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Bihar : राजनीति के पिच पर पार्टी को सरपट दौड़ाने के लिए लालू प्रसाद ने उठाया यह कदम

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ओम वर्मा, नयी दिल्ली। Bihar : लालू यादव ने जैसे ही अपने बड़े पुत्र तेज प्रताप को राष्ट्रीय जनता दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की घोषणा की, बिहार का सियासी पारा हाई हो गया। इस मामले को लेकर राजनीतिक विरोधियों ने लालू प्रसाद को घेरना शुरू कर दिया। बताया गया है कई वर्षों से अनुष्का यादव से संबंध होने के बाद भी तेज प्रताप ने 2018 में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री दारोगा राय की पोती ऐश्वर्या से शादी की। जिसमें तेजप्रताप का तलाक हो गया।

अभी तलाक का केस चल रहा है। अब राजनीतिक गलिययारे में यह चर्चा छिड़ गई है कि लालू प्रसाद ने यह कदम क्यों उठाया।

लालू प्रसाद के परिवार में सबकुछ ठीक चल रहा है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। लालू प्रसाद का लंबा चौड़ा परिवार है। उनका कुनबा बड़ा है। ऐसे में परिवार के सदस्यों में राजनीतिक महत्वकांक्षाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता।

परिवार के कई सदस्य राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।  तेजस्वी यादव तो खुल कर लालू प्रसाद की विरासत को आगे बढ़ रहे हैं।

इसकी है प्रबल संभावना

Bihar : ऐसे में परिवार के सदस्यों का बहुमत एक तरफ होने की वजह से परिवार के एक सदस्य को दरकिनार किए जाने जाने की संभावना प्रबल हो जाती है। ऐसा लगता है कि परिवार के अन्य सदस्यों ने एकमत होकर तेजप्रताप यादव को ‘किनारे’ लगाने का ‘चक्रव्यूह’ रचा हो।

तेज प्रताप को पहले संकेत दिया गया हो कि राजद की राजनीतिक विरासत ‘इन लोगों’ के हाथों में होगी। इससे इन्कार करने पर तेज प्रताप को ‘दरकिनार’ किए जाने का प्लान तैयार किया गया होगा। और फिर तलाश की जा रही होगी तेजप्रताप की एक गलती, जिसमें उन्हें ‘दोषी’ ठहरा कर राजनीतिक रूप से ‘ठिकाने’ लगाया जा सके।

बिहार में इस वर्ष विधानसभा का चुनाव है। बिहार का राजनीतिक समीकरण ऐसा है कि जब दो पार्टियों का गठजोड़ हो जाता है तो उनकी सरकार बन जाती है। भाजपा की बहुत पुरानी दोस्ती जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू से है। जदयू की कई बार भाजपा से दोस्ती टूटी तो नीतीश कुमार, लालू प्रसाद के पास गए और मिलकर बिहार में सरकार बनाई। लेकिन अब नीतीश कुमार, भाजपा के साथ हैं। कह रहे हैं कि भाजपा और जदयू की दोस्ती अटूट है।

अपने बल पर बढ़ रहा राजद

इन हालात में राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद अपने बल पर सरकार बनाने के लिए प्रयासरत है। राजद वह राजनीतिक जमीन तलाश रही है, जिसे उसकी जरूरत है। वह जनता में ​फिर से विश्वास पैदा करना चाहती है। बीच के कुछ वर्ष छोड़ दें तो वह 20 वर्षों से सत्ता से दूर है।

राजद के खाते में ‘जंगलराज’ का दाग है। इस दाग को वह मिटा कर सत्ता में वापसी के लिए आतुर है। राजद के लिए यह वर्ष महत्वपूर्ण है। बिहार में कई मुद्दे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा अफसरशाही का है।

अफसरशाही का मुद्दा

Bihar : जिस अफसरशाही को तोड़कर लालू प्रसाद ने सत्ता हासिल की थी और जनता में सरकार के प्रति विश्वास जगाया था, आज वही अफसरशाही पूरे बिहार में हावी है। ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के हाथ से कमान खिसक चुकी है।

राज्य के प्रशासनिक अधिकारी ‘अपनी’ चला रहे हैं। वहीं, पुलिस भी अपनी ‘मनमानी’ कर रही है। यूं कहें कि बिहार एक ‘पुलिस स्टेट’ के रूप में चल रहा है तो अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए। राजनीतिक दल और उनके कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक अधिकारी कुछ नहीं समझ रहे हैं।

हालात को बखूबी समझ रहा राजद

Bihar : सत्ता, जनता के हाथ में न होकर प्रशासन के हाथ में जा चुकी है। आज बिहार में यह सबसे बड़ा मुद्दा है। बिहार के इस हालात को राजद बखूबी समझ रहा है। उसे इस बात का कहीं न कहीं दर्द भी है कि लोकतांत्रित व्यवस्था में सत्ता राजनीतिक दल के पास होनी चाहिए न कि पुलिस प्रशासन के पास। इन हालातों में राजद एक मौका देख रहा है।

परिस्थति राजद के अनुकूल

पस्थितियां राजद के अनुकूल हैं। राजद के राजनीतिक पंडित ‘हवा के रुख’ को भांप रहे हैं। उनकी टीम बिहार के अलग अलग इलाकों में लोगों की राय जान रही है। लोग यही राय दे रहे हैं कि वे परेशान हैं। पुलिस कब किसको अंदर कर दे, पता नहीं।

Bihar :  घूस नहीं दिया तो कब क्या हो जाए, पता नहीं। यही वजह है कि लोग लालू प्रसाद के शासन को याद कर रहे हैं, जिसमें सत्ता सरकार के पास होती थी। अफसरशाही को कभी लालू प्रसाद ने हावी नहीं होने दिया। राजद को इन हालातों की बखूबी समझ है।

जब सोशल मीडिया पर तेजप्रताप की अनुष्का के साथ तस्वीर वाली पोस्ट वायरल हुई तो राजद को भारी नुकसान की आशंका हुई। इस नुकसान की भरपाई करने के लिए ही दूरदर्शी लालू प्रसाद यादव ने बड़ा कदम उठाया।

भले ही यह कदम दिखावे में उठाया गया हो लेकिन इसका संदेश स्पष्ट है। राजद नहीं चाहती कि इस साल बिहार चुनाव में उसे कोई नुकसान हो। बना बनाया काम बिगड़ने लगे। जो भी हो लालू प्रसाद ने राजनीतिक नुकसान को बचा लिया है।

आइए जानते हैं कि लालू प्रसाद के निर्णय पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने क्या कहा।

राजनीतिक विरासत को लेकर परिवार में गहरा मतभेद चल रहा है। तेजस्वी अलग हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग हैं। इस वजह से भी तेज प्रताप को निकाला गया है। —के.सी. त्यागी, जदयू

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biharलालू प्रसाद और उनका परिवार अच्छे से जानता था तेज प्रताप यादव, अनुष्का यादव के साथ पिछले कई वर्षों से रह रहे हैं और उसी से शादी करना चाहते हैं। इसके बावजूद यादव समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए दरोगा प्रसाद राय की पोती के साथ जबरदस्ती अपने बेटे की शादी कर दी। अभी एश्वर्या राय के साथ उनका तलाक का केस चल रहा है। इस मामले में अब लालू यादव और राबड़ी देवी दोनों को जेल जाना पड़ेगा। — संजय जायसवाल, भाजपा सांसद

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biharयह लालू प्रसाद यादव का पारिवारिक मामला है। इस पर राजनीतिक टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। वहां पार्टी ही परिवार है, परिवार ही पार्टी है। कौन रहेगा, जाएगा, यह पार्टी तय नहीं करती है बल्कि परिवार ही तय करता है। तेज प्रताप यादव जो कार्टून वाली हरकतें करते हैं, उसमें लालू यादव का श्रेय रहा है। तेज प्रताप की हर गतिविधि की जानकारी लालू यादव को रही है। उनकी शादी और फिर तलाक लालू यादव के इशारे पर हुई। उन्हें पार्टी से निकालना ध्यान भटकाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है। —अजय आलोक, भाजपा प्रवक्ता
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biharफिलहाल इस मामले के बारे में ज्यादा नहीं सुना है। उस परिवार से मेरा घरेलू संबंध है। आज जो घटना हुई है, वह चौंकाने वाली है। मैं इस पर फिलहाल कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं।— शत्रुघ्न सिन्हा, अभिनेता और टीएमसी सांसद

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