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Mohan Bhagwat Call : लखनऊ से उठी संगठन की हुंकार, मोहन भागवत ने किया हिंदुओं को एकजुट रहने का आह्वान

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Mohan Bhagwat Call for Hindu Unity and Social Harmony in Lucknow

लखनऊ, 17 फरवरी। Mohan Bhagwat Call : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज से एकजुट और सशक्त बनने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सजग रहना समय की मांग है।

लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने घटती हिंदू जनसंख्या, कथित जबरन मतांतरण और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।

Mohan Bhagwat Call :जनसंख्या संतुलन पर जोर

भागवत ने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह भविष्य में कमजोर पड़ सकता है। उन्होंने परिवारों, विशेषकर नवदंपतियों को इस विषय में जागरूक करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने विवाह की उपयुक्त आयु 19 से 25 वर्ष बताते हुए कहा कि विवाह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख नहीं, बल्कि सृष्टि की निरंतरता और कर्तव्यबोध होना चाहिए।

मतांतरण और घर वापसी पर स्पष्ट रुख

Mohan Bhagwat Call :सरसंघचालक ने घटती हिंदू आबादी पर चिंता जताते हुए लालच या दबाव में हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने “घर वापसी” अभियान को गति देने और धर्म में लौटने वालों की समुचित देखभाल करने की बात कही।

घुसपैठ पर सख्ती की वकालत

Mohan Bhagwat Call : भागवत ने बढ़ती घुसपैठ को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाना होगा और उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने समाज से सजग और संगठित रहने का आह्वान किया।

सद्भाव ही सनातन विचारधारा का मूल

Mohan Bhagwat Call : उन्होंने कहा कि भेदभाव की प्रवृत्ति समय के साथ विकसित हुई है, जिसे दूर करना आवश्यक है। “हम सभी एक मातृभूमि की संतान हैं” — इस भाव को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोधियों को मिटाना समाधान नहीं है, बल्कि सनातन विचारधारा का मूल तत्व सद्भाव और समन्वय है। संघर्ष नहीं, समन्वय से ही समाज और विश्व आगे बढ़ता है।

मातृशक्ति का सम्मान

Mohan Bhagwat Call : भागवत ने कहा कि परिवार की आधारशिला मातृशक्ति है। भारतीय परंपरा में महिलाओं को ‘माता’ का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मबल और प्रशिक्षण से सशक्त बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने पश्चिमी और भारतीय दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री के वात्सल्य और शक्ति को महत्व दिया जाता है।

कानून, जाति और सामाजिक समरसता

Mohan Bhagwat Call : यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए। यदि कानून में त्रुटि हो तो उसे बदलने का लोकतांत्रिक मार्ग भी उपलब्ध है।

उन्होंने जातिगत विवादों से ऊपर उठने और समाज में अपनेपन का भाव बढ़ाने की आवश्यकता बताई। “जो नीचे गिरा है, उसे झुककर उठाना होगा” — इस संदेश के साथ उन्होंने समरस समाज का आह्वान किया।

विश्व नेतृत्व की ओर भारत

Mohan Bhagwat Call : भागवत ने विश्वास जताया कि निकट भविष्य में भारत विश्व को दिशा देगा और वैश्विक समस्याओं का समाधान भारतीय चिंतन में निहित है।

उन्होंने बस्ती स्तर पर नियमित सामाजिक सद्भाव बैठकों की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे गलतफहमियां दूर हों और समाज की सज्जन शक्ति संगठित हो।

अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से सावधानी का संदेश

Mohan Bhagwat Call : उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग भारत की सद्भावना के विरुद्ध योजनाएं बना रहे हैं, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है। आपसी विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागिता को उन्होंने राष्ट्रीय मजबूती का आधार बताया।

विविध समाजों की सहभागिता

Mohan Bhagwat Call : कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, आर्य समाज, आर्ट ऑफ लिविंग सहित विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस बैठक के माध्यम से समाज में समरसता, संगठन और जागरूकता का व्यापक संदेश दिया गया।

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