अवनीश सिंह, गाजीपुर/उत्तरप्रदेश। Ghazipur Chhath : गाजीपुर जिले में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ सनातन त्योहार छठ पर्व को श्रद्धालु मना रहे हैं। यह त्योहार जीवन दर्शन, सामाजिक समरसता का एक अद्भुत संगम है।
बता दें कि इस त्योहार में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है तथा षष्ठी देवी का पूजन किया जाता है। यह त्योहार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के षष्ठी के दिन मनाया जाता है। हालांकि, यह त्योहार कुल चार दिनों का होता है जिसमें खाय नहाए से शुरू होकर सूर्य देव के सुबह के अर्घ्य तक चलता है। इसमें औरतें पहले दिन लौकी भात तथा दूसरे दिन खीर रोटी तथा तीसरे दिन सूर्य भगवान को शाम को अर्घ्य देती हैं और चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर इस त्योहार का समापन होता है।

इन घाटों को सजाया गया
Ghazipur Chhath : गाजीपुर जिले में नंदगंज बरहपुर,कटघरा, शादियाबाद, रेवतीपुर, नवली, उतरौली, मनिहारी, गहमर आदि जगह पर महिलाओं ने आज शाम को सूर्य देव को अर्घ्य दिया। छठ घाटों को बड़े ही आकर्षक तरीके से हर जगह के ग्राम प्रधानों ने सजाया था। वहां माइक, डीजे, लाइट आज की व्यवस्थाएं ग्राम सभा के माध्यम से कराई गई थी।
द्रौपदी ने भी की थी छठ पूजा
Ghazipur Chhath : छठ व्रत के संबंध में अनेक कहानियां प्रचलित हैं। जैसे सूर्यवंशी राजा प्रियव्रत को संतान प्राप्ति के लिए छठ व्रत करना पड़ा था। महाभारत काल में पांडवों के सुख शांति के लिए द्रौपदी ने भी छठ पूजा किया था और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि लंका पर विजय पाने के बाद भगवान राम के अयोध्या आने के बाद माता सीता ने भी छठ पूजा की थी।

छठ व्रत के दिन औरतें कठिन उपवास रखकर दिनभर तैयारी में जुटी रहती हैं और अपने पति तथा अपने पुत्र और अपने परिवार की मंगल कामना की भगवान सूर्य देव एवं देवी षष्ठी से प्रार्थना करती हैं। यह व्रत बिहार,उत्तर प्रदेश सहित कई प्रान्तों तथा अन्य देश जैसे नेपाल में भी मनाया जाता है।







