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Abhishek Banerjee Security : अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव, ‘जेड प्लस’ सुरक्षा बंद, पायलट कार सुविधा भी वापस

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Abhishek Banerjee Security Downgraded as Z Plus Protection and Pilot Car Facility Withdrawn in Bengal

कोलकाता, 11 मई । Abhishek Banerjee Security : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही उन्हें मिलने वाली पायलट कार की सुविधा भी पूरी तरह बंद कर दी गई है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और इसे सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सामान्य सांसद स्तर की सुरक्षा

जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पिछले एक दशक से अधिक समय से ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही थी। यह देश की सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है, जिसमें विशेष प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी, एस्कॉर्ट वाहन और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था शामिल होती है।

लेकिन अब राज्य सरकार ने इस सुरक्षा श्रेणी को वापस लेने का फैसला लिया है। प्रशासनिक आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उन्हें अब केवल सामान्य सांसद स्तर की सुरक्षा ही प्रदान की जाएगी।

सामान्य तरीके से संचालित होगा काफिला

Abhishek Banerjee Security :  सिर्फ जेड प्लस सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी को मिलने वाली पायलट कार सुविधा भी समाप्त कर दी गई है। पहले वह यात्रा के दौरान पायलट वाहन के साथ चलते थे, जिससे उनका काफिला सुरक्षित और नियंत्रित रहता था।

अब यह सुविधा बंद होने के बाद उनका काफिला सामान्य तरीके से संचालित होगा। इस फैसले को प्रशासनिक रूप से सुरक्षा जरूरतों के पुनर्मूल्यांकन का हिस्सा बताया जा रहा है।

प्रशासनिक आदेश से हुआ बदलाव

Abhishek Banerjee Security :  सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव को लेकर सोमवार दोपहर एक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया। इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है और अब उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता नहीं मानी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा श्रेणी का निर्धारण खतरे के आकलन के आधार पर किया जाता है, न कि पद या प्रभाव के आधार पर।

“अनावश्यक सुरक्षा पर खर्च नहीं”

Abhishek Banerjee Security :  बैठक के दौरान यह भी सवाल उठाया गया कि क्या हर प्रभावशाली व्यक्ति को उच्च स्तरीय सुरक्षा देना जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा हुई कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल वास्तविक जरूरत के आधार पर होना चाहिए।

इसी नीति के तहत यह निर्णय लिया गया कि जिन लोगों को तत्काल खतरा नहीं है, उनकी सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया जाएगा। अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में कटौती इसी नीति का हिस्सा बताई जा रही है।

सुरक्षा में धीरे-धीरे कटौती

जानकारी के अनुसार, यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। चुनाव परिणामों के बाद से ही अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में धीरे-धीरे कटौती की जा रही थी।

पहले उनके कार्यालय के आसपास की भारी पुलिस सुरक्षा हटाई गई। इसके बाद उनके आवास के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी कम कर दी गई।

अब अंतिम चरण में जेड प्लस सुरक्षा और पायलट कार सुविधा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

आवास और कार्यालय की सुरक्षा में बदलाव

Abhishek Banerjee Security :  अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास और कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। पहले जहां उनके आवास ‘शांतिनिकेतन’ के बाहर चौबीसों घंटे भारी पुलिस बल तैनात रहता था, अब वहां सुरक्षा को सामान्य कर दिया गया है।

इसी तरह उनके कार्यालय परिसर से भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण और बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा भी कम

इस बदलाव का असर केवल अभिषेक बनर्जी तक सीमित नहीं रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा में भी बदलाव किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, हरिश चटर्जी स्ट्रीट स्थित उनके घर के बाहर से कई सुरक्षा बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं। सरकार बदलने के बाद 24 घंटे के भीतर ही कुछ सुरक्षा व्यवस्थाएं कम कर दी गई थीं।

बाद में कोलकाता पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को भी वापस बुला लिया। इससे राज्य में वीआईपी सुरक्षा नीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

“सुरक्षा खतरे का पुनर्मूल्यांकन”

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव पूरी तरह से खतरे के आकलन पर आधारित होता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार समय-समय पर सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की समीक्षा की जाती है।

इसी समीक्षा के आधार पर यह तय किया जाता है कि किसे कितनी सुरक्षा की आवश्यकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर लिया गया है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस कदम को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रभावित हो सकता है।

वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इस निर्णय पर नाराजगी जाहिर की है। पार्टी का कहना है कि अभिषेक बनर्जी को पहले से ही सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ता रहा है और ऐसे में उनकी सुरक्षा कम करना उचित नहीं है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा मानकों से अधिक राजनीतिक संदेश देता है। हालांकि, आधिकारिक रूप से पार्टी ने अभी विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।

पलटवार

वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि यदि खतरे का स्तर कम हुआ है तो सुरक्षा कम करना सामान्य प्रक्रिया है।

कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का उपयोग राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए।

सुरक्षा नीति पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सुरक्षा नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वीआईपी सुरक्षा का निर्धारण पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए।

यदि सुरक्षा श्रेणी में बार-बार बदलाव किए जाते हैं तो इससे प्रशासनिक स्थिरता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

आगे की स्थिति

Abhishek Banerjee Security : फिलहाल अभिषेक बनर्जी को सामान्य सांसद स्तर की सुरक्षा प्रदान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी और यदि भविष्य में किसी प्रकार का खतरा सामने आता है तो सुरक्षा व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

इस फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि राजनीतिक स्तर पर इस पर और क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं और क्या यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ता है।

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