कोलकाता, 4 दिसंबर। West Bengal Voters : पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) जारी है। इस प्रक्रिया में डिजिटलीकरण के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 50 लाख नाम ऐसे पाए गए हैं, जो वास्तव में पश्चिम बंगाल में रहते ही नहीं हैं।
डिजिटलीकरण में खुलासा
West Bengal Voters : मंगलवार शाम तक हुई डिजिटलीकरण रिपोर्ट में यह आंकड़ा 46 लाख से ऊपर था, जो बुधवार रात तक बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है और आने वाले समय में यह और भी बढ़ सकता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची से बाहर किए जाने वाले नामों की प्रारंभिक सूची में लगभग 4 लाख नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें 24 घंटे के भीतर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
नामों की श्रेणियां
West Bengal Voters : 50 लाख नामों में शामिल व्यक्तियों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- मृत मतदाता: 23 लाख से अधिक नाम
- स्थानांतरित मतदाता: 18 लाख से अधिक नाम
- गायब मतदाता: 7 लाख से अधिक नाम
- डुप्लीकेट या अन्य कारणों से हटाए जाने वाले नाम
इस प्रक्रिया के बाद ही फाइनल सूची तैयार होगी और मतदाता पंजीकरण में सुधार होगा।
फाइनल ड्राफ्ट और नोटिस प्रक्रिया
West Bengal Voters : मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों की फाइनल सूची 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद तय होगी। इसके बाद नोटिस फेज शुरू होगा, जिसमें चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा गणना प्रपत्र पर नोटिस जारी करना, सुनवाई करना, प्रमाणित करना और दावों एवं आपत्तियों का निपटान शामिल होगा।
यह नोटिस और आपत्तियों का निपटान 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक चलेगा।
अंतिम अनुमोदन और प्रकाशन
West Bengal Voters : निर्वाचक नामावली के विभिन्न पैरामीटर की जांच और अंतिम पब्लिकेशन के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की अनुमति 10 फरवरी 2026 को दी जाएगी। इसके बाद निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2025 तक की मतदाता सूची के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 है।
विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका
इस बड़े खुलासे से साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सही और वास्तविक पंजीकरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। डिजिटल तकनीक और गहन पुनरीक्षण ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।







