Motihari Tragedy : जहरीली शराब से हाहाकार, विपक्ष ने उठाए कठोर सवाल
पटना, 8 अप्रैल। Motihari Tragedy : बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी का मुद्दा केंद्र में आ गया है। मोतिहारी में हुई दर्दनाक जहरीली शराब त्रासदी के बाद जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने राज्य सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिहार में लागू शराबबंदी नीति को पूरी तरह असफल करार देते हुए इसके क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शराबबंदी सिर्फ कागज तक सीमित
Motihari Tragedy : तेज प्रताप यादव ने कहा कि लगभग एक दशक पहले बड़े जोर-शोर से लागू की गई शराबबंदी अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है और जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के हर जिले, हर शहर और यहां तक कि गांवों में भी शराब खुलेआम बिक रही है। उनके अनुसार, “शराब हर चौराहे, हर गली और हर मोहल्ले में आसानी से उपलब्ध है, लोग खुलेआम इसका सेवन कर रहे हैं तो फिर यह प्रतिबंध आखिर कहां लागू है?”
मोतिहारी कांड ने पूरे राज्य को झकझोरा
Motihari Tragedy : उनकी यह तीखी प्रतिक्रिया पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में हाल ही में हुई जहरीली शराब की घटना के बाद आई है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस त्रासदी में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस घटना में छह लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है, जिससे इस हादसे की भयावहता और भी स्पष्ट होती है।
फलफूल रहा अवैध शराब का कारोबार
Motihari Tragedy : तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि बिहार में अवैध शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है और प्रशासन इसे रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि नकली और जहरीली शराब का निर्माण गुप्त रूप से किया जा रहा है, जिसे मिट्टी के बर्तनों में भरकर जमीन के अंदर छिपाया जाता है। बाद में इसे निकालकर बेचा जाता है, लेकिन पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लग पाती। नतीजतन, आम लोग इस जहरीली शराब का सेवन कर अपनी जान गंवा रहे हैं।
शराबबंदी की विफलता साफ दिखाइ दे रही
Motihari Tragedy : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि शराबबंदी की विफलता अब साफ दिखाई दे रही है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यहां तक दावा कर दिया कि यह मुद्दा नीतीश कुमार के राजनीतिक फैसलों को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा, “शराबबंदी पूरी तरह फेल हो चुकी है, इसलिए अब इस्तीफे और दिल्ली जाने जैसी बातें सामने आ रही हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने पहले शराबबंदी का समर्थन किया था तो तेज प्रताप ने इसे पुरानी बात बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ हालात बदल चुके हैं और आज की सच्चाई यह है कि शराब हर जगह उपलब्ध है और कानून का डर खत्म हो चुका है।
शराबबंदी नीति को लेकर बहस तेज
Motihari Tragedy : इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में शराबबंदी नीति को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ सरकार इस नीति को सामाजिक सुधार के रूप में पेश करती रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कई सामाजिक समूह इसके क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। मोतिहारी जैसी घटनाएं इस बहस को और भी गंभीर बना रही हैं।
जानकारी के अनुसार, यह त्रासदी 1 अप्रैल की शाम को शुरू हुई, जब पूर्वी चंपारण के कुछ ग्रामीणों ने जहरीली शराब का सेवन किया। 2 अप्रैल से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। धीरे-धीरे मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया और अब यह घटना एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुकी है।
सवाल बना प्रासंगिक
मौजूदा हालात में यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है कि क्या बिहार की शराबबंदी नीति वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर पा रही है या फिर यह सिर्फ कागजी योजना बनकर रह गई है। मोतिहारी की यह त्रासदी न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि अवैध शराब के खिलाफ ठोस और प्रभावी कदम उठाने की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।







