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Seminar: मोतिहारी में सत्यानंद योग एवं आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ने योग पर की संगोष्ठी, देखें वीडियो

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संवाददाता, मोतिहारी। Seminar : ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर बाहरी स्वास्थ्य जैसे शारीरिक फिटनेस और सौंदर्य पर अधिक जोर दिया जा रहा है, लेकिन योग का असली मतलब अंदर की शांति से है। कृत्रिम रूप से शरीर को सुंदर बनाने की चेष्टा के बजाय योग के माध्यम से संपूर्ण शरीर को स्वस्थ बनाया जा सकता है।

रविवार को मोतिहारी में योग की महत्ता पर चर्चा करने के लिए बड़े—बड़े योगाचार्य, चिकित्सक और गण्यमान्य लोग जुटे। सत्यानंद योग एवं आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में “समयोग” कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सत्र के आरंभ में आमंत्रित अतिथियों को मंचासीन किया गया और तत्पश्चात दीप प्रज्ज्वलन कर धन्वंतरि पूजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्व के डीन (जंतु विज्ञान) ने कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन करते हुए आधुनिक परिवेश में योग की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला और अत्यंत ओज पूर्ण उद्बोधन दिया।

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कार्यक्रम दो खंडों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में आमंत्रित वक्ताओं ने विविध चिकित्सा पद्धति से संबंधित वक्ताओं ने अपने-अपने पद्धतियों को योग से जोड़कर उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

एलोपैथ में भी योग का महत्व

इसमें पटना से पधारे आयुर्वेद कालेज पटना, बेगूसराय एवं दरभंगा के पूर्व प्राचार्य डा० दिनेश्वर प्रसाद ने योग और आयुर्वेद की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डा० अतुल कुमार ने एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में योग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में योग की उपादेयता होनी चाहिए,यही समय की मांग है।

होमियोपैथ में योग

होमियोपैथिक चिकित्सा के प्रसिद्ध चिकित्सक डा० राजेश श्रीवास्तव ने भी होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति में योग को समावेश करने पर बल दिया। उन्होंने इन्टीग्रेटेड पद्धति को योग से जोड़कर एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना की।

Seminar : एलर्जी के विशेषज्ञ डा० विवेक कुमार ने संपूर्ण श्वसन प्रणाली को योग से जोड़ते हुए चिकित्सा में प्रयुक्त विविध संसाधन को अध्यात्म और योग से जोड़कर विस्तृत जानकारी प्रदान किया।

शहर के विख्यात फिजियोथैरेपिस्ट डा० अमरेश महर्षि ने फिजियोथैरेपी को योग से जोड़कर कहा कि इसमें जितने भी एक्सरसाइज कराए जाते हैं वो सभी कहीं ना कहीं से योग से ही जुड़े हुए हैं।

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दूसरा सत्र

Seminar : दूसरे सत्र का आरंभ संस्थान के निदेशक डा० ब्रजेश्वर मिश्र ने योग में षट्कर्म के महत्व को समझाते हुए कहा कि षट्कर्मों में नेति,नौलि,धौति, बस्ति, कपालभांति और त्राटक का योग में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बाद निवेदिता झा ने योग से गृहणियों को जोड़ कर स्वास्थ्य लाभ कराने पर बल दिया इसके बाद निम्नलिखित वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों को योग से जोड़कर अतिमहत्वपूर्ण विचार व्यक्त कि।

इन वक्ताओं ने भी योग का महत्व बताया

कार्यक्रम में डा० आलोक कुमार ( ए० आई० असिस्टेंट), डा० नरेन्द्र कुमार ( आयुर्वेद और योग), डा० अनिल कुमार सिंह ( उन्माद रोग में योग की भूमिका), डा० उत्तम कुमार ( शल्यकर्म और योग), डा० नेहा ( रज: कृच्छ्र रोग और योग), नीतू सिंह ( योग और नाड़ियों के संयोग), सुधांशु भारद्वाज ( आध्यात्म और योग का समन्वय) ने योग की महत्ता पर प्रकाश डाला।

इन लोगों ने भी की कार्यक्रम में शिरकत

Seminar : कार्यक्रम में कई गण्यमान्य लोगों ने शिरकत की, जिनमें रोटरी मोतिहारी लेक टाउन के देवप्रिय मुखर्जी, अधिवक्ता राकेश कुमार सिन्हा, सी० ए० अरूण कुमार, डा० संजय कुमार सिंह प्रमुख थे। संस्थान के छात्र छात्राओं में डा० पंकज कुमार, डा० राहुल कुमार, प्रकाश कुमार, प्रशांत कुमार, संजय कुमार, सतीश कुमार शर्मा, सलोनी कुमारी, साक्षी कुमारी, मासूम परवीन, संगीता कुमारी आदि प्रमुख थे। मंच का संचालन डा० अनिल कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

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