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Motihari Journalist Case : मोतिहारी में ‘थाना कांड’! पत्रकार को बंधक बनाने पर NHRC का बड़ा एक्शन

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Motihari Journalist Case: NHRC Orders Fresh Probe, Slams Bihar Police

Motihari Journalist Case : खबर लिखी… तो केस ठोक दिया! पत्रकार प्रकरण में उठे कई सवाल

संवाददाता, नयी दिल्ली, 9 अप्रैल। Motihari Journalist Case : बिहार के मोतिहारी में राष्ट्रीय पत्रकार ओम वर्मा को मुफ्फसील थाना में बंधक बनाकर प्रताड़ित करने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात की ओर से कराई गई जांच पर असंतोष जाहिर करते हुए आयोग ने बिहार के डीजीपी को नया आदेश जारी किया है। आयोग ने आदेश ​दिया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांचकर्ता मोतिहारी के बाहर के एसपी रैंक का अधिकारी होना चाहिए। जांच में पत्रकार ओम वर्मा और उनके सभी साक्ष्यों को शामिल किया जाना चाहिए। खबर प्रकाशित करने पर ओम वर्मा सहित तीन अन्य लोगों पर केस करने पर भी आयोग ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने कहा है कि खबर प्रकाशित करने पर क्रिमिनल प्रोसिडिंग शुरू करने का औचित्य समझ से परे है।

ज्ञात हो कि इस मामले में शिप्रा राजपूत के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दायर है, जिसमें कानूनी कार्रवाई चल रही है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में बिहार के गृह सचिव को शिप्रा राजपूत के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा है और ओम वर्मा को इस बारे में अवगत कराने को कहा है। वहीं, बिहार पुलिस की ओर से भी विभागीय जांच चल रही है। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

हर प्लेटफार्म पर की थी शिकायत

Motihari Journalist Case :  विदित हो कि ओम वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष 3 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत के खिलाफ शिकायत ​की थी। इस परिवाद को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वीकार करते पहले डायरी संख्या और फिर केस दर्ज करते हुए दिनांक 16 जून 2025 को पहली सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पूर्वी चंपारण जिले के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया।

तब आयोग ने लिया संज्ञान

Motihari Journalist Case :  आयोग ने 28.09.24 को तत्कालीन प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत के द्वारा परिवादी को मोतिहारी के मुफ्फसील थाना परिसर में बंधक बनाना, यंत्रणा और धमकी के मामले को संज्ञान में लिया। आयोग के द्वारा परिवादी की इस शिकायत का अंश भी टिप्पणी में शामिल है कि पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत ने रिश्वत की मांग की, परिवादी के परिवाद को नजरअंदाज किया। यंत्रणा के साथ बंधक बनाकर रखा और परिवादी के मौलिक और दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत के इस अवैधानिक और अमानवीय कृत्य के लिए कानूनी कारवाई की मांग परिवादी ओम वर्मा द्वारा की गई, जैसा आयोग के आदेश प्रति में अंकित किया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारी ने रिश्वत की मांग की, शिकायतों को नजरअंदाज किया और थाना परिसर में बंधक बनाकर रखा। शिकायतकर्ता ने अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की।

आयोग का नया आदेश

दिनांक 8 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के डीजीपी को सख्त आदेश जारी किया। आदेश में आयोग ने कहा है कि इस गंभीर मामले की जांच पूर्वी चंपारण के बाहर के एसपी रैंक के अधिकारी से कराई जाए। जांच में पत्रकार ओम वर्मा को शामिल किया जाए और उनके सभी साक्ष्य को शामिल किया जाए।

केस पर उठाए सवाल

Motihari Journalist Case :  खबर प्रकाशित करने के बाद मोतिहारी के साइबर थाने में ओम वर्मा सहित तीन अन्य नागरिकों पर केस दर्ज करने और क्रिमिनल प्रोसिडिंग शुरू करने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि ऐसा क्या मामला हो गया था कि खबर और वीडियो के प्रकाशन और प्रसारण पर उनके खिलाफ क्रिमिनल प्रोसि​डिंग शुरू कर दी गई।

पुलिस अधीक्षक की जांच से आयोग संतुष्ट नहीं

Motihari Journalist Case :  आयोग के निर्देश पर पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात की ओर से 13 सितंबर 2025 को एक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। पत्रकार ओम वर्मा ने 22 दिसंबर 2025 को अपनी प्रतिक्रिया में पुलिस की इस जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए अपने आरोप दोहराए। साथ ही कहा कि यह मामला थाना में बंधक बनाकर प्रताड़ित करने का है, जबकि एसपी स्वर्ण प्रभात की ओर से कराई गई जांच भूमि विवाद पर आधारित है।

मामले की समीक्षा करते हुए आयोग ने भी पुलिस जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाई हैं। आयोग ने कहा कि जांच में शिकायतकर्ता का बयान तक दर्ज नहीं है, जो कि एक बड़ी लापरवाही है। इस मामले में समाचार का प्रकाशन व प्रसारण और इसके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मोतिहारी के साइबर थाने में केस दर्ज करने का औचित्य समझ में नहीं आया। आयोग ने पत्रकार ओम वर्मा के खिलाफ क्रिमिनल प्रोसिडिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

यह दिया डीजीपी को निर्देश

Motihari Journalist Case :  इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच एसपी रैंक के अधिकारी से कराई जाए, जो जिले से बाहर का हो। यानी वह अधिकारी पूर्वी चंपारण का नहीं होना चाहिए। जांच अधिकारी को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने और सभी साक्ष्यों को जांच में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

जब रची गई थी थाना में हत्या की साजिश
Motihari Journalist Case: NHRC Orders Fresh Probe, Slams Bihar Police
shipra rajput, DSP

Motihari Journalist Case :  इस बारे में ओम वर्मा ने बताया कि 28 सितंबर 24 की वो रात मुझे बहुत अच्छे से याद है, जब ​मोतिहारी के मुफ्फसील थाना में मेरी हत्या की साजिश रची जा रही थी। मुझे दिन के 2 बजे से रात के 10 बजे तक थाना में बंधक बना कर रखा गया। प्रताड़ित किया गया। तत्कालीन प्रशिक्षु डीएसपी शिप्रा राजपूत ने मुझे पत्रकार होने के कारण गालियां दीं। कहा कि रात को लाकअप में रख कर मार डालेंगे और इसे सुसाइड का मामला बना देंगे। जैसे तैसे वह रात को छूटकर घर आए। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें दूसरे दिन मोतिहारी के सदर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

शिप्रा राजपूत की वजह से वह कई बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। उन्हें शिप्रा राजपूत की वजह से जान का खतरा बना हुआ है। ओम वर्मा ने दावा किया कि अपने पद का दुरुपयोग कर शिप्रा राजपूत मेरे दुश्मनों के साथ मिलकर मेरी हत्या करवा सकती हैं या मुझे जेल में डलवा सकती हैं। मैंने अपनी पत्नी, बच्चे और शुभचिंतकों को वह दुखद दिन सहने के लिए अभी से हिम्मत देना शुरू कर दिया है।

हर प्लेटफार्म पर की शिकायत

Motihari Journalist Case :  ओम वर्मा ने बताया कि जब मैंने हर प्लेटफार्म पर शिकायत की तो और समाचार का प्रसारण किया तो मुझे जेल में डालने के लिए शिप्रा राजपूत ने मोतिहारी के साइबर थाना में मेरे साथ—साथ तीन अन्य निर्दोष नागरिकों पर फर्जी आरोप लगाकर 14 नवंबर 2024 को एफआइआर कर दिया। इस मामले में शिप्रा राजपूत और मोतिहारी साइबर थाना ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का भी ख्याल नहीं रखा। बताते चलें कि इस केस में मोतिहारी सिविल कोर्ट ने ओम वर्मा को राहत दे दी है।

ओम वर्मा ने बताया कि मेरे उपर किया गया फर्जी केस शिप्रा राजपूत को उल्टा पड़ने वाला है। सभी सबूत मेरे पास उपलब्ध हैं। भारत के संविधान और कानून ने सभी को बराबर अधिकार दिए हैं। मुझे भारत सरकार, बिहार सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और न्यायालय पर पूरा भरोसा है। ओम वर्मा ने बताया कि इस मामले में वह एक वीडियो जारी करेंगे। मुझे यकीन है कि मोतिहारी सहित बिहार की जनता वैसा ही आशीर्वाद देगी जैसा पहले दिया था।

ओम वर्मा के साथ आई अधिवक्ताओं की भारी भरकम टीम

Motihari Journalist Case :  राष्ट्रीय पत्रकार ओम वर्मा की थाना में हत्या की साजिश और बंधक बनाने के ​मामले में मोतिहारी, पटना और दिल्ली में अधिवक्ताओं की भारी भरकम टीम खड़ी है। ये सभी ​अधिवक्ता बिना फीस के ओम वर्मा के साथ खड़े हो गए हैं। वकीलों का कहना है कि यह न्याय की लड़ाई है। इस सत्य और न्याय की लड़ाई में ओम वर्मा की ​जीत निश्चित है। उधर, नेशनल एडीटर्स एसोसिएशन भी ओम वर्मा के साथ खड़ा हो गया है।

कौन हैं पत्रकार ओम वर्मा?

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ज्ञात हो कि ओम वर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म और मास कॉम करने के बाद हरि भूमि, रोहतक से अपने अखबारी कॅरियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण दिल्ली—एनसीआर ज्वाइन किया। वहां उन्होंने 17 वर्षों तक चीफ सबएडीटर के रूप में सेवाएं दीं। इस बीच वह राष्ट्रीय खबरिया चैनलों में डिबेट में हिस्सा लेते रहे। कई चैनलों ने उन्हें अपने पैनल में शामिल किया था। दैनिक जागरण के बाद उन्होंने राष्ट्रीय समाचार पोर्टल इन्फोपोस्ट न्यूज को संपादक के रूप में ज्वाइन किया। इन्फोपोस्ट न्यूज के साथ साथ अब वह राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल नेशनल प्राइम न्यूज https://nationalprimenews.com/ को भी सेवाएं दे रहे हैं। वह पत्रकारों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाते रहे हैं। उनकी छवि बेदाग रही है। मोतिहारी उनका पैतृक घर है।

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