Ghazipur Opium Factory : 1820 की विरासत, देश की धरोहर
अवनीश सिंह, गाजीपुर/उत्तर प्रदेश। Ghazipur Opium Factory : राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने गुरुवार को सदन में गाजीपुर स्थित ऐतिहासिक अफीम एवं क्षारोद कारखाने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि यह कारखाना सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि गाजीपुर की पहचान, किसानों की आजीविका और देश की औषधीय जरूरतों से जुड़ा अहम केंद्र है।
सन् 1820 में ब्रिटिश काल के दौरान मां गंगा के पावन तट पर करीब 45 एकड़ भूमि में स्थापित यह कारखाना देश की ऐतिहासिक धरोहर है। पूरे भारत में अफीम फैक्ट्री केवल दो स्थानों—मध्य प्रदेश के नीमच और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर—में ही संचालित हैं। यह तथ्य स्वयं इस इकाई के राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है।
जीवन रक्षक दवाओं का प्रमुख स्रोत
Ghazipur Opium Factory : यहां उत्पादित अफीम का उपयोग दर्द निवारक और जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण में किया जाता है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 30 वर्ष पहले यह कारखाना अपनी पूर्ण क्षमता से संचालित होता था, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती थी और स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता था।
घटता उत्पादन, बढ़ती चिंता
Ghazipur Opium Factory : वर्तमान में स्थिति चिंताजनक है। पहले की तुलना में अब मात्र 20 प्रतिशत उत्पादन ही हो पा रहा है। इसका सीधा असर किसानों और श्रमिकों की आजीविका पर पड़ रहा है। उत्पादन में आई इस गिरावट को औद्योगिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से नुकसानदेह बताया गया।
जीएमपी मानकों के अनुरूप आधुनिकीकरण की मांग
Ghazipur Opium Factory : डॉ. संगीता बलवंत ने मांग की कि कारखाने का आधुनिकीकरण कर इसे जीएमपी (Good Manufacturing Practices) मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। साथ ही, गाजीपुर में अफीम की खेती को पुनः प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
विकास, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का सवाल
उन्होंने कहा कि यह केवल एक उद्योग का मुद्दा नहीं, बल्कि गाजीपुर के समग्र विकास, किसानों की समृद्धि और देश की औषधीय आत्मनिर्भरता से जुड़ा विषय है। जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा की।







