Hormuz Transit Resume : 40 दिन की जंग के बाद राहत—होर्मुज में भारत की रणनीति सफल
नई दिल्ली, 8 अप्रैल। Hormuz Transit Resume : पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद अब हालात में कुछ हद तक राहत देखने को मिल रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चली इस लंबी और तनावपूर्ण जंग पर फिलहाल अस्थायी विराम लग गया है। दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर राहत की संभावना है। हालांकि, हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे हैं। इस पूरे संघर्ष के दौरान जिस क्षेत्र ने सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, वह था स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
भारत के लिए रणनीतिक परीक्षा
Hormuz Transit Resume : युद्ध के इन 40 दिनों में जहां एक ओर दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर भारत के लिए यह समय एक बड़ी रणनीतिक परीक्षा जैसा रहा। भारतीय नौसेना ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए न केवल भारतीय फ्लैग्ड जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उन्हें सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह वही मार्ग है, जहां से भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आता है।
सुरक्षित आवागमन के लिए बातचीत जारी
Hormuz Transit Resume : सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद अब धीरे-धीरे समुद्री गतिविधियां सामान्य होने की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय झंडे वाले 5 से 6 जहाजों का पहला जत्था जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर सकता है। इन जहाजों के संचालन से जुड़े क्रू मेंबर्स और ईरान के संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ लगातार संवाद जारी है, ताकि सुरक्षित और सुचारु आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
नौसेना की क्षेत्र पर नजर
Hormuz Transit Resume : हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी तैनाती में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है। नौसेना पूरी सतर्कता के साथ पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की ढील बरतना उचित नहीं होगा। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह ही सख्त रखी गई है।

पुरानी प्रक्रिया रहेगी जारी
Hormuz Transit Resume : विशेष रूप से उल्लेखनीय बात यह है कि भारतीय नौसेना के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। युद्ध के दौरान जिस प्रकार नौसेना टैंकरों और अन्य जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही थी और उन्हें सुरक्षित मार्गदर्शन देते हुए होर्मुज पार करा रही थी, वही प्रक्रिया अब भी जारी रहेगी। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी संभावित खतरे से पहले ही निपटा जा सके।
जहाजों के लिए तैयार की जा रही रणनीति
Hormuz Transit Resume : युद्ध की शुरुआत में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी क्षेत्र में कुल 25 भारतीय फ्लैग्ड जहाज मौजूद थे। इनमें से अब तक 9 जहाजों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील क्षेत्र से बाहर निकाल लिया गया है। बाकी जहाजों के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।
इंडियन ओशन रीजन से हो रही निगरानी
Hormuz Transit Resume : भारतीय नौसेना इस पूरे क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी अत्याधुनिक तंत्र के माध्यम से कर रही है। गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) इस निगरानी का प्रमुख केंद्र है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री सुरक्षा केंद्र है, जिसका संचालन भारतीय नौसेना द्वारा किया जाता है। इस केंद्र के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि दुनिया के कई देशों के साथ रीयल-टाइम समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।
केंद्र में 14 अंतरराष्ट्रीय लियाजॉन अधिकारी
Hormuz Transit Resume : IFC-IOR से कुल 28 देशों के 76 लिंक जुड़े हुए हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों की समुद्री गतिविधियों की जानकारी साझा करते हैं। इस नेटवर्क के जरिए 24 घंटे, सातों दिन लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसमें समुद्री डकैती, ड्रोन हमले, संदिग्ध गतिविधियां, अवैध कारोबार, जहाजों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी और खतरों का विश्लेषण शामिल होता है। वर्तमान में इस केंद्र में 14 अंतरराष्ट्रीय लियाजॉन अधिकारी भी तैनात हैं, जो वैश्विक समन्वय को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसी बीच IFC-IOR द्वारा हाल ही में फारस की खाड़ी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी को लेकर 6 अप्रैल तक की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने से लेकर 6 अप्रैल तक इस पूरे समुद्री क्षेत्र में कुल 30 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 मामलों में जहाजों को सीधे निशाना बनाया गया।
कई खतरे सामने आए
Hormuz Transit Resume : इन हमलों में विभिन्न प्रकार के खतरे सामने आए, जिनमें 2 मिसाइल हमले, 3 ड्रोन हमले, 19 अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले, 1 वाटर-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (WBIED), 1 संदिग्ध गतिविधि और 4 अन्य घटनाएं शामिल थीं। इन घटनाओं के चलते कुल 10 लोगों की मौत भी हुई, जो इस पूरे क्षेत्र की गंभीर और अस्थिर स्थिति को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, भले ही फिलहाल सीजफायर के चलते स्थिति में कुछ सुधार हुआ हो, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में भारतीय नौसेना पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ अपने मिशन पर डटी हुई है, ताकि देश के ऊर्जा हितों और समुद्री सुरक्षा को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।







