प्रसाद रत्नेश्वर। poem :
हर वह व्यक्ति-
जिसे याद है
अपना देश/तिरंगा/जन-मन-गण का जयगान
अब वह डराया नहीं जायेगा
हर वह व्यक्ति-
जो नहीं है हत्यारा
जिसने नहीं फोड़ा है बम
नहीं डाला है डाका
नहीं लूटी है किसी की अस्मत
अब वह मारा नहीं जायेगा
हर वह व्यक्ति-
जिसने किया है
ज़िंदगी को प्यार
अपनी ज़िंदगी से दी है
साँसें उधार
अब वह सताया नहीं जायेगा
लोग जुट रहे हैं
ले रही है स्वतंत्रता अंगड़ाई
समय बदल रहा है!







