नई दिल्ली, 10 दिसंबर। Amit Shah Statement : लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्सर यह कहता है कि भाजपा को कभी सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन वास्तविकता यह है कि सत्ता विरोधी लहर उन्हीं को झेलनी पड़ती है, जो जनहित के खिलाफ काम करते हैं।
“भाजपा हारती भी है, लेकिन मतदाता सूची पर सवाल नहीं उठाती”
अमित शाह ने कहा कि यह सही है कि भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का कम सामना करना पड़ता है, क्योंकि जनता बार-बार भाजपा की सरकारों पर भरोसा जताती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भाजपा कभी चुनाव नहीं हारी।
उन्होंने उदाहरण दिए
- छत्तीसगढ़ 2018 में हारे,
- राजस्थान 2018 में हारे,
- मध्य प्रदेश 2018 में हारे,
- कर्नाटक 2014 के बाद हारे,
- तेलंगाना और बंगाल भी नहीं जीते।
Amit Shah Statement :शाह ने विपक्ष पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि जब वे जीतते हैं, तो “नए कपड़े पहनकर शपथ भी ले लेते हैं”, उस समय उन्हें मतदाता सूची में कोई समस्या नहीं दिखती। लेकिन जब बिहार की तरह हार मिलती है, तब अचानक मतदाता सूची “गलत” लगने लगती है।
उन्होंने कहा— लोकतंत्र में दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे। सरदार पटेल को 28 वोट, नेहरू को 2 – फिर भी बने प्रधानमंत्री।
ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए अमित शाह ने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद प्रधानमंत्री का चयन राज्य के प्रमुखों के वोटों से होना था।
सरदार वल्लभभाई पटेल को 28 वोट मिले। जवाहरलाल नेहरू को केवल 2 वोट। फिर भी नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया। शाह ने इसे “चुनावी धांधली” और “वोट चोरी” का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
सोनिया गांधी को लेकर भी उठाए सवाल
अमित शाह ने कहा कि दिल्ली की एक अदालत में मामला दायर हुआ है जिसमें दावा किया गया कि सोनिया गांधी को नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले “वोट चोरी” की गंभीरता को दर्शाते हैं।
इंदिरा गांधी का चुनाव रद हुआ, फिर कानून लाकर ढका घोटाला
उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी रायबरेली से जीती थीं, लेकिन राज नारायण ने उनके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका डाली।
हाईकोर्ट ने फैसला दिया— चुनाव नियमों का उल्लंघन हुआ। इसलिए इंदिरा गांधी का चुनाव रद किया गया।
इसके बाद, शाह के अनुसार, संसद में ऐसा कानून लाया गया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई केस ही नहीं किया जा सके—ताकि इस “वोट चोरी” को ढका जा सके। हमने जीवन का आधा हिस्सा विपक्ष में बिताया, लेकिन कभी आयोग पर सवाल नहीं उठाए।
अमित शाह ने साफ कहा कि भाजपा ने जितने चुनाव जीते हैं, उससे ज्यादा हारे भी हैं, लेकिन कभी चुनाव आयोग या ईवीएम पर आरोप नहीं लगाया।
उन्होंने कहा— चुनाव में आपकी हार का कारण आपका नेतृत्व है, ईवीएम या मतदाता सूची नहीं।
ईवीएम पर बड़ा हमला और शाह का जवाब
Amit Shah Statement : अमित शाह ने याद दिलाया कि ईवीएम राजीव गांधी सरकार में 1989 में लाई गई। 1998 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली की 16 सीटों पर ट्रायल हुआ। 2004 में पहली बार व्यापक रूप से उपयोग हुआ। कांग्रेस ने उसी ईवीएम से चुनाव जीतकर सरकार बनाई।
उन्होंने कहा— “जब आप जीतते हैं तो ईवीएम पर कोई चर्चा नहीं होती, लेकिन हारते ही ईवीएम गलत हो जाती है।”
पहले चुनावों में पर्चों के पूरे बक्से गायब हो जाते थे। अमित शाह ने पुराने चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि ईवीएम आने से पहले— बिहार और यूपी में मतपत्रों के पूरे बक्से गायब कर दिए जाते थे। मतदान केंद्रों पर कब्जा कर लिया जाता था।
उन्होंने कहा— “ईवीएम ने चुनाव की चोरी खत्म कर दी है, इसलिए आज दर्द हो रहा है।”
शाह ने कहा— “2014 में
अंत में विपक्ष पर बड़ा हमला
नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब से इनको आपत्ति है। हमने 2014 से 2025 तक 44 चुनाव जीते हैं, उन्होंने 30। अगर मतदाता सूची भ्रष्ट थी तो शपथ क्यों ली?”







