लखनऊ, 7 जनवरी। Neha Rathore relief : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले को लेकर कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद नेहा सिंह राठौर ने इसे अपने लिए मानसिक सुकून देने वाला कदम बताया और कहा कि उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
नेहा सिंह राठौर ने कहा कि सही और गलत का निर्णय करना अदालत का काम है, न कि किसी व्यक्ति या समूह का। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में व्यक्ति मानसिक रूप से काफी दबाव में आ जाता है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी।
Neha Rathore relief : 17 दिन पहले मिला था नोटिस
नेहा सिंह राठौर ने बताया कि करीब 15 से 17 दिन पहले उन्हें इस मामले में पहला नोटिस मिला था। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने एक पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को सूचित किया था कि वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकतीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या जूम मीटिंग के जरिए बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जांच में हरसंभव सहयोग करेंगी।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत उनके लिए बड़ी और सुखद खबर है, जिससे उन्हें मानसिक तौर पर राहत मिली है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।
नेहा सिंह राठौर ने कहा— “अब देखना होगा कि आगे क्या होता है। कोर्ट की प्रक्रिया लंबी होती है, लेकिन मैं किसी भी जांच से पीछे नहीं हटूंगी। जब भी बुलाया जाएगा, मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ जांच में सहयोग करूंगी।”
लोगों को सवाल उठाने चाहिए
Neha Rathore relief : सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज का समय डिजिटल माध्यमों का है और आम नागरिकों को अपनी समस्याओं पर खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव में नालियां टूटी हुई हैं, सड़कें खराब हैं या बुनियादी सुविधाओं की कमी है तो लोगों को कैमरे के माध्यम से सवाल उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके विधायक और सांसद कौन हैं और वर्षों से वोट देने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहतर क्यों नहीं हुई।
आम लोग सिर्फ बुनियादी जरूरतें मांग रहे
Neha Rathore relief : नेहा सिंह राठौर ने देश के कई हिस्सों में स्वच्छ पानी और स्वच्छ हवा की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि आम लोग कोई विलासिता नहीं मांग रहे हैं। लोगों की मांग केवल इतनी है कि उन्हें पीने के लिए साफ पानी और सांस लेने के लिए साफ हवा मिले, जो जीवन की मूलभूत जरूरतें हैं।
अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डर के बिना अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि एफआइआर, मुकदमे या जेल के डर से सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में सवाल करना जरूरी है और न्याय के लिए अदालतें मौजूद हैं। अगर लोग चुप रहेंगे, तो हालात नहीं बदलेंगे।







