नई दिल्ली, 5 दिसंबर। Shani Vrat : ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार शनिदेव को कर्मफलदाता कहा गया है। व्यक्ति के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, कष्ट, बाधाएं, देरी और अशुभ परिणामों के पीछे शनि की अवस्था को एक प्रमुख कारण माना जाता है। पौष माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि शनिवार को पड़ रही है। इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। भले ही इस दिन कोई बड़ा पर्व न हो, लेकिन शनिवार होने के कारण इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से करने वाले उपाय शनि के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम कर देते हैं।
मुहूर्त और राहुकाल का समय
Shani Vrat : द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। वहीं राहुकाल का समय सुबह 9:36 बजे से 10:54 बजे के बीच रहेगा। यदि शनिदेव की पूजा करनी हो, तो राहुकाल के समय से बचना शुभ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त में पूजा और दान का विशेष महत्व होता है।
7 शनिवार का व्रत और उसका लाभ
Shani Vrat : धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से व्रत प्रारंभ करता है और लगातार 7 शनिवार तक उपवास रखकर शनिदेव की पूजा करता है, उसे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ योगों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत से जीवन में आ रही रुकावटें, आर्थिक परेशानियां, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह में कमी आने लगती है। साथ ही धन, नौकरी, व्यवसाय और स्वास्थ्य में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है।
पीपल का वृक्ष और शनिदेव का संबंध
Shani Vrat : मान्यता है कि शनिदेव का वास पीपल के वृक्ष में होता है। यदि आपके घर या आसपास शनिदेव का मंदिर न हो तो आप पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाकर पूजा कर सकते हैं। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन में फैली नकारात्मकता कम होती है। जो लोग किसी कारणवश व्रत नहीं रख सकते, उनके लिए हर शनिवार सरसों के तेल का दान करना या दीया जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है।
शनिदेव को प्रसन्न करने की विधि
Shani Vrat : शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल या मंदिर की सफाई करें। शनिदेव की प्रतिमा को शुद्ध जल से स्नान कराएं और उन्हें काले तिल, काले वस्त्र, काली उड़द की दाल, गुड़ और सरसों का तेल अर्पित करें। प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि चालीसा तथा शनि कथा का पाठ करें। इसके बाद उन्हें पूरी और काली उड़द दाल की खिचड़ी का भोग लगाकर आरती करें।
एक विशेष सावधानी भी बताई गई है कि शनिदेव की पूजा करते समय उनकी सीधी आंखों में नजर न मिलाएं, क्योंकि ऐसा करना अशुभ माना गया है। हमेशा शीश झुकाकर और श्रद्धा भाव से उनकी आराधना करें।
होगी शनि देव की कृपा
शनि का प्रकोप व्यक्ति के जीवन को कष्टों से भर सकता है, वहीं शनिदेव की कृपा जीवन में स्थिरता, न्याय और सफलता प्रदान करती है। यदि नियमित रूप से 7 शनिवार व्रत, दान और पूजा की जाए, तो न केवल नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। शनिदेव की आराधना आस्था, संयम और निष्ठा से करने पर जीवन की कई बड़ी समस्याएं स्वतः ही हल होने लगती हैं।







