US Russia Tanker : अटलांटिक से कैरेबियन तक : तेल टैंकरों की जब्ती का खेल
नई दिल्ली, 8 जनवरी। US Russia Tanker : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मारिनेरा’ पर जबरन कब्जा कर लिया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने अमेरिका को इस ऑपरेशन में सहयोग किया।
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद रूस भड़क गया है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ सकता है। वहीं, दूसरा टैंकर कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना के कब्जे में आया।
दो टैंकर, अलग-अलग ऑपरेशन
US Russia Tanker : दोनों टैंकरों पर अलग-अलग ऑपरेशन किए गए। अमेरिकी सेना ने पहले यह जानकारी दी थी कि वेनेजुएला से जुड़े बैन किए गए तेल टैंकर पर हफ्तों तक पीछा करने के बाद नॉर्थ अटलांटिक में कब्जा किया गया।
यूएस यूरोपियन कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा— “यूएससीजीसी मुनरो द्वारा ट्रैक किए जाने के बाद अमेरिकी फेडरल कोर्ट द्वारा जारी वारंट के अनुसार जहाज को नॉर्थ अटलांटिक में जब्त किया गया।”
रूस की प्रतिक्रिया और सबमरीन तैनाती
US Russia Tanker : अमेरिकी मीडिया के अनुसार रूस ने खाली तेल टैंकर को एस्कॉर्ट करने के लिए सबमरीन भेजी थी। अमेरिका हफ्तों से टैंकर पर नजर रख रहा था।
यह टैंकर पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था। अमेरिका पिछले महीने से ही इसे ट्रैक कर रहा था, लेकिन पहले यह अमेरिकी नाकाबंदी से बच निकला था। हफ्तों के पीछा और प्रयासों के बाद आखिरकार अमेरिका ने इस टैंकर पर कब्जा कर लिया।
कैरेबियन सागर में दूसरा टैंकर
US Russia Tanker : अमेरिका के साउथ कमांड ने कैरेबियन सागर में एक और बैन टैंकर एम/टी सोफिया को जब्त करने की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह टैंकर पानी में चल रहा था और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल था। इस ऑपरेशन में किसी प्रकार की हिंसा या घटनाएं नहीं हुईं।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर असर
US Russia Tanker : इस कार्रवाई से अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ गया है। वहीं, वेनेजुएला पर दबाव और बढ़ा। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, पुराने और जंग लगे बेला-1 पर 2024 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था क्योंकि यह गैरकानूनी ईरानी तेल ले जाने वाले टैंकरों के शैडो फ्लीट में काम कर रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कार्रवाई और वैश्विक तेल आपूर्ति सुरक्षा के मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ा सकती है।







