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Delimitation Debate India : परिसीमन और जनगणना पर घमासान, संसद में गरजी सरकार

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Delimitation Debate India: Amit Shah Targets Congress in Lok Sabha

नई दिल्ली, 17 अप्रैल। Delimitation Debate India : नई दिल्ली में लोकसभा के भीतर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष विस्तार से रखा और विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर जो आशंकाएं और भ्रम फैलाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा

Delimitation Debate India : गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में यह प्रावधान पहले से ही शामिल है कि वर्ष 2026 के बाद होने वाली अगली जनगणना के आधार पर जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी, तब महिलाओं के लिए आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे व्यवस्थित ढंग से लागू किया जाना है।

इसलिए सांसदों की संख्या नहीं बढ़ी

Delimitation Debate India : अमित शाह ने विपक्ष के इस सवाल का भी जवाब दिया कि इस विधेयक में परिसीमन का उल्लेख क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि इसकी पृष्ठभूमि 1971 से जुड़ी है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने परिसीमन को फ्रीज करने का निर्णय लिया था। उसी समय सीटों की संख्या को स्थिर कर दिया गया था और उसी व्यवस्था के कारण आज भी जनसंख्या बढ़ने के बावजूद सांसदों की संख्या में बदलाव नहीं हुआ है।

परिसीमन के लाभ से जनता को वंचित रखा

Delimitation Debate India : उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 में इंदिरा गांधी सरकार ने परिसीमन विधेयक लाकर लोकसभा सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 की थी, लेकिन इसके बाद 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए परिसीमन पर रोक लगा दी गई। अमित शाह ने आरोप लगाया कि उस समय सत्ता बचाने के लिए यह कदम उठाया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उस दौर में भी देश की जनता को परिसीमन के लाभ से वंचित रखा और आज भी वही पार्टी इस प्रक्रिया को रोकने का प्रयास कर रही है।

गृह मंत्री ने जनसंख्या के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1976 में देश की आबादी लगभग 56.79 करोड़ थी, जबकि आज यह बढ़कर करीब 140 करोड़ हो चुकी है। इसके बावजूद सांसदों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी आबादी के लिए वही पुरानी प्रतिनिधित्व व्यवस्था उचित है?

जनगणना में देरी मुद्दे पर दिया जवाब

Delimitation Debate India : जनगणना में देरी के मुद्दे पर भी उन्होंने विस्तार से जवाब दिया। अमित शाह ने कहा कि 2021 में जनगणना प्रस्तावित थी, लेकिन उसी समय कोविड-19 महामारी ने देश और दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके कारण यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। महामारी के बाद देश को सामान्य स्थिति में आने में भी समय लगा।

उन्होंने बताया कि जब 2024 में जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए, तब विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों ने जाति आधारित जनगणना की मांग उठाई। सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न राज्यों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया और अंततः यह निर्णय लिया कि आगामी जनगणना जाति आधारित आंकड़ों के साथ कराई जाएगी।

सरकार अपने वादों को लेकर प्रतिबद्ध

Delimitation Debate India : गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने 2026 की जनगणना को जाति आधारित करने का औपचारिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जो निर्णय लिए गए हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन की राजनीति करने की कोशिश कर रहा है। अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि देश को उत्तर-दक्षिण के आधार पर बांटने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों का संसद पर उतना ही अधिकार है, जितना उत्तर भारत के राज्यों का है, और सभी को समान प्रतिनिधित्व और सम्मान मिलना चाहिए।

विपक्ष फैला रहा है भ्रम

Delimitation Debate India : इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार जाति जनगणना को टालने के लिए संविधान संशोधन लेकर आई है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही जाति जनगणना का पूरा कार्यक्रम घोषित कर चुकी है और अब यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। वर्तमान में इसका पहला चरण जारी है।

अमित शाह ने अपने संबोधन के अंत में यह भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शिता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही सभी निर्णय लिए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की राजनीति के कारण विकास की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

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