नई दिल्ली, 18 सितंबर। TMC Party Dispute : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल फ्रीज किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में पहले वोट चोरी, फिर सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी जैसी स्थिति सामने आ रही है और ये सब लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बनते जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विवाद को शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी से जुड़े पुराने विवादों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस का मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी मामलों में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है। उनके मुताबिक, भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक राजनीतिक दल को विभाजित करते हैं और इसके बाद उस पार्टी के चुनाव चिह्न पर भी कार्रवाई की जाती है।
कांग्रेस नेता ने आगे लिखा कि जब पूरी की पूरी राजनीतिक पार्टी ही ‘चोरी’ की जा सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होने की बात भी हैरान करने वाली नहीं है। उन्होंने अपने संदेश में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ का उल्लेख करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बताया।
चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल
TMC Party Dispute : राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है। लेकिन उनके आरोप के अनुसार, आयोग इसके विपरीत उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटने का प्रयास करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस तक सीमित नहीं है। राहुल गांधी के अनुसार, यह हर राजनीतिक दल और हर उस मतदाता से जुड़ा विषय है, जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था चाहता है।
राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं।
दोनों टीएमसी गुटों के लिए नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज
TMC Party Dispute : दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के लिए पार्टी के मौजूदा नाम और चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज करने का आदेश दिया है। आयोग की इस अंतरिम व्यवस्था का मतलब है कि जब तक इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नाम और पार्टी के पारंपरिक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
इस फैसले के बाद दोनों गुटों को अपनी अलग राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। चुनाव आयोग की ओर से दोनों पक्षों से नए पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए हैं। आयोग उपलब्ध विकल्पों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न तय करेगा।
इस घटनाक्रम के कारण आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों गुटों को इन चुनावों में अपने-अपने नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना पड़ सकता है।
विधानसभा चुनाव के बाद सामने आया था पार्टी के भीतर विवाद
TMC Party Dispute : गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक और संगठनात्मक विवाद गहरा गया। विवाद की शुरुआत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर हुई। इसके बाद पार्टी के भीतर दो अलग-अलग धड़े खुलकर सामने आ गए।
दिए गए विवरण के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से करीब 58 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ चले गए। दावा किया गया कि यह संख्या दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से अधिक थी। इसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और विधायकों के समर्थन को लेकर विवाद और तेज हो गया।
एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस का मूल और वैध संगठन मानता है, वहीं दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अपने पास विधायकों के बहुमत का समर्थन होने का दावा कर रहा है। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी अधिकार का विवाद खड़ा हुआ।
पुराने नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों का दावा
TMC Party Dispute : तृणमूल कांग्रेस का नाम और उसका चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों गुटों द्वारा इस नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किए जाने के बाद चुनाव आयोग के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि आगामी चुनावों में किस पक्ष को पुराने नाम और चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।
मौजूदा विवाद का अंतिम समाधान होने तक चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पुराने नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। इससे दोनों पक्षों को फिलहाल वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था करनी होगी।
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां इस कार्रवाई को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, वहीं पूरे मामले में अंतिम फैसला चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत होना है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव पर भी असर
TMC Party Dispute : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग की अंतरिम रोक का सीधा असर आगामी विधानसभा उपचुनावों पर पड़ सकता है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से दोनों गुटों को आवंटित किए जाने वाले नाम और चुनाव चिह्न पर सभी की नजर रहेगी। दोनों पक्षों ने अपने-अपने विकल्प आयोग को सौंपे हैं और अब आयोग की घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों गुट किस नाम और किस चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ेंगे।
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक विवाद, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे तथा चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में भी प्रमुखता से सामने आया है। हालांकि, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम स्थिति चुनाव आयोग के आगे के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।







