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Fake Robbery Case : मुस्कान ने बिगाड़ दिया खेल, CCTV से खुल गई दिल्ली में 65 लाख की फर्जी डकैती की पोल

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Fake Robbery Case : Delhi Police arrested a delivery boy and his two friends for staging a fake robbery to steal ₹65 lakh cash from a CA office.

Fake Robbery Case : सीए के डिलीवरी बॉय समेत तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली, 10 मई। Fake Robbery Case : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक सनसनीखेज फर्जी डकैती मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के डिलीवरी बॉय ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर 65 लाख रुपये की नकदी हड़पने के लिए लूट की झूठी कहानी रच डाली। उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद इलाके में हुई इस घटना ने पुलिस को भी शुरुआत में उलझन में डाल दिया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और लगातार पूछताछ के बाद पूरा मामला सामने आ गया। पुलिस ने आरोपित डिलीवरी बॉय सहित उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद कर ली गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 4 मई का है। उस दिन वजीराबाद स्थित एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां काम करने वाला 20 वर्षीय आयुष मिश्रा अपने मालिक की ओर से बड़ी रकम लेकर राजेंद्र प्लेस की तरफ जा रहा था। उसे यह रकम किसी व्यक्ति को पहुंचानी थी। रास्ते में उसने पुलिस को सूचना दी कि दो बाइक सवार बदमाशों ने उसका नकदी से भरा बैग छीन लिया और फरार हो गए। शुरुआत में मामला एक सामान्य लूट की वारदात जैसा लग रहा था, लेकिन जांच में धीरे-धीरे कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस को शिकायतकर्ता पर ही शक करने के लिए मजबूर कर दिया।

फर्जी डकैती की कहानी बनाकर मालिक को लगाया चूना

उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) राजा बंथिया ने बताया कि आयुष मिश्रा मूल रूप से बुराड़ी इलाके का रहने वाला है और वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था। 4 मई की दोपहर उसे करीब 65 लाख रुपये की नकदी लेकर राजेंद्र प्लेस भेजा गया था। उसने पुलिस को बताया कि जब वह वजीराबाद स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचा, तभी दो अज्ञात बाइक सवार युवकों ने उसका पीछा किया और नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए।

आयुष ने दावा किया कि लुटेरे बेहद तेजी से आए और कुछ ही सेकंड में वारदात को अंजाम देकर भाग निकले। उसने खुद को पीड़ित दिखाते हुए पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। हालांकि, शुरुआती जांच में कुछ बातें पुलिस को असामान्य लगीं।

CCTV फुटेज ने खोली साजिश की परतें

पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान एक फुटेज ऐसा मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फुटेज में कथित लुटेरे जब आयुष का पीछा कर रहे थे तब आयुष के चेहरे पर घबराहट नहीं बल्कि मुस्कान दिखाई दे रही थी।

यह दृश्य पुलिस के लिए बेहद संदिग्ध था। आमतौर पर लूट जैसी घटना के दौरान कोई व्यक्ति डरा या परेशान नजर आता है, लेकिन यहां शिकायतकर्ता का व्यवहार सामान्य और सहज दिखाई दे रहा था। इसी एक फुटेज ने पुलिस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मामला जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक गहरा है।

घटना और शिकायत के समय में बड़ा अंतर

Fake Robbery Case : जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण तथ्य मिला। कथित लूट की घटना दोपहर करीब 3:30 बजे हुई थी, लेकिन आयुष ने पुलिस को इसकी सूचना शाम लगभग 6 बजे दी। पुलिस अधिकारियों ने जब उससे पूछा कि घटना के करीब ढाई घंटे बाद उसने शिकायत क्यों दर्ज कराई तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

समय के इस अंतर ने पुलिस के शक को और मजबूत कर दिया। इसके बाद जांच टीम ने आयुष से लगातार पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान उसके बयान बार-बार बदलते रहे। कभी वह कहता कि वह डर गया था इसलिए देर से शिकायत की, तो कभी कहता कि पहले वह अपने मालिक को सूचना देने में लगा हुआ था। लेकिन उसके जवाब पुलिस को संतुष्ट नहीं कर पाए।

आर्थिक तंगी बनी अपराध की वजह

पुलिस पूछताछ में आखिरकार आयुष टूट गया और उसने पूरा सच कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने अपने दो दोस्तों आशु और आकाश के साथ मिलकर अपने मालिक की रकम हड़पने की योजना बनाई थी। योजना घटना से लगभग चार-पांच दिन पहले बनाई गई थी।

आयुष ने पुलिस को बताया कि वह आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। उसके दोनों साथी भी पैसों की तंगी का सामना कर रहे थे। जल्दी पैसे कमाने और आर्थिक संकट से निकलने के लिए उन्होंने मिलकर नकली डकैती की योजना बनाई। उन्हें लगा कि यदि लूट की कहानी विश्वसनीय तरीके से पेश कर दी जाए तो किसी को उन पर शक नहीं होगा और वे आराम से रकम बांट लेंगे।

कैसे रची गई पूरी साजिश

Fake Robbery Case :डीसीपी राजा बंथिया के अनुसार, योजना के तहत आशु ने आयुष को नकदी ले जाने के लिए एक मोटरसाइकिल उपलब्ध कराई थी। जैसे ही आयुष को ऑफिस से पैसे लेकर निकलने की सूचना मिली, आशु और आकाश दूसरी मोटरसाइकिल पर उसका पीछा करने लगे।

पहले से तय योजना के मुताबिक, वजीराबाद स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचते ही दोनों ने आयुष की बाइक के करीब आकर नकदी से भरा बैग छीन लिया। इसके बाद वे तेजी से खजूरी इलाके की तरफ भागे ताकि लोगों को लगे कि असली लुटेरे फरार हो गए हैं। पुलिस को भ्रमित करने के लिए उन्होंने कुछ दूरी पर जाकर यू-टर्न लिया और अलग रास्तों से निकल गए।

आरोपियों को विश्वास था कि इस तरह की प्लानिंग के बाद पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाएगी। लेकिन तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज ने उनकी पूरी योजना को नाकाम कर दिया।

24 घंटे में पुलिस ने सुलझाया मामला

उत्तरी दिल्ली पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। पुलिस टीम ने लगातार सीसीटीवी फुटेज की जांच, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और आरोपितों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसी दौरान पुलिस को आयुष की गतिविधियों में कई विरोधाभास नजर आए।

लगातार पूछताछ और सबूतों के दबाव में आयुष ने आखिरकार अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने पहले 2.5 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद उसके दोनों साथियों आशु और आकाश को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि आशु की दुकान से करीब 2 लाख रुपये बरामद किए गए, जबकि आकाश के घर से भी 2 लाख रुपये बरामद हुए। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलें भी जब्त कर ली गईं।

आरोपित कौन हैं?

Fake Robbery Case : पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपित दिल्ली के बुराड़ी इलाके के रहने वाले हैं। मुख्य आरोपित आयुष मिश्रा की उम्र 20 वर्ष है, जबकि उसका साथी आशु 28 वर्ष और आकाश 33 वर्ष का है। तीनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे और आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने अपराध की योजना बनाई।

जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी पिछले कुछ समय से पैसों की कमी से परेशान थे। इसी वजह से उन्होंने आसान तरीके से बड़ी रकम हासिल करने की योजना बनाई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इससे पहले भी उन्होंने किसी अन्य घटना में इस तरह की भूमिका निभाई थी।

पुलिस की सतर्कता से खुला मामला

इस पूरे मामले में पुलिस की तकनीकी जांच और सतर्कता की काफी चर्चा हो रही है। यदि पुलिस केवल शिकायतकर्ता की कहानी पर भरोसा कर लेती तो संभव है कि यह मामला एक अनसुलझी लूट बनकर रह जाता। लेकिन सीसीटीवी फुटेज में दिखी एक छोटी सी मुस्कान ने जांच की दिशा बदल दी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से योजना बनाएं, तकनीक और सतर्क जांच के सामने बचना मुश्किल है। इस मामले में भी आरोपितों ने सोचा था कि नकली लूट की कहानी बनाकर वे पुलिस को गुमराह कर देंगे, लेकिन उनकी छोटी-छोटी गलतियों ने उन्हें पकड़वा दिया।

बढ़ रहे हैं फर्जी अपराध के मामले

दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हाल के वर्षों में फर्जी लूट, नकली अपहरण और खुद के साथ अपराध होने की झूठी कहानियां गढ़ने के मामले सामने आए हैं। कई बार लोग बीमा राशि, कर्ज से बचने या आर्थिक लाभ के लिए इस तरह की साजिश रचते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक दबाव और जल्दी पैसा कमाने की चाहत कई युवाओं को अपराध की ओर धकेल रही है। हालांकि इस तरह के अपराधों का खुलासा होने पर आरोपियों को न केवल कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है बल्कि सामाजिक बदनामी भी झेलनी पड़ती है।

आरोपितों पर होगी सख्त कार्रवाई

Fake Robbery Case : पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपियों से आगे की पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की गई बाकी रकम कहां छिपाई गई है और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इस साजिश में भूमिका थी।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाए जा रहे हैं ताकि अदालत में उन्हें कड़ी सजा दिलाई जा सके। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि अपराध पर नियंत्रण के लिए तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क और त्वरित जांच प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाक योजना बना लें, कानून के हाथ लंबे होते हैं और सच्चाई देर-सबेर सामने आ ही जाती है।

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