Hormuz Strait Attack : तेल मार्ग पर युद्ध जैसी स्थिति, ईरान के हमले से दुनिया में चिंता
न्यूयॉर्क, 22 अप्रैल। Hormuz Strait Attack : वैश्विक समुद्री व्यापार और कूटनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी और चिंताजनक घटना सामने आई है। ईरान ने बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में एक जहाज पर हमला किया, जो भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा बंदरगाह की ओर जा रहा था। यह हमला उस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनिश्चितकालीन संघर्षविराम (सीजफायर) की बात कही थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और अधिक गंभीर हो गया है।
अनधिकृत गतिविधियां : ‘प्रेस टीवी’
Hormuz Strait Attack : ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, यह हमला उन दो जहाजों में से एक पर किया गया, जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी (IRGC-N) ने अपने कब्जे में लेने और कार्रवाई करने की घोषणा की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों जहाजों को “अनधिकृत गतिविधियों” के चलते निशाना बनाया गया।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट में जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसेस्का (MSC Francesca) और एपामिनोंडास (Epaminondas) के रूप में की गई है। इन जहाजों पर हमले के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लाइबेरिया का लगा हुआ था झंडा
शिप ट्रैकिंग से जुड़ी दो वेबसाइटों के अनुसार, लाइबेरिया का झंडा लगा हुआ जहाज एपामिनोंडास दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से रवाना होकर भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था। यह जहाज गुरुवार तक अपने गंतव्य पर पहुंचने वाला था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह जहाज ग्रीस स्थित शिपिंग कंपनी कालमार मैरीटाइम एलएलसी के स्वामित्व में बताया जा रहा है।
व्यापार मार्गों पर गंभीर चिंता
इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।
यह पहला मौका नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब इस क्षेत्र में इस तरह की घटना हुई हो। इससे पहले शनिवार को भी ईरान पर आरोप लगे थे कि उसने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों पर हमला किया था, जबकि उन्हें इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति प्राप्त थी। भारत ने इस घटना को लेकर ईरान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी का कहना है कि हालिया हमले उन जहाजों पर किए गए क्योंकि वे “बिना अनुमति के संचालन कर रहे थे।” हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
समुद्री निगरानी एजेंसी ने की घटना की पुष्टि
Hormuz Strait Attack : ब्रिटेन की नौसेना से जुड़ी एक समुद्री निगरानी एजेंसी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि IRGC की गनबोट्स ने दोनों जहाजों पर फायरिंग की। एजेंसी के अनुसार, एक जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसमें आग लग गई है, जबकि दूसरा जहाज भी क्षतिग्रस्त हुआ है। हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या ईरानी बलों ने जहाजों को वास्तव में अपने नियंत्रण में ले लिया है या नहीं।
इस बीच, अमेरिका की ओर से इस घटना पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संघर्षविराम बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखेगी।
होर्मुज स्ट्रेट अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग
Hormuz Strait Attack : होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह ताजा हमला 19 अप्रैल को हुई उस घटना से भी जुड़ा हो सकता है, जिसमें अमेरिका ने एक ईरानी जहाज को रोक लिया था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उस ऑपरेशन में जहाज के इंजन रूम को नुकसान पहुंचाया गया था और मरीन कमांडो उसमें सवार हुए थे।
Hormuz Strait Attack : राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि उस जहाज में चीन से जुड़ी कोई “विशेष सामग्री” थी, जिसे उन्होंने एक तरह का “तोहफा” बताया था। हालांकि, चीन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे निराधार बताया है।
कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट में हुआ यह ताजा हमला न केवल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी गंभीर खतरे की घंटी माना जा रहा है।






