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Bengal SIR : बंगाल SIR पर चुनाव आयोग सख्त, डेटा-एंट्री में आइ-पैक दखल की होगी गहन जांच

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Bengal SIR: Election Commission Reviews Complaints Over Alleged I-PAC Data Entry Appointments

कोलकाता, 10 जनवरी। Bengal SIR : पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवादों के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने डेटा-एंट्री ऑपरेटर के रूप में आइ-पैक (I-PAC) स्टाफ की कथित नियुक्ति से जुड़ी शिकायतों की गंभीरता से समीक्षा करने का निर्णय लिया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों को अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मी दिखाकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कोलकाता में आइ-पैक के कार्यालय और संस्था के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है।

Bengal SIR : डेटा-एंट्री स्टाफ के बैकग्राउंड की दोबारा होगी जांच

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में डेटा-एंट्री ऑपरेटर के रूप में नियुक्त अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मचारियों के बैकग्राउंड की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि नियुक्ति से पहले अनिवार्य पुलिस सत्यापन रिपोर्ट सही तरीके से प्राप्त और सत्यापित की गई थी या नहीं।

क्यों अहम है डेटा-एंट्री की भूमिका?

Bengal SIR : आयोग का मानना है कि डेटा-एंट्री ऑपरेटरों की भूमिका SIR प्रक्रिया में बेहद संवेदनशील और निर्णायक होती है। इनका काम बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLO) द्वारा जुटाए गए मतदाता गणना प्रपत्रों की जानकारी को मैन्युअल रूप से दर्ज करना होता है, जिसे बाद में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के पास भेजा जाता है।

इस स्तर पर की गई किसी भी गलत एंट्री का सीधा असर अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल होने या हटने के फैसले पर पड़ सकता है। पहले ही SIR की तीन-स्तरीय प्रक्रिया के पहले चरण यानी गणना चरण के बाद गलत डेटा एंट्री के कुछ मामले सामने आ चुके हैं, जिससे मतदाताओं के एक विशेष वर्ग को परेशानी झेलनी पड़ी थी।

आयोग क्यों दिखा रहा है सख्ती?

Bengal SIR : सूत्रों के अनुसार, इन्हीं अनुभवों को देखते हुए चुनाव आयोग अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि डेटा-एंट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य में केवल पूरी तरह सत्यापित और अधिकृत कर्मी ही शामिल हों। इसी कारण आइ-पैक से जुड़े स्टाफ की कथित भागीदारी को लेकर आई शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।

आगे क्या? चुनावी कैलेंडर पर नजर

Bengal SIR : गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर 2025 को जारी की जा चुकी है, जबकि फाइनल मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित होगी। इसके तुरंत बाद चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किए जाने की संभावना है।

ऐसे में SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आयोग के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है, ताकि आने वाले चुनावों पर किसी तरह का सवाल न उठे।

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