नई दिल्ली। Operation Sindoor : जी हां, यह नया भारत है। घर में घुसकर मारता है और ऐसी मारता है कि वर्षों तक दुश्मन को दर्द का अहसास होता है। डरना चाहिए, भारत के दुश्मनों को, जिन्होंने पहलगाम में 26 पर्यटकों का नृशंस हत्या कर दी। अब ‘उन्हें’ जवाब मिल रहा है।
आपरेशन सिंदूर के तहत जब भारत की वीर वायुसेना ने पाकिस्तान के घर में घुस कर वार किया और सौ आतंकवादियों को जहन्नुम पहुंचा दिया, तब पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करना शुरू किया। लेकिन भारत की अभेद्य सुरक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के सभी हमलों को विफल कर दिया। दुनिया देख कर पाकिस्तान पर हंस रही थी। दुनिया कह रही थी कि यह तो फुस्स हो गया। भारत की रक्षा प्रणाली का अंदाजा इसी से लगाइए कि पाकिस्तान का एक भी मिसाइल टारगेट तक नहीं पहुंचा। सारे ड्रोन भी हवा में ही मार दिए गए।
भारत के वायु रक्षा प्रणालियों में सुधार का श्रेय नरेंद्र मोदी सरकार को जाता है, जिसने घटते युद्ध भंडार को समाप्त करके और बेड़े में नए, विश्व स्तरीय शस्त्रागार को शामिल करके सुरक्षा तंत्र को नया रूप देने पर जोर बनाए रखा।
भाजपा सरकार में आए एस-400 और राफेल
रूसी एस-400 मिसाइल सिस्टम और राफेल जेट पाकिस्तान के हवाई हमले को नाकाम करने में भारत के लिए काफी अहम साबित हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि रूसी एस-400 मिसाइल सिस्टम और राफेल जेट एनडीए सरकार के तहत भारत की रक्षा प्रणाली का हिस्सा बने।
सशस्त्र बलों ने जो तीव्र, समन्वित प्रतिक्रिया दिखाई, वह उनकी वायु रक्षा प्रणालियों के कारण थी, जिसे मोदी सरकार के तहत पिछले 11 वर्षों में कड़ी मेहनत से बनाया गया था।
यह है सुरक्षा कवच
मानवरहित हवाई प्रणाली (यूएएस) ग्रिड, ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम, बराक-8 मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और डीआरडीओ की ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियों ने मिलकर एक हवाई कवच तैयार किया, जिसने भारत में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले के पाकिस्तान के सभी प्रयासों को विफल कर दिया।
जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया तो भारतीय सेना ने लाहौर में चीन से सप्लाई की गई एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया और प्रमुख रडार इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया।
दरअसल, 2014 से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने व्यवस्थित रूप से भारत की वायु रक्षा प्रणालियों को उन्नत किया और महत्वपूर्ण रक्षा अधिग्रहण किए हैं। 2018 में पांच एस-400 ट्रायम्फ स्क्वाड्रन के लिए 35,000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था। तीन स्क्वाड्रन अब चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात हैं।
बराक-8 मीडियम-रेंज
2017 में भारत को इजरायल के साथ 2.5 बिलियन डॉलर के सौदे के तहत बराक-8 मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (एमआर-एसएएम) मिली थी। वे अब बठिंडा जैसे फ्रंटलाइन ठिकानों की रखवाली कर रहे हैं।
आकाश मिसाइल
स्वदेशी आकाश मिसाइल बैटरियों और डीआरडीओ द्वारा विकसित काउंटर-ड्रोन सिस्टम को शामिल करने से अधिक गोला-बारूद मिला। वहीं, 2024 में सेना द्वारा शत्रुतापूर्ण यूएवी को जाम करने और निष्क्रिय करने के लिए मैन पोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम (एमपीसीडीएस) स्थापित किए गए थे।
आत्मघाती ड्रोन
2021 में आत्मघाती ड्रोन का ऑर्डर दिया गया था और अब इनका निर्माण भारत में किया जा रहा है। इन ड्रोन ने विभिन्न सेक्टरों में एक साथ, सटीक हमले किए, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा पूरी तरह से फेल हो गई।
हारोप ड्रोन
इसके अतिरिक्त इजरायली मूल के हारोप ड्रोन, जो अब स्थानीय रूप से निर्मित हैं, जिसे कराची और लाहौर में वायु रक्षा परिसंपत्तियों को निशाना बनाने और नष्ट करने के लिए तैनात किया गया था।
स्कैल्प और हैमर मिसाइल
इन प्लेटफार्मों ने स्कैल्प और हैमर मिसाइलों से लैस राफेल लड़ाकू जेट की रणनीतिक तैनाती ने साथ मिलकर सर्जिकल परिशुद्धता के साथ शक्ति प्रक्षेपण की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत न केवल अपने आसमान की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि अब वह उन पर नियंत्रण भी रखता है। -आइएएनएस







