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Acharya Prashant Patna : पटना में विचारों का महाकुंभ, आचार्य प्रशांत के दो सत्रों में उमड़ा जनसैलाब

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Acharya Prashant Patna Visit: Two Sessions, Thousands Inspired

पटना, 18 जनवरी। Acharya Prashant Patna : दार्शनिक आचार्य प्रशांत का पटना दौरा ज्ञान, संवाद और विचारों की गूंज से सराबोर रहा। 16 और 17 जनवरी को हुए लगातार दो सत्रों में हज़ारों श्रोताओं और छात्रों की भागीदारी ने इसे एक यादगार बौद्धिक आयोजन बना दिया।

Acharya Prashant Patna : बापू सभागार में ऐतिहासिक संवाद

16 जनवरी को गांधी मैदान के पास स्थित ऐतिहासिक बापू सभागार में आचार्य प्रशांत का पहला पटना संवाद आयोजित हुआ। यह सत्र तय समय से कहीं अधिक, करीब चार घंटे तक चला। कड़ाके की ठंड के बावजूद रात देर तक लगभग पांच हजार श्रोता पूरे मनोयोग से जमे रहे।

आधी रात तक चला पुस्तकों पर हस्ताक्षर

Acharya Prashant Patna : सत्र समाप्त होने के बाद आचार्य प्रशांत की पुस्तकों पर हस्ताक्षर के लिए किलोमीटर लंबी कतार लग गई, जो आधी रात के बाद तक जारी रही। श्रोताओं ने ‘ट्रूथ विदाउट अपोलॉजी’ सहित उनकी अन्य पुस्तकों पर हस्ताक्षर करवाए।

पहला सार्वजनिक कार्यक्रम, अभूतपूर्व स्वागत

यह आचार्य प्रशांत का पटना में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से भी लोग पहुंचे। पांच हजार की क्षमता वाला सभागार पूरी तरह भरा हुआ था। आयोजकों ने इसे हाल के वर्षों का सबसे अभूतपूर्व स्वागत बताया।

दार्शनिक से लेखक तक: आचार्य प्रशांत का परिचय

आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र आचार्य प्रशांत सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और 160 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं। वे प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। गीता, उपनिषद, बौद्ध और अन्य भारतीय-पश्चिमी ग्रंथों पर उनके शिक्षण कार्यक्रमों से डेढ़ लाख से अधिक प्रतिभागी जुड़े हैं।

वेदांत और स्त्री स्वतंत्रता पर बेबाक विचार

Acharya Prashant Patna : अपने संबोधन में आचार्य प्रशांत ने वेदांत और स्त्री के संबंध पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जो दर्शन देहभाव से मुक्त करता है, वही स्त्री को वास्तविक स्वतंत्रता देता है। उनके अनुसार स्त्रियों की दुर्दशा का मूल कारण अशिक्षा और धार्मिक अंधविश्वास है, न कि धर्म स्वयं।

पूर्वांचल से आत्मीय जुड़ाव, युवाओं को संदेश

Acharya Prashant Patna : उन्होंने पूर्वांचल से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए स्वयं को उतना ही बिहार का, जितना उत्तर प्रदेश का बताया। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल सरकारी नौकरी की दौड़ तक सीमित न रहें और आत्मनिर्भर बनने का साहस करें। दूसरों पर निर्भरता को उन्होंने मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी बताया।

संविधान और वेदांत में समान मूल्य

Acharya Prashant Patna : मीडिया से बातचीत में आचार्य प्रशांत ने भारतीय संविधान पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संविधान के मूल मूल्य—स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय—वेदांत की शिक्षाओं से मेल खाते हैं। जरूरत इन्हें बाहर से लाने की नहीं, बल्कि समझकर जीवन में उतारने की है।

आईआईटी पटना में दूसरा सत्र, छात्रों से सीधा संवाद

Acharya Prashant Patna :  17 जनवरी को आचार्य प्रशांत आईआईटी पटना पहुंचे, जहां यह उनका हाल के महीनों में आठवां आईआईटी संबोधन था। सत्र की शुरुआत कठोपनिषद के श्लोक से हुई। उन्होंने कहा कि शास्त्रों की गलत व्याख्या ने समाज को भ्रमित किया है और गीता पूजा की नहीं, जीवन जीने की व्यावहारिक विद्या है।

जलवायु परिवर्तन से आत्मनियंत्रण तक सवाल-जवाब

प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने जलवायु परिवर्तन, उपभोग की प्रवृत्ति, शारीरिक आकर्षण और आत्मनियंत्रण जैसे विषयों पर सवाल पूछे। आचार्य प्रशांत ने सभी प्रश्नों के उत्तर सीधे और स्पष्ट शब्दों में दिए।

दो दिन, दो मंच, एक गहरी छाप

Acharya Prashant Patna : बापू सभागार के आम श्रोता हों या आईआईटी पटना के तकनीकी छात्र—दो अलग-अलग दर्शक वर्गों के बीच हुए इन कार्यक्रमों ने यह दिखाया कि आचार्य प्रशांत की बातों की पहुंच और प्रभाव व्यापक है।

अगला पड़ाव: आईआईटी दिल्ली

आचार्य प्रशांत अब 18 जनवरी को आईआईटी दिल्ली में छात्रों को संबोधित करेंगे, जबकि अगले एक महीने में पांच अन्य आईआईटी परिसरों में भी उनके सत्र प्रस्तावित हैं।

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