पटना, 30 जुलाई। Bihar : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स से आशा और ममता कार्यकर्ताओं को बड़ी सौगात दी है। बिहार सरकार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं को सौगात देते हुए उनकी प्रोत्साहन राशि तीन गुनी बढ़ा दी है। वहीं ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव मिलने वाली राशि को भी दोगुना कर दिया है। उन्होंने एक बार फिर यह साबित किया है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता में जनस्वास्थ्य सेवाएं हैं। जिसमें अहम भूमिका निभाने वाली महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा।
नवम्बर 2005 में सरकार बनने के बाद से हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में आशा तथा ममता कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे ध्यान में रखते हुए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) July 30, 2025
इतना हो गया आशा और ममता कार्यकर्ताओं का मानदेय
मुख्यमंंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के बाद से आशा कार्यकर्ताओं को प्रति माह 1,000 रुपये की जगह 3,000 रुपये दिए जाएंगे। ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 के बजाय अब 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस फैसले को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम बताया है।
मुख्यमंत्री ने खुद दी सुखद जानकारी
नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सुखद जानकारी साझा करते हुए लिखा —
“नवंबर 2005 से हमने स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। आशा और ममता कार्यकर्ताओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। उनकी मेहनत और योगदान के सम्मान में यह निर्णय लिया गया है। मानदेय बढ़ने से उनका मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी।”
क्यों खास है यह फैसला?
तीन गुना बढ़ा आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय
₹1,000 → ₹3,000 प्रति माह
दोगुना हुआ ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव प्रोत्साहन
₹300 → ₹600 प्रति डिलीवरी
10,000 से अधिक गांवों में कार्यरत हैं आशा और ममता कार्यकर्ता, जिनके जरिए गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण और सुरक्षित प्रसव जैसी सेवाएं घर-घर तक पहुंचाई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की असली नायिकाएं
बताते चलें कि ग्रामीण इलाकों में आशा और ममता कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं को ज़मीन पर उतारने वाली सबसे मजबूत कड़ी हैं। चाहे गर्भवती महिलाओं की देखरेख हो या नवजात शिशुओं का टीकाकरण, इन महिलाओं की मेहनत और समर्पण ही है, जो सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं संभव बनाता है। सरकार की यह पहल सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं, बल्कि एक मानवीय और प्रेरक संदेश भी है। ये जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले कर्मियों का सम्मान भी है।
स्वास्थ्य सेवा से हर घर तक पहुंच
स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पांडेय के मुताबिक, “यह फैसला एक प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। आशा और ममता कार्यकर्ताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उनकी कार्यशक्ति को दोगुना किया जा रहा है।” इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि गर्भवती महिलाओं, नवजातों और गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.







