नई दिल्ली, 6 दिसंबर। IndiGo Crisis : देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानें रद किए जाने का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। इस गंभीर संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक विस्तृत पत्र लिखते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेने और मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
अपनी याचिका में वकील नरेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ दिनों में इंडिगो द्वारा 1,000 से अधिक उड़ानों को रद किया गया है और सैकड़ों उड़ानों में भारी देरी हुई है। इसके कारण देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर लाखों यात्री फंसे हुए हैं, जिससे एक गंभीर मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
यात्रियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : मिश्रा
IndiGo Crisis : याचिका में कहा गया है कि इंडिगो की इस भारी लापरवाही के कारण यात्रियों के संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार, विशेष रूप से अनुच्छेद 21 – जीवन और गरिमा के अधिकार का खुला उल्लंघन हुआ है। हजारों यात्री — जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे, दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार लोग भी शामिल हैं — घंटों और कई मामलों में पूरी रात एयरपोर्ट पर फंसे रहे।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि एयरलाइन की ओर से यात्रियों को:
- न पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराया गया
- न पीने का पानी
- न विश्राम की व्यवस्था
- न ही आवश्यक दवाइयां
कई जगहों पर तो यात्री फर्श पर बैठने और सोने को मजबूर हुए। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि इंडिगो ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसके पास यात्रियों को संभालने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों की चूक बनी जड़
याचिका में बताया गया है कि यह संकट मुख्य रूप से नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL Phase-2) के गलत क्रियान्वयन के कारण पैदा हुआ। यह नियम पायलटों की सुरक्षा के लिए उनकी ड्यूटी अवधि निर्धारित करता है, ताकि थकान के कारण विमानन हादसों की संभावना न बने।
हालांकि, इंडिगो द्वारा उचित पूर्व-योजना और रोस्टरिंग न करने के कारण बड़ी संख्या में पायलट और क्रू उपलब्ध नहीं हो पाए और उड़ानों को अचानक रद करना पड़ा। मिश्रा ने इसे गंभीर प्रशासनिक कुप्रबंधन (Gross Mismanagement) करार दिया है।
यात्रियों से खुला आर्थिक शोषण
IndiGo Crisis : हजारों फ्लाइट्स के रद होने के बाद टिकटों के दाम आसमान छूने लगे। याचिका में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई है कि कुछ रूट्स पर टिकटों की कीमतें लाखों रुपये नहीं, लेकिन हजारों से बढ़कर 50,000 रुपये तक पहुंच गईं।
उदाहरण देते हुए बताया गया है कि मुंबई – दिल्ली सेक्टर में टिकट की दर लगभग 50,000 रुपये तक हो गई, जो स्पष्ट रूप से यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है। इसे याचिका में आर्थिक शोषण और उपभोक्ता अधिकारों का हनन बताया गया है।
DGCA और मंत्रालय की भूमिका पर सवाल
IndiGo Crisis : याचिका में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए गए हैं। कहा गया है कि स्थिति बिगड़ने से पहले न तो DGCA ने समय पर कदम उठाए और न ही मंत्रालय की ओर से कोई ठोस व्यवस्था की गई।
हालांकि बाद में DGCA ने कुछ नियमों में अस्थायी छूट दी, लेकिन याचिका में कहा गया है कि यह राहत तब दी गई जब संकट अपने चरम पर पहुंच चुका था और लाखों यात्री पहले ही परेशान हो चुके थे।
कोर्ट के समक्ष उठाए गए प्रमुख कानूनी सवाल
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी प्रश्न रखे गए हैं, जैसे —
- क्या बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने से पैदा हुआ यह संकट अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है?
- क्या निजी एयरलाइन की लापरवाही यात्रियों के मौलिक अधिकारों का हनन मानी जाएगी?
- क्या DGCA को इस प्रकार नियमों में ढील देने का अधिकार है?
- क्या मंत्रालय और DGCA अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं?
- क्या सुप्रीम कोर्ट जनहित में इस पर दिशा-निर्देश जारी कर सकता है?
सुप्रीम कोर्ट से की गई मुख्य मांगें
IndiGo Crisis : इस पूरे मामले में कोर्ट से निम्न प्रमुख मांगें की गई हैं:
- सुप्रीम कोर्ट मामले का स्वतः संज्ञान ले
- इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में स्वीकार किया जाए
- एक विशेष पीठ (Special Bench) का गठन कर शीघ्र सुनवाई हो
- इंडिगो को मनमाने तरीके से उड़ानें रद करने से रोका जाए
- फंसे यात्रियों के लिए मुफ्त वैकल्पिक व्यवस्था, खाना और ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए
- दोषी अधिकारियों और एयरलाइन के खिलाफ जवाबदेही तय की जाए
- पीड़ित यात्रियों को मुआवजा दिलाने पर विचार किया जाए
याचिका में इसे केवल एक एयरलाइन का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व और मानवाधिकार से जुड़ा संकट बताया गया है, जिसके दूरगामी प्रभाव देशभर के नागरिकों पर पड़े हैं।







