'एन पी एन लाइव'

Shashankasana Yoga : तनाव और खराब पाचन से हैं परेशान? रोजाना करें शशकासन

SHARE:

Shashankasana Yoga: Benefits for Stress and Digestion

निवेदिता झा, नई दिल्ली। Shashankasana Yoga


आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, अनियमित खान-पान और खराब दिनचर्या के कारण बड़ी संख्या में लोग शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, पर्याप्त नींद नहीं लेना, समय पर भोजन न करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी का असर शरीर के साथ-साथ मन पर भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाना काफी उपयोगी हो सकता है। योग न केवल शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, बल्कि मन को शांत करने और दिनचर्या में संतुलन बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।

योग के अनेक आसनों में शशकासन एक ऐसा सरल आसन है, जिसे नियमित अभ्यास के जरिए अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। यह आसन विशेष रूप से तनाव और मानसिक थकान को कम करने तथा पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए उपयोगी माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शशकासन का अभ्यास अपेक्षाकृत सरल है और इसे शांत वातावरण में योग मैट पर किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी योगासन का अभ्यास व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

क्या है शशकासन?

Shashankasana Yoga : शशकासन दो शब्दों से मिलकर बना है—’शशक’ यानी खरगोश और ‘आसन’ यानी योग की मुद्रा। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर की आकृति काफी हद तक खरगोश जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे शशकासन कहा जाता है। यह देखने में आसान जरूर लगता है, लेकिन नियमित और सही तरीके से किए जाने पर शरीर तथा मन के लिए इसके कई संभावित लाभ बताए जाते हैं।

आगे की ओर झुकने वाली इस मुद्रा में शरीर को कुछ समय के लिए स्थिर रखा जाता है। इससे व्यक्ति को शांत रहने और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है। योग अभ्यास में सांस और शरीर की गति के बीच तालमेल को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

शशकासन करने का सही तरीका

Shashankasana Yoga : शशकासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले किसी शांत, साफ और समतल स्थान पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएं। शुरुआत वज्रासन की मुद्रा से करें। दोनों घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें और अपनी रीढ़ को सीधा रखें। शरीर को सहज और तनावमुक्त रखने का प्रयास करें।

इसके बाद दोनों पैरों के घुटनों को धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर करें। ध्यान रखें कि दोनों पैरों के अंगूठे आपस में जुड़े रहें। अब गहरी सांस लेते हुए दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें।

अगले चरण में धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुकाएं। झुकते समय जल्दबाजी न करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही शरीर को नीचे ले जाएं। ठुड्डी को जमीन पर टिकाने का प्रयास करें। इस दौरान दोनों भुजाओं को सीधा और समानांतर रखने की कोशिश करें।

इस स्थिति में सामने की ओर देखते हुए सामान्य गति से सांस लेते रहें। शुरुआत में करीब 10 से 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रह सकते हैं। अभ्यास के दौरान किसी प्रकार का अत्यधिक खिंचाव, दर्द या असहजता महसूस हो तो मुद्रा को छोड़ देना चाहिए।

समय पूरा होने के बाद धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाते हुए वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं। शुरुआती लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार कम समय से शुरुआत करनी चाहिए और अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे अवधि बढ़ाई जा सकती है।

तनाव और चिंता कम करने में मददगार

Shashankasana Yoga :  आज के समय में मानसिक तनाव एक आम समस्या बनती जा रही है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल और अनियमित जीवनशैली के कारण कई लोगों को मानसिक थकान और बेचैनी महसूस होती है।

शशकासन में शरीर को आगे की ओर झुकाने के दौरान व्यक्ति को अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है। इससे मन को शांत करने और शरीर को आराम देने में मदद मिल सकती है। नियमित योग अभ्यास तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।

हालांकि, इसे किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का उपचार नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर या लगातार बनी रहने वाली चिंता और तनाव की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी

Shashankasana Yoga :  खराब खान-पान और अनियमित दिनचर्या का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। कब्ज, गैस, अपच और पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां आज आम हो गई हैं। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार के साथ योग को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

शशकासन के अभ्यास से पेट के आसपास के हिस्से पर हल्का दबाव और खिंचाव पड़ता है। योग परंपरा में इसे पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और कब्ज जैसी समस्या में सहायक माना जाता है। हालांकि, पाचन संबंधी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह भी लेनी चाहिए।

पीठ और रीढ़ के लिए संभावित फायदे

Shashankasana Yoga :  शशकासन का नियमित और सही अभ्यास पीठ तथा रीढ़ की लचक बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है। आगे की ओर झुकने वाली मुद्रा के कारण पीठ के आसपास के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है। इससे शरीर को आराम मिलने और मांसपेशियों में जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।

लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले लोगों में पीठ और कमर में जकड़न की शिकायत आम होती है। ऐसे लोगों के लिए नियमित योग और हल्की शारीरिक गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, पहले से मौजूद पीठ की समस्या वाले लोगों को किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही यह आसन करना चाहिए।

जननांगों और शरीर के निचले हिस्से पर भी असर

Shashankasana Yoga :  शशकासन को शरीर के निचले हिस्से और जननांगों से जुड़े क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी बताया जाता है। योग अभ्यास में इसे संबंधित मांसपेशियों में टोन और कसावट बनाए रखने में सहायक माना जाता है। हालांकि, इन दावों को किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

किन लोगों को शशकासन करने से बचना चाहिए?

Shashankasana Yoga :  शशकासन भले ही सरल दिखाई देता हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए हर समय इसका अभ्यास उपयुक्त नहीं हो सकता। यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक पीठ दर्द की समस्या है तो उसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

इसी तरह घुटनों से जुड़ी गंभीर समस्या, विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस, से पीड़ित लोगों को भी शशकासन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। घुटनों पर दबाव या असुविधा महसूस होने पर इस आसन को रोक देना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को रीढ़, गर्दन, घुटने या किसी अन्य हिस्से में गंभीर चोट या पुरानी बीमारी है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

शुरुआत धीरे-धीरे करें

Shashankasana Yoga :  योग का लाभ तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है जब इसका अभ्यास सही तकनीक और नियमितता के साथ किया जाए। शुरुआती लोगों को किसी भी आसन को करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। शरीर को जबरदस्ती मोड़ने या अपनी क्षमता से अधिक देर तक मुद्रा में बने रहने से बचना चाहिए।

शशकासन का अभ्यास करते समय सांसों को सामान्य रखें और शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें। शुरुआत में कुछ सेकंड तक आसन करने के बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। नियमित योग के साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, पर्याप्त पानी और सक्रिय जीवनशैली को भी महत्व देना जरूरी है।

योग को बनाएं स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा

Shashankasana Yoga :  तनाव और पाचन संबंधी परेशानियों से बचने के लिए केवल किसी एक आसन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव को नियंत्रित करना भी जरूरी है। योग इन सभी प्रयासों में एक सहायक गतिविधि के रूप में शामिल किया जा सकता है।

शशकासन का नियमित अभ्यास शरीर को आराम देने, मन को शांत करने और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद कर सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लगातार दर्द, गंभीर पाचन समस्या या कोई अन्य स्वास्थ्य परेशानी है, तो योग अभ्यास शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

Nivedita Jha
Author: Nivedita Jha

Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *