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Suvendu Journey : पश्चिम बंगाल में इतिहास रचते हुए सुवेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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Suvendu Journey : Suvendu Adhikari sworn in as West Bengal’s first BJP Chief Minister. A look at his political journey from councillor to CM.

कोलकाता, 9 मई। Suvendu Journey : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत कर दी। कोलकाता में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

यह केवल एक राजनीतिक शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि बंगाल की राजनीति में दशकों से चले आ रहे समीकरणों के बदलने का प्रतीक भी माना गया। लंबे समय तक वाम मोर्चा और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्य में पहली बार किसी दक्षिणपंथी दल की सरकार बनी है।

भव्य समारोह में जुटे बड़े नेता

Suvendu Journey :  कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और हजारों समर्थक मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने समारोह को और भी खास बना दिया।

पूरा मैदान भाजपा समर्थकों से भरा हुआ था। कार्यकर्ता हाथों में पार्टी के झंडे लिए “जय श्रीराम” और “सुवेंदु अधिकारी जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे। शपथ ग्रहण के साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला।

पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ

सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इन नेताओं को शामिल कर भाजपा ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी अब राज्य में मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार करने में जुट गई है।

विधायक दल ने सर्वसम्मति से चुना नेता

Suvendu Journey : मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से एक दिन पहले यानी 8 मई को भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सभी विधायकों ने सुवेंदु अधिकारी के नाम का समर्थन किया। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय माना जाने लगा था।

अमित शाह ने बैठक के बाद कहा था कि भाजपा विधायक दल के नेता के लिए कुल आठ प्रस्ताव मिले और सभी में केवल सुवेंदु अधिकारी का नाम था। इससे साफ हो गया कि पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर कोई मतभेद नहीं था।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत

Suvendu Journey :  2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए ऐतिहासिक साबित हुए। पार्टी ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया।

राज्य में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की आवश्यकता थी, लेकिन भाजपा ने यह आंकड़ा काफी आसानी से पार कर लिया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में जनता के बदलते रुझान और भाजपा के बढ़ते प्रभाव का संकेत है।

तीन दशक लंबा राजनीतिक सफर

सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन तीन दशक से भी अधिक पुराना है। उन्होंने राजनीति की शुरुआत 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में की थी।

उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यही नेता पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनेगा। लेकिन सुवेंदु अधिकारी ने लगातार संगठन और जनता के बीच काम कर अपनी अलग पहचान बनाई।

वे लगातार तीन बार पार्षद चुने गए और बाद में कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी बने। स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे राज्य स्तर तक पहुंच गया।

विधायक से सांसद और फिर मुख्यमंत्री तक

सुवेंदु अधिकारी को 20 साल से अधिक का विधायी अनुभव हासिल है। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और तीन बार विधायक भी चुने गए।

इसके अलावा उन्होंने पांच साल तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने राज्य सरकार को कई मुद्दों पर घेरा और भाजपा को मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित किया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी प्रशासनिक समझ और जमीनी पकड़ ने उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली

तृणमूल कांग्रेस सरकार में रहते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में काम किया। इसके अलावा वे हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरमैन भी रहे।

हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में कई विकास परियोजनाओं को गति मिली।

सहकारिता आंदोलन से गहरा जुड़ाव

सुवेंदु अधिकारी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सहकारिता आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

वे एग्रीकल्चर रूरल बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी रह चुके हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने और किसानों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा परिवार

सुवेंदु अधिकारी का परिवार पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध अधिकारी परिवारों में गिना जाता है, जिसका स्वतंत्रता आंदोलन से भी गहरा संबंध रहा है।

उनके परिवार के सदस्य बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी कई स्वतंत्रता सेनानियों के करीबी सहयोगी थे।

ब्रिटिश शासन के दौरान बिपिन अधिकारी को जेल भेजा गया था और अधिकारी परिवार का घर दो बार जला दिया गया था। इस पारिवारिक विरासत का प्रभाव सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन में भी देखा जाता है।

शिक्षा और निजी जीवन

Suvendu Journey :  सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में हुआ था।

उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.ए. की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं और बंगाल की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

सुवेंदु अधिकारी फिलहाल अविवाहित हैं और पूरी तरह राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं।

नंदीग्राम आंदोलन से मिली पहचान

सुवेंदु अधिकारी को राज्यस्तर पर सबसे बड़ी पहचान 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से मिली।

उस समय वाम मोर्चा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने पूरे बंगाल की राजनीति बदल दी थी। सुवेंदु अधिकारी इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे।

नंदीग्राम आंदोलन ने 34 साल पुराने वाम शासन को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई और 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई।

तृणमूल से भाजपा तक का सफर

सुवेंदु अधिकारी लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। वे ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे।

लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़ने लगे। आखिरकार दिसंबर 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया।

उनका भाजपा में शामिल होना बंगाल की राजनीति का बड़ा मोड़ माना गया।

“जायंट किलर” की पहचान

सुवेंदु अधिकारी को राजनीति में “जायंट किलर” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।

इसके बाद 2026 में उन्होंने भवानीपुर सीट पर भी ममता बनर्जी को पराजित कर बंगाल की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

भवानीपुर में जीत के बाद भाजपा के भीतर उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जाने लगा था।

Suvendu Journey : Suvendu Adhikari sworn in as West Bengal’s first BJP Chief Minister. A look at his political journey from councillor to CM.

भाजपा के लिए क्यों अहम हैं सुवेंदु?

विशेषज्ञों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी भाजपा के लिए केवल एक नेता नहीं बल्कि बंगाल में पार्टी के सबसे बड़े जनाधार वाले चेहरे बन चुके हैं।

उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़, संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक रणनीति ने भाजपा को बंगाल में ऐतिहासिक जीत दिलाने में मदद की।

भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पार्टी राज्य में लंबे समय तक अपनी पकड़ बनाए रख सकेगी।

नई सरकार के सामने चुनौतियां

Suvendu Journey : हालांकि भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है, लेकिन नई सरकार के सामने कई चुनौतियां भी होंगी।

राज्य में बेरोजगारी, उद्योगों की कमी, राजनीतिक हिंसा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जनता की अपेक्षाएं काफी बढ़ चुकी हैं।

इसके अलावा भाजपा को बंगाल की सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए शासन करना होगा।

जनता की उम्मीदें बढ़ीं

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य के लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। युवा वर्ग रोजगार और निवेश की उम्मीद कर रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान विकास, उद्योग, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे कई वादे किए थे। अब जनता चाहती है कि इन वादों को जल्द पूरा किया जाए।

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बदलाव के संकेत

सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।

स्थानीय पार्षद से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर संघर्ष, संगठन और राजनीतिक रणनीति का उदाहरण माना जा रहा है।

भाजपा की पहली सरकार और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में अब पश्चिम बंगाल एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है और राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

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