Jhalmuri Fake Claim : सोशल मीडिया का भ्रम टूटा: पीएम मोदी को खिलाने वाला आम दुकानदार निकला
दिल्ली, 22 अप्रैल। Jhalmuri Fake Claim : पश्चिम बंगाल के झारग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक स्थानीय दुकान पर झालमुड़ी खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद एक बड़ा दावा सामने आया कि जिस व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को झालमुड़ी परोसी थी, वह असल में एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) का अधिकारी था। हालांकि, अब प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक में इस दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया गया है।
जनता को भ्रमित करने की कोशिश
पीआइबी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा यह दावा कि झालमुड़ी बेचने वाला व्यक्ति एसपीजी का अधिकारी था, पूरी तरह फर्जी है। जांच में सामने आया कि वायरल तस्वीरों और पोस्ट में अलग-अलग छवियों को जोड़कर एक गलत नैरेटिव तैयार किया गया था, जिससे जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
वह साधारण दुकानदार है
Jhalmuri Fake Claim : चेक में यह भी बताया गया कि वायरल पोस्ट में जिस व्यक्ति को एसपीजी अधिकारी बताया जा रहा था, वह वास्तव में एक साधारण दुकानदार है। इस दावे की पुष्टि न केवल आधिकारिक फैक्ट चेक एजेंसी ने की, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट ‘ग्रोक’ ने भी इस भ्रम को दूर किया। ग्रोक ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह दावा गलत है और यह केवल एक मीम या मजाकिया तरीके से बनाई गई गलत सूचना है। उसने यह भी बताया कि वायरल तस्वीरों में दिख रहे दोनों व्यक्ति अलग-अलग हैं—एक वास्तविक दुकानदार है और दूसरा एक स्टॉक इमेज में दिखाया गया एसपीजी अधिकारी।
एजेंसी ने लोगों से की यह अपील
Jhalmuri Fake Claim : पीआइबी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी जो तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है, उसमें दुकानदार को सुरक्षाकर्मी बताकर एक झूठा दावा फैलाया जा रहा है, जो पूरी तरह निराधार है। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानकारी को बिना पुष्टि के साझा न करें, खासकर जब वह संवेदनशील और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़ी हो।
वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारग्राम दौरे के दौरान एक स्थानीय झालमुड़ी विक्रेता के ठेले पर रुककर वहां की प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड का आनंद लिया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने दुकानदार से बातचीत की, उसका हाल-चाल पूछा और खुद झालमुड़ी खरीदने पर जोर दिया।
दुकानदार का वास्तविक नाम विक्रम शॉ
इस दुकानदार की पहचान विक्रम शॉ के रूप में की गई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में उनका नाम दीपक कुमार भी बताया गया है। विक्रम शॉ ने बताया कि प्रधानमंत्री का अचानक उनके ठेले पर आना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का बेहद खास और यादगार पल है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
विक्रम को पीएम का आटोग्राफ नहीं लेने का मलाल
विक्रम शॉ ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे बातचीत की, उनका नाम पूछा और फिर खुद झालमुड़ी बनाने को कहा। जब उन्होंने झालमुड़ी तैयार की तो प्रधानमंत्री ने उसकी कीमत पूछी। दुकानदार ने पहले पैसे लेने से मना किया, लेकिन प्रधानमंत्री के आग्रह पर उन्होंने भुगतान स्वीकार किया। शॉ ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि उस समय वह प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ नहीं ले पाए।
इस दौरान प्रधानमंत्री को स्थानीय लोगों से बातचीत करते, हंसते-बोलते और आम लोगों के साथ सहजता से समय बिताते हुए देखा गया। यह पूरा दृश्य एक सामान्य और सौहार्दपूर्ण मुलाकात थी, जिसे सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश कर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
झूठ फैलाया गया
प्रधानमंत्री के इस अनौपचारिक और संक्षिप्त ठहराव के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के मीम्स और फर्जी दावे वायरल होने लगे। कुछ पोस्ट्स में यह झूठ फैलाया गया कि झालमुड़ी बेचने वाला व्यक्ति एसपीजी का अधिकारी था, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
पीआइबी फैक्ट चेक ने दोबारा स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला गलत सूचना और डिजिटल एडिटिंग का परिणाम है, जिसमें अलग-अलग तस्वीरों को जोड़कर एक भ्रामक कहानी गढ़ी गई। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।
कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली जानकारी हमेशा सही नहीं होती और बिना पुष्टि के फैलाई गई खबरें भ्रम और गलतफहमी का कारण बन सकती हैं।






