लखनऊ, 27 सितंबर। Ram Temple Movement
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के विरोधियों पर निशाना साधते हुए बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रामकाज में कालनेमि जैसे लोग भी प्रवेश करने का प्रयास करेंगे और ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी साजिशों को सफल होने से रोकना होगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जो लोग कभी श्रीराम मंदिर आंदोलन का विरोध करते थे और रामभक्तों पर गोली चलाने वाली सरकारों के साथ खड़े थे, वे आज स्वयं को रामभक्त के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अशोक सिंघल के जीवन, उनके संघर्ष, सामाजिक कार्यों और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि रामकाज से जुड़े लोगों को यह समझना होगा कि किसी भी बड़े सामाजिक या धार्मिक अभियान के दौरान ऐसे तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जो भीतर से जुड़कर उसके उद्देश्य को नुकसान पहुंचाने या उसे बदनाम करने का प्रयास करें। उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने और उनके प्रयासों को विफल करने की जरूरत बताई।
500 वर्षों के संघर्ष का किया उल्लेख
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री योगी ने श्रीराम जन्मभूमि के इतिहास और मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़े जाने के बाद हिंदू समाज ने लगभग पांच शताब्दियों तक उसकी मुक्ति के लिए संघर्ष किया। उनके अनुसार, इस लंबे संघर्ष में संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं और महिलाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों ने योगदान दिया और अनेक लोगों ने बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि समाज के भीतर सामर्थ्य और संघर्ष की भावना मौजूद थी, लेकिन उसकी शक्ति अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई थी। अशोक सिंघल ने इस बिखरी हुई शक्ति को एक मंच पर लाने और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक सामाजिक अभियान का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, वर्ष 1982 में विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व संभालने और वर्ष 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद अशोक सिंघल ने रामकाज को अपने जीवन का प्रमुख ध्येय बना लिया था। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लेकर विदेश तक, वनवासी क्षेत्रों से लेकर दलित और वंचित बस्तियों तक अशोक सिंघल के कार्यों में श्रीराम का नाम और समाज को जोड़ने का प्रयास दिखाई देता था।
उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति “राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम” का उल्लेख करते हुए कहा कि अशोक सिंघल ने इस भावना को अपने जीवन में उतारकर दिखाया।
राम मंदिर आंदोलन के साथ सामाजिक एकता पर भी जोर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अशोक सिंघल का कार्य केवल श्रीराम मंदिर निर्माण के आंदोलन तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया।
उन्होंने कहा कि वनवासी क्षेत्रों और मलिन बस्तियों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में अशोक सिंघल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूर्वोत्तर भारत के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि गोरखनाथ मंदिर स्थित विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय के एक कमरे से भी पूर्वोत्तर के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था शुरू कराने का प्रयास हुआ था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि अशोक सिंघल के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण केवल भाषणों तक सीमित विषय नहीं था, बल्कि उन्होंने इसे जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
1990 के अयोध्या आंदोलन को किया याद
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री ने वर्ष 1990 के अयोध्या आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में रामभक्तों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई थी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अशोक सिंघल सत्ता के सामने नहीं झुके।
उन्होंने 2 नवंबर 1990 की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि लाठीचार्ज और गोलीबारी के बीच भी अशोक सिंघल की आवाज आंदोलनकारियों के बीच सुनाई देती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या में निर्मित भव्य श्रीराम मंदिर को अशोक सिंघल और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के लंबे संघर्ष के साकार स्वरूप के रूप में देखा जा सकता है।
न्यायालय में मामले के दौरान प्रमाण जुटाने का दावा
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि का मामला न्यायालय तक पहुंचा, तब एक ओर अशोक सिंघल के नेतृत्व में अधिवक्ताओं, पुरातत्वविदों और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की टीम ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक प्रमाण जुटाने में लगी थी। दूसरी ओर, उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों पर मंदिर के पक्ष में फैसला न आने देने के लिए बाधाएं खड़ी करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व को लेकर न्यायालय में सवाल उठाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर आमंत्रण मिलने के बावजूद कुछ लोग कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए।
योगी आदित्यनाथ ने इसके पीछे राजनीतिक कारण होने का आरोप लगाया और कहा कि अशोक सिंघल द्वारा 1980 के दशक में प्रज्ज्वलित की गई ज्योति केवल श्रीराम जन्मभूमि तक सीमित नहीं थी। उनके अनुसार, यह अभियान देश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मानबिंदुओं की पुनर्प्रतिष्ठा तथा गुलामी के प्रतीकों को समाप्त करने की व्यापक सोच से जुड़ा था।
महंत अवेद्यनाथ के साथ बैठकों का किया स्मरण
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री योगी ने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और अशोक सिंघल के बीच श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर होने वाली बैठकों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच मंदिर की रूपरेखा, आंदोलन की रणनीति और भविष्य की अयोध्या को लेकर लगातार विचार-विमर्श होता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने जो कहा, उसे करके दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की वाणी तभी प्रभावशाली बनती है, जब उसके कथन और आचरण के बीच अंतर न हो।
उन्होंने अशोक सिंघल के जीवन को संघर्ष, संगठन और संकल्प का उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और सामाजिक जागरण के लिए समर्पित किया।
बदली हुई अयोध्या का किया उल्लेख
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी उपेक्षित मानी जाने वाली अयोध्या में आज राम पथ, धर्म पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ जैसे मार्ग विकसित किए गए हैं।
उन्होंने राम की पैड़ी और सरयू नदी का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहां सरयू का अविरल और निर्मल प्रवाह दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है और अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में हो रहे बदलाव केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
गोरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों का जिक्र
Ram Temple Movement : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में गोरक्षा का विषय भी उठाया। उन्होंने कहा कि गोरक्षा केवल भाषण देने या सड़क पर आंदोलन करने का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यवहार और जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की कार्रवाई की गई और गोरक्षा से संबंधित कानूनों को सख्ती से लागू किया गया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से ज्यादा गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गोवंश के लिए प्रतिमाह 1,500 रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने लोगों से केवल सरकारी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं भी गोपालन से जुड़ने का आह्वान किया।
अशोक सिंघल के योगदान को किया याद
Ram Temple Movement : कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने भी अशोक सिंघल के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की हिंदू समाज की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंदू समाज में अपनी पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना मजबूत हुई। उन्होंने अशोक सिंघल के सामाजिक समरसता, शिक्षा और वेद शिक्षा से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगतगुरु श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने भी अशोक सिंघल के श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े संघर्ष को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि समाज को एकजुट करते समय धर्म की मर्यादाओं और सिद्धांतों को बनाए रखना आवश्यक है।
समारोह में वक्ताओं ने अशोक सिंघल के जीवन, उनके संगठनात्मक योगदान, सामाजिक कार्यों और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को याद करते हुए उनके विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.






