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Navagraha Temple : नौ ग्रहों को संतुलित करने वाला अद्भुत तीर्थ, जहां नवजातों की कुंडली बनवाने आते हैं श्रद्धालु

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Navagraha Temple: A Unique Pilgrimage Center Balancing the Nine Planets

नई दिल्ली, 9 नवंबर। Navagraha Temple : हिंदू ज्योतिष में नवग्रहों की स्थिति को जीवन के हर पहलू से जोड़ा जाता है — चाहे वह करियर हो, विवाह, स्वास्थ्य या सौभाग्य। कहा जाता है कि ग्रहों की अनुकूल स्थिति व्यक्ति के जीवन को संवार देती है, जबकि ग्रहदोष कई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। इन ग्रहों को शांत करने के लिए जहां लोग रत्न धारण करते हैं या विशेष पूजन कराते हैं, वहीं असम के गुवाहाटी में स्थित नवग्रह मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहां एक साथ नौ ग्रहों की पूजा की जाती है और माना जाता है कि यहां की पूजा से जीवन में संतुलन और शांति आती है।

नौ ग्रहों के अधिपति भगवान शिव

Navagraha Temple : गुवाहाटी की चित्रसाल पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर हिंदू आस्था का एक अनूठा केंद्र है। इस मंदिर में नौ शिवलिंग स्थापित हैं, जो सौरमंडल के नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — का प्रतीक हैं। इन सभी ग्रहों के अधिपति भगवान शिव माने जाते हैं। श्रद्धालु ग्रहों की शांति और संतुलन के लिए अलग-अलग रंग के वस्त्र शिवलिंगों पर अर्पित करते हैं।

मंदिर में वस्त्र अर्पण की परंपरा बेहद रोचक है —
  • सूर्य के लिए लाल या नारंगी वस्त्र
  • चंद्रमा के लिए सफेद वस्त्र
  • मंगल के लिए लाल वस्त्र
  • बुध के लिए हरा वस्त्र
  • बृहस्पति (गुरु) के लिए पीला वस्त्र
  • शुक्र के लिए सफेद या गुलाबी वस्त्र
  • शनि के लिए काला वस्त्र
  • राहु के लिए नीला या काला वस्त्र
  • केतु के लिए स्लेटी या मटमैला वस्त्र

माना जाता है कि इस विधि से की गई पूजा से ग्रहों की स्थिति में सुधार होता है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

18वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर

Navagraha Temple : इतिहासकारों के अनुसार, नवग्रह मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में अहोम राजाओं के शासनकाल में हुआ था। शिलालेखों और अभिलेखों से पता चलता है कि इसका निर्माण राजा सुखरुंगफा के पुत्र, अहोम राजा राजेश्वर सिंह ने करवाया था। समय के साथ एक प्राकृतिक आपदा में मंदिर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इसे पुनर्निर्मित किया गया।

आज यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां हर अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण के समय विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

नवजात बच्चों की कुंडली के लिए प्रसिद्ध

Navagraha Temple : मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां नवजात बच्चों की जन्म कुंडली बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। स्थानीय मान्यता है कि यहां के ज्योतिषी ग्रह-नक्षत्रों की सटीक गणना करने में निपुण हैं। अगर किसी बच्चे की कुंडली में कोई दोष पाया जाता है या ग्रहों में असंतुलन होता है तो विशेष पूजा और मंत्रोच्चारण के माध्यम से उसे दूर किया जाता है।

भक्तों का विश्वास है कि यहां की पूजा से बच्चे के भविष्य पर ग्रहों का प्रभाव सकारात्मक हो जाता है और जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।

जादुई तालाब ‘सिलपुखुरी’

Navagraha Temple : मंदिर से कुछ दूरी पर सिलपुखुरी नाम का एक तालाब स्थित है, जो अपनी अनोखी विशेषता के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। कहा जाता है कि इस तालाब में कभी जल की कमी नहीं होती — चाहे बारिश हो या सूखा। स्थानीय लोग इसे “जादुई तालाब” कहते हैं, क्योंकि इसमें सालभर एक समान जलस्तर बना रहता है।

श्रद्धा और खगोल विज्ञान का संगम

Navagraha Temple : नवग्रह मंदिर को भक्ति, ज्योतिष और विज्ञान का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां आने वाले लोग केवल पूजा ही नहीं, बल्कि ग्रहों और उनके प्रभावों के वैज्ञानिक पहलुओं को भी समझने की कोशिश करते हैं।

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां नवग्रहों की पूजा करता है, उसके जीवन से ग्रहदोष दूर होते हैं और सौभाग्य की राह खुलती है।

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