अमरावती, 15 जनवरी। Cockfight Betting Win : मकर संक्रांति के मौके पर आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में आयोजित मुर्गा लड़ाई ने इस बार चौंकाने वाला रिकॉर्ड बना दिया। ताडेपल्लीगुडेम कस्बे में हुई इस परंपरागत लेकिन विवादित लड़ाई में राजमुंद्री निवासी रमेश नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर 1.53 करोड़ रुपये की भारी रकम जीत ली।
Cockfight Betting Win : एक लड़ाई, करोड़ों की बाजी
बताया जा रहा है कि रमेश और गुडीवाडा प्रभाकर ने अपने-अपने प्रशिक्षित मुर्गों पर भारी दांव लगाया था। दोनों मुर्गों के पैरों में धारदार चाकू बंधे थे। रोमांचक मुकाबले में रमेश का मुर्गा विजयी रहा और उसी के साथ यह दांव संक्रांति सीजन का अब तक का सबसे बड़ा दांव बन गया।
जश्न में डूबा ताडेपल्लीगुडेम
स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारित वीडियो में रमेश और उसके समर्थक जीत का जश्न मनाते नजर आए। करोड़ों की जीत से उत्साहित रमेश ने बताया कि उसने अपने खास नस्ल के मुर्गे को छह महीने तक सूखे मेवे खिलाकर तैयार किया था, ताकि वह ताकतवर और फुर्तीला बन सके।
पाबंदियों के बावजूद जारी रहा खेल
Cockfight Betting Win : गौरतलब है कि गुरुवार को लगातार दूसरे दिन आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर मुर्गा लड़ाई आयोजित की गई। अदालती रोक और प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद करोड़ों रुपये का लेन-देन होता रहा। कई लोग मुर्गा लड़ाई को संक्रांति उत्सव का अहम हिस्सा मानते हैं।
राजनीतिक संरक्षण में लगे अखाड़े
Cockfight Betting Win : सूत्रों के अनुसार, राजनेताओं के समर्थन से आयोजकों ने पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा, एलुरु, पोलावरम और कृष्णा जिलों में विशेष अखाड़े तैयार किए। पुलिस और जिला प्रशासन की चेतावनियों का भी कोई खास असर नहीं दिखा।
कानून के खिलाफ परंपरा का टकराव
Cockfight Betting Win : आयोजकों ने शुक्रवार को तीसरे दिन भी मुर्गा लड़ाई जारी रखने की तैयारी कर ली है। इन लड़ाइयों में प्रशिक्षित मुर्गों के पैरों में छोटी-छोटी चाकू बांधी जाती हैं और कई बार एक मुर्गे की मौत भी हो जाती है।
हालांकि, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और आंध्र प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुर्गा लड़ाई और उससे जुड़ा जुआ पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन परंपरा और मुनाफे के आगे कानून बेबस नजर आ रहा है।







