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Municipal Recruitment Scam : नगरपालिका भर्ती घोटाला: ईडी की जांच में मदन मित्रा का परिवार भी घेरे में

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कोलकाता, 23 जुलाई । Municipal Recruitment Scam :  पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है। करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई अब उन लोगों तक पहुंच रही है जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए हैं। इसी क्रम में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के बड़े बेटे स्वरूप मित्रा को पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय बुलाया गया। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में मौजूद ईडी कार्यालय पहुंचे स्वरूप मित्रा से अधिकारियों ने मामले से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही मदन मित्रा के छोटे बेटे शुभोरूप मित्रा भी इसी मामले में ईडी के सामने पेश होकर पूछताछ का सामना कर चुके हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि केंद्रीय एजेंसी इस मामले में हर संभावित कड़ी की गहराई से जांच कर रही है।

बैंक दस्तावेज और आयकर रिटर्न लेकर पहुंचे स्वरूप मित्रा

दोपहर करीब 12:30 बजे स्वरूप मित्रा कुछ फाइलों के साथ ईडी कार्यालय पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि जांच अधिकारियों ने उनसे बैंक से जुड़े कुछ दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था। इसी निर्देश के तहत वह आवश्यक कागजात लेकर आए हैं।

स्वरूप ने यह भी बताया कि उन्होंने केवल बैंक खातों का विवरण ही नहीं, बल्कि वर्ष 2013-14 से लेकर अब तक के अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) की जानकारी भी साथ रखी है। उनका कहना था कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और अधिकारियों द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।

मीडिया के सवालों पर स्वरूप ने क्या कहा?

Municipal Recruitment Scam : ईडी कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पत्रकारों ने स्वरूप मित्रा से कई सवाल पूछे। उनसे जानना चाहा गया कि क्या नगरपालिका में नौकरी दिलाने के नाम पर किसी व्यक्ति ने उन्हें नकद राशि या सोना दिया था? साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या उनके बैंक खाते में इस तरह के किसी लेन-देन से जुड़ी रकम जमा हुई थी।

इन सवालों के जवाब में स्वरूप मित्रा ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई लेन-देन कभी नहीं हुआ। उनके अनुसार, ईडी केवल उनके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी की पुष्टि करना चाहती है। इसी कारण वह सभी आवश्यक दस्तावेज जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करने आए हैं।

पूरे परिवार पर जांच का दायरा बढ़ा

नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच अब केवल मदन मित्रा तक सीमित नहीं रह गई है। ईडी ने उनकी पत्नी अर्चना मित्रा को भी समन जारी किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि वह भी इसी सप्ताह जांच एजेंसी के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखेंगी।

इसके अलावा स्वयं मदन मित्रा को भी पूछताछ का नोटिस भेजा जा चुका है। उन्हें 29 जुलाई को ईडी कार्यालय में उपस्थित होकर अधिकारियों के सवालों का जवाब देना होगा। ऐसे में लगातार तीन दिनों तक परिवार के अलग-अलग सदस्यों से पूछताछ की प्रक्रिया इस मामले को और अधिक गंभीर बना रही है।

क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाले का पूरा मामला?

Municipal Recruitment Scam : पश्चिम बंगाल का नगरपालिका भर्ती घोटाला पिछले कुछ समय से राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है। आरोप है कि राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और योग्य उम्मीदवारों की जगह पैसे या अन्य लाभ लेकर लोगों को नौकरियां दी गईं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कई नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन हुआ। इसी कथित अनियमितता की जांच पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुरू की और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच ईडी ने अपने हाथ में ली।

टीटागढ़ नगरपालिका पर सबसे गंभीर आरोप

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ईडी को ऐसे इनपुट मिले हैं जिनमें दावा किया गया है कि उत्तर 24 परगना जिले की टीटागढ़ नगरपालिका में कम से कम 125 लोगों को कथित रूप से नकद राशि या सोने के बदले नौकरी दी गई। इसी जांच के दौरान मदन मित्रा का नाम सामने आने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इस मामले में अभी जांच जारी है और एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, बैंक खातों तथा वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

पहले भी हो चुकी है तलाशी की कार्रवाई

मदन मित्रा और उनके परिवार के खिलाफ जांच कोई नई बात नहीं है। 13 जून को ईडी ने उनके दो आवासों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था। इनमें एक आवास दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर इलाके में स्थित है, जबकि दूसरा कमरहाटी में है।

कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र से मदन मित्रा तीन बार विधायक रह चुके हैं। ईडी की टीम ने इन दोनों ठिकानों पर कई घंटे तक दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की थी। उसी दौरान कोलकाता और उसके आसपास सात अन्य स्थानों पर भी समानांतर छापेमारी की गई थी।

इन कार्रवाइयों का उद्देश्य कथित भर्ती घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाना बताया गया था।

सीबीआई भी पहले कर चुकी है कार्रवाई

Municipal Recruitment Scam : इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता पहले से ही बनी हुई है। अक्टूबर 2025 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी नगरपालिका भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में मदन मित्रा के आवास पर छापेमारी की थी।

सीबीआई की जांच में जुटाए गए कई दस्तावेज और साक्ष्य बाद में ईडी की जांच का भी हिस्सा बने। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं की जांच तेज कर दी गई।

अन्य नेताओं पर भी जांच की आंच

नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। पिछले सप्ताह सीबीआई ने कोलकाता की विशेष अदालत में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस और उनके बेटे समुद्र बोस के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दाखिल की।

जांच एजेंसियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आर्थिक लेन-देन और कथित अवैध संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी लोगों से पूछताछ हो सकती है।

राजनीतिक घटनाक्रम ने भी बढ़ाई चर्चा

Municipal Recruitment Scam : मदन मित्रा हाल के महीनों में राजनीतिक कारणों से भी चर्चा में रहे हैं। वे तृणमूल कांग्रेस के भीतर सक्रिय रहे हैं, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में उनका नाम पार्टी के बागी नेताओं के साथ भी जोड़ा गया। बताया जाता है कि वे उस गुट के करीब माने जा रहे हैं जिसका नेतृत्व पार्टी से निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी कर रहे हैं।

हालांकि, जांच एजेंसियों की कार्रवाई का संबंध राजनीतिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है।

जांच पर टिकी सबकी निगाहें

नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मदन मित्रा के दोनों बेटों से पूछताछ, उनकी पत्नी को जारी समन और स्वयं विधायक को भेजा गया नोटिस इस बात का संकेत है कि ईडी मामले की हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

अब सभी की नजर 29 जुलाई पर टिकी है, जब मदन मित्रा स्वयं ईडी के सामने पेश होंगे। माना जा रहा है कि उनकी पूछताछ के बाद जांच की दिशा और अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल एजेंसियां सबूत जुटाने और वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी हैं, जबकि संबंधित पक्ष लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए जांच में सहयोग करने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

jahanvi singh
Author: jahanvi singh

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