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Sangh centenary : विजयादशमी उत्सव और संघ के सौ वर्षों की यात्रा, राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के लिए दृढ़संकल्प

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Sangh Marks 100 Years with Vijayadashami Celebrations & Resolve for Harmony

नयी दिल्ली, 2 अक्टूबर। Sangh centenary : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर विजयादशमी उत्सव का आयोजन बस्ती सह किया गया है। यह आयोजन संघ के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इसके स्थापना के बाद से ही राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के लिए काम कर रहा है।

विजयादशमी उत्सव का महत्व

Sangh centenary :विजयादशमी के दिन भगवान श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी, जो बुराई और अधर्म का प्रतीक था। यह विजय न केवल भगवान श्री राम की व्यक्तिगत जीत थी, बल्कि यह सत्य और धर्म की जीत का भी प्रतीक है। यह उत्सव हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

संघ के लिए विशेष महत्व

इसके साथ साथ विजयादशमी का उत्सव संघ के लिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह संघ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। संघ ने अपनी यात्रा आज के ही दिन 1925 से आरंभ की और संघ ने अपने स्थापना के बाद से ही राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के लिए काम कर रहा है और विजयादशमी का उत्सव हमें इस कार्य में और अधिक प्रेरित करता है।

संघ के सौ वर्षों की यात्रा

Sangh centenary :संघ ने अपने सौ वर्षों की यात्रा में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्य के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है।

कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
विजयादशमी उत्सव का आयोजन: संघ के सौवें वर्ष के अवसर पर विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें शस्त्र पूजन का भी विशेष महत्व था।
राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता: संघ के स्वयंसेवक और समर्थक राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराएंगे।
संघ के कार्यों का प्रदर्शन: संघ के विभिन्न कार्यों का प्रदर्शन किया गया, जो समाज के विभिन्न वर्गों के लिए किए जा रहे हैं।
पंच परिवर्तन पर विशेष चर्चा: आज के सभी कार्यक्रमों में मुख्य वक्ताओं ने पंच परिवर्तन पर विशेष उद्बोधन दिया और बताया कि संघ क्यों इसको एक महत्वपूर्ण कार्य मानता है और इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहा है।
प्रदर्शनी का आयोजन

सभी बस्तियों ने अपने कार्यक्रमों में एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया, जिसमें मुख्य रूप से विशिष्ट स्वयंसेवकों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के जीवन के बारे में चर्चा की गई और उनसे संघ के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही साथ संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के संघ के प्रति समर्पण और उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।

पंच परिवर्तन के पाँच लक्ष्य

पंच परिवर्तन के माध्यम से संघ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहा है। इसके पाँच प्रमुख लक्ष्य हैं:

पर्यावरण संरक्षण: पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाना और लोगों को इसके प्रति प्रेरित करना।
सामाजिक समरसता: समाज में समरसता और एकता को बढ़ावा देना और सामाजिक भेदभाव को दूर करना।
आत्मनिर्भरता: समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना।
पारिवारिक मूल्य: पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना और परिवार को मजबूत बनाने के लिए कार्य करना।
नागरिक उत्तरदायित्व: नागरिकों में सामाजिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना जगाना और उन्हें इसके प्रति प्रेरित करना।
कार्यक्रम के विवरण

Sangh centenary :दिल्ली और गाजियाबाद वैशाली महानगर के तिहत्तर बस्तियों में एकत्रीकरण रहा और इसमें से सत्तर बस्तियों में पथ संचलन का कार्यक्रम भी घोष के साथ संपन्न हुआ। सभी बस्तियों ने अपना सौ से अधिक स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण पथ संचलन का लक्ष्य लेकर यह कार्यक्रम संपन्न किया। स्वयंसेवकों ने पथ संचलन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और बस्तियों में निवासियों ने फूल बरसा कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।

हम आपको इस ऐतिहासिक अवसर पर विजयादशमी पर हार्दिक शुभकामनाएँ देते हैं और आपके साथ मिलकर राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के लिए तत्पर हैं।

ohm verma
Author: ohm verma

Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.

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