ओम वर्मा, मोतिहारी। Rahul magic : भले ही बिहार में एनडीए और उसके घटक दल, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा पर चुटकी ले रहे हों लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राहुल गांधी की यात्रा में लाखों की भीड़ एकत्रित हो रही है। अपने नेता की एक झलक पाने को लोग बेताब हैं। राहुल—तेजस्वी भी प्रोटोकाल की परवाह न करते हुए खुलेआम बिहार में यात्रा कर रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं।
अगर यह भीड़ वोटों में तबदील हो गई तो बिहार की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। इस बार बिहार में ऐसे कई मुद्दे हैं जिनसे सीधे—सीधे जनता प्रभावित हो रही है। गुरुवार को मोतिहारी में राहुल गांधी की यात्रा का नजारा ही कुछ और था। जैसे ही राहुल गांधी मोतिहारी के छतौनी चौक पर पहुंचे, कई—कई किलोमीटर दूर तक लोगों का हुजूम नजर आया। राहुल गांधी में लोगों को उनके पिता स्वर्गीय राजीव गांधी का अक्स नजर आया।

भ्रष्टाचार से बिहार दुखी
Rahul magic : बिहार में भ्रष्टाचार का मुद्दा हावी है। जनता भी दुखी है। थाना हो या कोई प्रखंड का कार्यालय, बिना रिश्वत दिए बात नहीं बनती है। अब तो रिश्वत की राशि भी कर्मचारी ही तय करता है। मनमाफिक राशि नहीं मिली तो काम कब होगा, इसकी गारंटी नहीं है। इसकी सुनवाई नहीं है। दूसरी ओर पूरा बिहार अपराध की चपेट में है और जनता डरी हुई है। अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में प्रतिदिन औसतन 15 हत्याएं हो रही हैं। चोरी, छिनैती, मारपीट,रंगदारी, झूठा केस आदि के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। सारे कानून आम जनता पर ही लादे जा रहे हैं, जबकि अपराधी बेखौफ हैं।
वर्तमान जनप्रतिनिधि समस्याओं का समाधान तो दूर, कई बार मिलने से भी कतराते हैं। यही वजह है कि वर्तमान सरकार के खिलाफ जनता गुस्से में है। यही हाल थानों का भी है। थानों से जनता का सीधा वास्ता पड़ता है। कई पुलिस वाले जनता की समस्याओं का समाधान करने के एवज में रिश्वत की डिमांड करते हैं। यही वजह है कि जनता त्रस्त हो चुकी है। सुनने वाला कोई नहीं है।

पलायन का मुद्दा
Rahul magic : यह सही है कि अगर बिहार का युवा अन्य प्रदेशों में मजदूरी करने नहीं जाए तो वहां की स्थिति बिगड़ सकती है। उन राज्यों का काम नहीं चलेगा। सस्ते मजदूर बिहार से ही मिलते हैं। 10—12 हजार की नौकरी पाने के लिए बिहार के युवा अन्य प्रदेशों में चले जाते हैं क्योंकि उनके राज्य में काम नहीं है। उनके पास इतनी पूंजी भी नहीं है कि वह अपना रोजगार शुरू कर सकें। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में विभागों के चक्कर और रिश्वतखोरी से युवा त्रस्त हैं। यही वजह है कि इन युवाओं में राज्य सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है। वोटर अधिकार यात्रा में उमड़ रही लाखों की भीड़ साबित करता है कि लोग वर्तमान हालात से कितने दुखी हैं।
लेकिन बैसाखी के सहारे चुनावी मैदान में कांग्रेस
Rahul magic : यह बात सही है कि बिहार की सत्ता पर लंबे समय तक काबिज रही कांग्रेस अब बैसाखी के सहारे चुनावी मैदान में है। 1990 के दशक तक बिहार में कांग्रेस का बोलबाला रहा, लेकिन आज की परिस्थितियां बिल्कुल उलट हैं। हालातों से भली भांति परिचित राहुल गांधी इसी कोशिश में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहे हैं, ताकि पार्टी को फिर मजबूत स्थिति में खड़ा किया जा सके।
बिहार के चुनाव को साधने का प्रयास
Rahul magic : यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ बिहार के चुनाव को एसआईआर से अधिक प्रभावित करने की कोशिश है। ऐसे में राज्य की राजनीति पर राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का क्या असर होगा, इसका प्रश्न उठना लाजमी है। बात यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे को भुला नहीं जा सकता कि राहुल गांधी ने बिहार में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की घोषणा की थी, लेकिन बावजूद इसके नतीजे बिहार में मनमाफिक नहीं रहे।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में बिहार में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 10 तक नहीं पहुंचा।

संघर्ष कर रही है कांग्रेस
Rahul magic : अगर पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों और वोट प्रतिशत पर भी गौर करें तो कांग्रेस बिहार में सिर्फ संघर्ष करती नजर आ रही है। 2010 के चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 4 सीटों पर सिमट गई थी और वोट प्रतिशत 8.37 प्रतिशत रहा। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 41 सीटों पर दांव खेला था, जिनमें से 27 सीटों पर उनके उम्मीदवारों को सफलता मिली, लेकिन वोट प्रतिशत घटकर 6.66 प्रतिशत हो गया। 2020 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़कर 9.48 प्रतिशत हो गया, लेकिन पार्टी ने 70 में से 19 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 10 से कम रहा है। 2010, 2015 और 2020 में पार्टी का स्टाइक रेट क्रमश: 1.65%, 65.85%, 27.14% रहा।
भारत जोड़ो यात्रा से नहीं मिली थी सफलता
Rahul magic : पिछले तीन लोकसभा चुनावों की बात करें तो बिहार में कांग्रेस कुछ खास नहीं कर पाई। 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत हासिल की और वोट प्रतिशत 8.6 रहा। 2019 में कांग्रेस 1 सीट पर ही सिमट गई थी और उसका वोट प्रतिशत 7.9 प्रतिशत रह गया था। राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद भी बिहार में कांग्रेस को कुछ नहीं मिला। पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 9.4 प्रतिशत वोटों और 3 सीटों पर ही जीत हासिल की।

लोगों में उत्साह
Rahul magic : राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं में, भारत जोड़ो यात्रा के बाद, राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का उत्साह देखने को मिल रहा है। भीड़ भी जुट रही है, लेकिन उनकी इस यात्रा का बिहार विधानसभा चुनाव पर क्या असर होगा, यह तो चुनावों के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस बार हवा नीतीश कुमार के पक्ष में पूरी तरह से नहीं दिखाई दे रही है। ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही कह रही है। अब देखना है कि इस बार बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा या वही स्थिति कायम रहेगी।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.






