देश व्यापक सहमति बनाने के लिए नए प्रस्ताव पर काम करेंगे।

अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने रूस और चीन पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर स्थिति को नजरअंदाज किया और ईरान की आक्रामक गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में बाधा डाली। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर उर्वरकों की आपूर्ति को बाधित कर दक्षिण एशिया में खाद्य संकट उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने संयमित और व्यावहारिक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के सैन्य तनाव के बजाय शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को प्राथमिकता देता है।

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