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Khaleda Zia Legacy : खालिदा जिया: भारत में जन्म, पाकिस्तान में बचपन और तीसरे देश बांग्लादेश में गढ़ी राजनीतिक पहचान

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Khaleda Zia Legacy: From India Birth to Bangladesh Politics and Global Influence

नई दिल्ली, 30 दिसंबर । Khaleda Zia Legacy  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के साथ बांग्लादेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और विवादों से भरा अध्याय समाप्त हो गया। मंगलवार सुबह 80 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह न केवल देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि दो बार सत्ता संभालकर दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करती रहीं।

Khaleda Zia Legacy  भारत में जन्म, पाकिस्तान में बचपन और बदलती सीमाओं के बीच जीवन

खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को भारत के पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद यह इलाका सीमा परिवर्तन और प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा बना और कुछ समय के लिए पूर्वी पाकिस्तान के क्षेत्रों से जुड़ गया, जिसे बाद में भारत में समायोजित कर लिया गया।

पूर्वी पाकिस्तान में बढ़ते भाषाई और राजनीतिक भेदभाव ने अंततः 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरने का मार्ग प्रशस्त किया।

राजनीति में प्रवेश और सत्ता की सीढ़ियाँ

Khaleda Zia Legacy  1980 के दशक में अपने पति और तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद, खालिदा जिया ने राजनीति में प्रवेश किया। राजनीति उनके लिए नई थी, लेकिन बीएनपी की कमान संभालते ही वह तेजी से बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गईं।

1991 में वह पहली बार प्रधानमंत्री बनीं और इस तरह वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज हुईं।

उन्होंने 2001 से 2006 तक दूसरा कार्यकाल भी पूरा किया। उनके शासन में आर्थिक सुधार, निजीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया, लेकिन साथ ही उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और कट्टरपंथी संगठनों को संरक्षण देने जैसे आरोप भी लगे।

भारत के प्रति जटिल और टकरावपूर्ण रुख

Khaleda Zia Legacy  खालिदा जिया के भारत के साथ संबंध हमेशा विवादों में रहे। उनके कई बयानों और नीतियों को भारत-विरोधी माना गया।

  • 1972 की भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि को उन्होंने “गुलामी की संधि” कहा।
  • 1996 की गंगा जल संधि को “गुलामी का सौदा” बताया।
  • चटगांव हिल ट्रैक्ट्स शांति समझौते का भी उन्होंने विरोध किया।

2001 में भारत-बांग्लादेश सीमा पर झड़पों में 16 भारतीय जवानों की शहादत से दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए। उनके शासनकाल में तीस्ता जल विवाद, सीमाई सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दे अक्सर टकराव का कारण बने।

पाकिस्तान और चीन के साथ निकटता

Khaleda Zia Legacy  भारत की तुलना में खालिदा जिया ने पाकिस्तान और चीन से नजदीकी बढ़ाने पर जोर दिया।
उनके शासनकाल में आईएसआई की सक्रियता बढ़ने और पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी संगठनों को पनाह मिलने के आरोप भी लगते रहे।

हसीना बनाम खालिदा — बांग्लादेश की सबसे कड़वी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

Khaleda Zia Legacy  खालिदा जिया और शेख हसीना की प्रतिद्वंद्विता दक्षिण एशिया की राजनीति में सबसे कटु मानी जाती है।
उनकी सरकार के पतन के बाद खालिदा जिया पर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हुए और 2018 में उन्हें जेल भेज दिया गया, जहां उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई।

हाल के वर्षों में बीएनपी बार-बार उन्हें इलाज के लिए विदेश भेजने की मांग करती रही, लेकिन यह अनुमति नहीं दी गई।

निधन से पहले आखिरी राजनीतिक सक्रियता

Khaleda Zia Legacy  दिलचस्प बात यह है कि निधन से कुछ दिन पहले ही खालिदा जिया की ओर से बोगुरा-7 सीट से आगामी फरवरी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया गया था।
अब उनका निधन बांग्लादेश की चुनावी राजनीति और सत्ता संतुलन पर कितना प्रभाव डालेगा, यह आने वाला समय बताएगा।

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