पटना, 14 नवंबर। Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ है। राज्य में पहली बार रिकॉर्ड 67.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 1951 के बाद अब तक का सबसे ज्यादा मतदान है। इतना ही नहीं, इस चुनाव ने ‘जंगलराज’ के दौर की चुनावी हिंसा से लेकर शून्य री-पोलिंग तक का बड़ा सफर तय कर लिया है।
पहली बार बिहार में किसी बूथ पर री-पोलिंग नहीं
इस बार राज्य के किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। मतदाताओं ने बिना किसी डर और हिंसा के पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से मतदान किया। चुनावी हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई, जो बिहार के चुनाव इतिहास में बेहद दुर्लभ है।
जंगलराज काल में हिंसा और फर्जी मतदान चरम पर
Bihar Election: विपक्ष द्वारा ‘जंगलराज’ कहा जाने वाला राजद शासनकाल बिहार के सबसे हिंसक चुनावों के लिए जाना जाता रहा है। तब हत्या, बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान की घटनाएं आम थीं।
1985 में चुनाव के दौरान 63 लोगों की हत्या हुई थी और 156 बूथ पर री-पोलिंग करानी पड़ी थी।
1990 में जनता दल की जीत वाले चुनाव में 87 मौतें दर्ज की गईं।
1995 में चुनावी हिंसा इतनी बढ़ गई कि चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को चुनाव चार बार तक स्थगित करने पड़े।
2005 में 660 बूथों पर दोबारा वोटिंग
Bihar Election: 2005 के चुनावों में भी व्यापक हिंसा और कदाचार देखने को मिला। इसी वर्ष नीतीश कुमार की अगुआई वाली जदयू पहली बार सत्ता में आई। इस दौरान 660 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराई गई थी।
2005 के बाद कानून-व्यवस्था में सुधार
Bihar Election: नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था में भारी सुधार हुआ और चुनावों के दौरान हिंसा और धांधली की घटनाएँ लगातार कम होती गईं।
2025 का चुनाव—शांतिपूर्ण और पारदर्शी
Bihar Election: इस बार के विधानसभा चुनाव में न तो किसी क्षेत्र से री-पोलिंग की मांग हुई और न ही हिंसा का कोई मामला दर्ज हुआ। यह बिहार की चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव और सुधार का प्रमाण माना जा रहा है।







